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Lucknow News: 77 फीसदी सरकारी शिक्षक नहीं जांचते बच्चों का होमवर्क
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इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों की कक्षाओं में पढ़ाई का तरीका और सीखने का माहौल कैसा है, इसकी तस्वीर उत्तर प्रदेश टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 77 फीसदी शिक्षक बच्चों का होमवर्क नहीं जांचते, जबकि 72 फीसदी शिक्षक उन्हें कक्षा में अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं देते। 19 फीसदी शिक्षक बच्चों के स्थानीय रहन-सहन और भाषा को भी नहीं समझते। वहीं लगभग तीन-चौथाई शिक्षकों ने बच्चों को लेखन कार्य तो दिया, लेकिन वह मुख्य रूप से ब्लैकबोर्ड या पाठ्यपुस्तक से नकल कराने अथवा केवल अक्षर और शब्द लिखवाने तक सीमित रहा।
मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट और बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से तैयार उत्तर प्रदेश टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसका विमोचन अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने किया। इस अवसर पर अपर शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी भी मौजूद रहे।
रिपोर्ट के लिए नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच बहराइच, बरेली, मिर्जापुर और रायबरेली के 200 परिषदीय विद्यालयों की 200 कक्षाओं का अध्ययन किया गया। सर्वे में कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, भाषा एवं गणित शिक्षण, समय प्रबंधन और शिक्षक दृष्टिकोण समेत छह प्रमुख आयामों का विश्लेषण किया गया।
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टीएलएम के उपयोग में भी आधे शिक्षक पीछे
रिपोर्ट के मुताबिक 51 फीसदी शिक्षकों ने शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) का उपयोग किया, जबकि 49 फीसदी शिक्षकों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बच्चे कुल कक्षा समय के 26 फीसदी हिस्से में सीखने संबंधी गतिविधियों में शामिल नहीं रहते। वहीं शिक्षक दो-तिहाई से अधिक समय शिक्षक-केंद्रित गतिविधियों में व्यतीत करते हैं।
रिपोर्ट की सिफारिशों पर अमल के निर्देश
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि कक्षाओं में सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण बनाते हुए बच्चों को नियमित पठन और लेखन के अवसर देना जरूरी है। साथ ही समझ के आकलन के विभिन्न तरीकों को अपनाते हुए नियमित मूल्यांकन और कैच-अप शिक्षण पर जोर देना होगा। उन्होंने रिपोर्ट की 10 प्रमुख अनुशंसाओं पर आगामी शिक्षक क्लस्टर बैठकों में अनिवार्य रूप से चर्चा कर विद्यालय स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। अपर शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि शिक्षक कृष्ण की भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों को अर्जुन की तरह लक्ष्य के प्रति एकाग्र बनाएं। वहीं एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने अभ्यास आधारित शिक्षा और खेल-खेल में सीखने पर बल दिया।
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मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट और बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से तैयार उत्तर प्रदेश टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसका विमोचन अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने किया। इस अवसर पर अपर शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी भी मौजूद रहे।
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रिपोर्ट के लिए नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच बहराइच, बरेली, मिर्जापुर और रायबरेली के 200 परिषदीय विद्यालयों की 200 कक्षाओं का अध्ययन किया गया। सर्वे में कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, भाषा एवं गणित शिक्षण, समय प्रबंधन और शिक्षक दृष्टिकोण समेत छह प्रमुख आयामों का विश्लेषण किया गया।
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टीएलएम के उपयोग में भी आधे शिक्षक पीछे
रिपोर्ट के मुताबिक 51 फीसदी शिक्षकों ने शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) का उपयोग किया, जबकि 49 फीसदी शिक्षकों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बच्चे कुल कक्षा समय के 26 फीसदी हिस्से में सीखने संबंधी गतिविधियों में शामिल नहीं रहते। वहीं शिक्षक दो-तिहाई से अधिक समय शिक्षक-केंद्रित गतिविधियों में व्यतीत करते हैं।
रिपोर्ट की सिफारिशों पर अमल के निर्देश
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि कक्षाओं में सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण बनाते हुए बच्चों को नियमित पठन और लेखन के अवसर देना जरूरी है। साथ ही समझ के आकलन के विभिन्न तरीकों को अपनाते हुए नियमित मूल्यांकन और कैच-अप शिक्षण पर जोर देना होगा। उन्होंने रिपोर्ट की 10 प्रमुख अनुशंसाओं पर आगामी शिक्षक क्लस्टर बैठकों में अनिवार्य रूप से चर्चा कर विद्यालय स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। अपर शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि शिक्षक कृष्ण की भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों को अर्जुन की तरह लक्ष्य के प्रति एकाग्र बनाएं। वहीं एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने अभ्यास आधारित शिक्षा और खेल-खेल में सीखने पर बल दिया।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम

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