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Lucknow News: 25 साल से पार्किंसन झेल रही महिला को मिली नई जिंदगी
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। केजीएमयू के न्यूरोलॉजी और न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने 25 साल से पार्किंसन की गंभीर बीमारी से जूझ रही महिला का सफल ऑपरेशन कर उसे दर्द और कंपन से राहत दिलाई है।
हाथ-पैरों में लगातार कंपन और चलने-फिरने में असमर्थता के कारण राजधानी निवासी 50 वर्षीय महिला का जीवन कष्टमय हो गया था। दवाओं से सुधार न होने पर न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश वर्मा ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी। 25 मार्च को विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया, जिसके बाद मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।
संस्थान के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह आधुनिक न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें मस्तिष्क के विशेष हिस्सों में इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड शरीर में लगे एक पेसमेकर जैसे छोटे डिवाइस से जुड़े होते हैं, जो हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजकर दिमाग की असामान्य गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। यह तकनीक पार्किंसन और डिस्टोनिया जैसे मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है।
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टीम में शामिल रहे ये विशेषज्ञ
न्यूरोलॉजी विभाग से डॉ. राजेश वर्मा, डॉ. हरदीप सिंह मल्होत्रा, डॉ. सोमिल जायसवाल और डॉ. श्वेता पांडेय, निमहंस के विशेषज्ञ डॉ. द्वारकानाथ श्रीनिवास और डॉ. विक्रम होला, न्यूरो सर्जरी विभाग से अध्यक्ष डॉ. बीके ओझा समेत डॉ. नीरज कुमार, डॉ. सौरभ, डॉ. मनीष, डॉ. अंकुर, डॉ. अवधेश और डॉ. हनुमान प्रजापति।
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हाथ-पैरों में लगातार कंपन और चलने-फिरने में असमर्थता के कारण राजधानी निवासी 50 वर्षीय महिला का जीवन कष्टमय हो गया था। दवाओं से सुधार न होने पर न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश वर्मा ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी। 25 मार्च को विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया, जिसके बाद मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।
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संस्थान के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह आधुनिक न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें मस्तिष्क के विशेष हिस्सों में इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड शरीर में लगे एक पेसमेकर जैसे छोटे डिवाइस से जुड़े होते हैं, जो हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजकर दिमाग की असामान्य गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। यह तकनीक पार्किंसन और डिस्टोनिया जैसे मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है।
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टीम में शामिल रहे ये विशेषज्ञ
न्यूरोलॉजी विभाग से डॉ. राजेश वर्मा, डॉ. हरदीप सिंह मल्होत्रा, डॉ. सोमिल जायसवाल और डॉ. श्वेता पांडेय, निमहंस के विशेषज्ञ डॉ. द्वारकानाथ श्रीनिवास और डॉ. विक्रम होला, न्यूरो सर्जरी विभाग से अध्यक्ष डॉ. बीके ओझा समेत डॉ. नीरज कुमार, डॉ. सौरभ, डॉ. मनीष, डॉ. अंकुर, डॉ. अवधेश और डॉ. हनुमान प्रजापति।