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सेना का बदलता चेहरा, लोगों के बीच बनाई पैठ
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
Updated Mon, 14 Mar 2016 03:44 PM IST
सार
- एलओसी के पास वाले गांवों में देखने को मिल रहा है, जहां सेना की ओर से कई स्कूलों का निर्माण किया गया है।
- हमीरपुर में एक अन्य पाइनवुड स्कूल में ग्रामीण बच्चे जिस तरह से साइंस विषय के प्रैक्टिकल समझते हैं, वह आश्चर्यजनक है।
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- फोटो : PTI
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक आतंकवाद से लड़ने वाली सेना का अब चेहरा बदलता जा रहा है। सेना आतंकियों से निपटने के अलावा लोगों के बीच जाकर उनमें अपनी पैठ बना रही है। इसका उदाहरण एलओसी के पास वाले गांवों में देखने को मिल रहा है, जहां सेना की ओर से कई स्कूलों का निर्माण किया गया है।
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इसके अलावा कुछ स्थानों पर सेना की ओर से सीमांत क्षेत्रों के बेरोजगारों के लिए कई योजनाएं चलाईं जा रही हैं। पाइन वुड स्कूल बाबरा में सेना की ओर से युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर चल रहा है।
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सीओ एचएस ग्रेवाल कहते हैं कि युवाओं को दो माह की ट्रेनिंग के दौरान शारीरिक और शैक्षणिक स्तर की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वह सेना के अलावा अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस और अन्य नौकरियों में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर सकें।
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उनकी ओर से चलाए जा रहे पहले बैच के 20 में से आधे युवक हाल ही में हुई पुलिस कांस्टेबल की प्रारंभिक परीक्षा में कामयाबी हासिल की है। अब उन्हें लिखित परीक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है।
हमीरपुर में एक अन्य पाइनवुड स्कूल में ग्रामीण बच्चे जिस तरह से साइंस विषय के प्रैक्टिकल समझते हैं, वह आश्चर्यजनक है। सेना के स्कूलों में शिक्षा पाकर वह सरकारी स्कूलों के बच्चों को हर क्षेत्र में मात दे रहे हैं। छात्रा कौसर ने कहा कि अगर सेना न होती तो हम स्कूल भी नहीं जा पाते। खास बात यह है कि इन स्कूलों में कई शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने यहीं से शिक्षा प्राप्त की है।