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रायबरेली की महिला की सालाना आय 100 रुपये
Updated Wed, 28 Mar 2018 11:48 PM IST
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डलमऊ की एक महिला की सालाना आय महज 100 रुपये
रायबरेली। डलमऊ की एक महिला की मासिक आय 8 रुपये है। जबकि महिला की सालाना आय महज 100 रुपये है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं।
बल्कि तहसीलदार की ओर से जारी आय प्रमाणपत्र में इसकी तस्दीक हो रही है। महिला को जारी आय प्रमाणपत्र को देखकर हर कोई हैरत में है।
तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए प्रमाणपत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डलमऊ तहसील क्षेत्र के सेलरहा मजरे बिसुनदासपुर की रहने वाली सूर्यसती पत्नी अशोक कुमार ने आय प्रमापपत्र के लिए आवेदन किया था।
ऑनलाइन आवेदन के बाद लेखपाल ने रिपोर्ट लगाई और बाद में तहसीलदार ने प्रमाणपत्र को जारी भी कर दिया। तहसीलदार ने जारी किए गए आय प्रमाणपत्र संख्या 285181001971 में सूर्यसती की मासिक आय 8.33 रुपये तय करते हुए वार्षिक आय मात्र 100 रुपये दिखाई है।
महिला को आय प्रमापपत्र मिला तो वह स्वयं भी अवाक रह गई। उसे इतना कम आय का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया कि उसे दुरुस्त कराने के लिए उसने तहसील के चक्कर लगाना शुरू कर दिया।
मामला संज्ञान में आने के बाद अब तहसील प्रशासन प्रमाणपत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया में जुट गया है। तहसील प्रशासन अपनी लापरवाही और चूक को छुपाने में जुट गया है।
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रायबरेली। डलमऊ की एक महिला की मासिक आय 8 रुपये है। जबकि महिला की सालाना आय महज 100 रुपये है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं।
बल्कि तहसीलदार की ओर से जारी आय प्रमाणपत्र में इसकी तस्दीक हो रही है। महिला को जारी आय प्रमाणपत्र को देखकर हर कोई हैरत में है।
तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए प्रमाणपत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डलमऊ तहसील क्षेत्र के सेलरहा मजरे बिसुनदासपुर की रहने वाली सूर्यसती पत्नी अशोक कुमार ने आय प्रमापपत्र के लिए आवेदन किया था।
ऑनलाइन आवेदन के बाद लेखपाल ने रिपोर्ट लगाई और बाद में तहसीलदार ने प्रमाणपत्र को जारी भी कर दिया। तहसीलदार ने जारी किए गए आय प्रमाणपत्र संख्या 285181001971 में सूर्यसती की मासिक आय 8.33 रुपये तय करते हुए वार्षिक आय मात्र 100 रुपये दिखाई है।
महिला को आय प्रमापपत्र मिला तो वह स्वयं भी अवाक रह गई। उसे इतना कम आय का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया कि उसे दुरुस्त कराने के लिए उसने तहसील के चक्कर लगाना शुरू कर दिया।
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मामला संज्ञान में आने के बाद अब तहसील प्रशासन प्रमाणपत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया में जुट गया है। तहसील प्रशासन अपनी लापरवाही और चूक को छुपाने में जुट गया है।
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