विश्व साक्षरता दिवसः सौ फीसदी साक्षरता दर से अभी 20 पायदान दूर है जम्मू-कश्मीर
प्रदेश में शत प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य से शिक्षा विभाग अभी 20 पायदान दूर है। वर्ष 2020 में साक्षरता दर 80 प्रतिशत के आसपास पहुंच पाई है। यानी बीस फीसदी जनता पढ़ना-लिखना नहीं जानती। प्रदेश सरकार ने साक्षरता दर बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाईं, लेकिन साक्षरता दर को सौ फीसदी तक पहुंचाने में सफलता नहीं मिल पाई।
कश्मीर घाटी के कुछ जिलों में विपरीत परिस्थितियों के कारण भी ऐसा हुआ है, लेकिन जम्मू संभाग में भी शिक्षा की लौ हर कोने तक पहुंचाना संभव नहीं हो पाया है। वर्ष 2001 के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 55 फीसदी साक्षरता दर थी।
इसके बाद दस साल काफी प्रयास करने के बाद साक्षरता दर 2011 में 67 प्रतिशत तक पहुंची। अब साल 2020 तक साक्षरता दर 80 प्रतिशत तक पहुंच पाई है। वहीं, 2001 से बीस साल पहले यानी 1981 में साक्षरता दर 38 प्रतिशत थी। 2001 में पुरुष साक्षरता दर 55 प्रतिशत थी जो 2011 में 66 प्रतिशत तक पहुंची। महिला साक्षरता दर 43 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 56 प्रतिशत पहुंच पाई। आंकड़ों के अनुसार महिलाएं अभी भी पढ़ाई में पीछे हैं।
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प्रदेश में 10 हजार बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई
साक्षरता दर का ग्राफ न बढ़ने का कारण बच्चों द्वारा बीच में स्कूल छोड़ देना भी है। कश्मीर घाटी समेत जम्मू संभाग के कुछ जिलों से अभी तक दस हजार से ज्यादा बच्चे स्कूल बीच में छोड़ चुके हैं।
तीन जिलों में साक्षरता दर 90 प्रतिशत से ऊपर
जम्मू, सांबा, लेह में साक्षरता दर 90 प्रतिशत से ऊपर है। बांदीपोरा, गांदरबल, बडगाम, रामबन, कुलगाम, रियासी में साक्षरता दर 70 प्रतिशत है।
साक्षरता दर बढ़ाने को चलाई कई योजनाएं
- मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को स्कूल लाने के प्रयास जारी हैं
- प्रदेश के दो हजार से ज्यादा स्कूलों में आगामी सत्र से प्री प्राइमरी कक्षाएं लगेंगी
- शिक्षा विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों को बच्चों को स्कूल भेजने की जिम्मेदारी सौंपी है
- किचन गार्डन के अलावा स्कूल में अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं
- स्टूडेंट हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं
- स्कूलों में किया जा रहा है बच्चों का चेकअप
- कोरोना संक्रमण के दौरान ऑनलाइन चल रही हैं बच्चों की कक्षाएं
प्रदेश में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए कई कारगर कदम उठाए गए हैं। योजनाओं के तहत बच्चों को स्कूल की ओर आकर्षित किया जा रहा है। स्कूलों में प्रवेश मेले आयोजित किए जा रहे हैं। साक्षरता दर से लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बच्चों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और शिक्षकों को प्रेरित किया जा रहा है। -अरुण मन्हास, निदेशक, समग्र शिक्षा विभाग