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Jammu News: नहरें नहीं बुझा रहीं जमीन की प्यास, किसानों को अब मानसून की आस
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नहरी पानी की पर्याप्त आपूर्ति न होने से निराश हैं किसान
धान की फसल उगाने के लिए बारिश पर जता रहे भरोसा
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। जलस्तर नीचे जाने और नहरी पानी की पर्याप्त आपूर्ति न होने से किसान मानसून बेहतर रहने पर धान की फसल अच्छी होने की संभावना जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि आरएस पुरा सेक्टर के अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंच पाना आज भी पहले की तरह ही है। इस वर्ष भी नहरों की सफाई करवाई गई। लेकिन, हालत यह है कि मुख्य व माइनर नहरें टूटने से खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा।
सीमांत गांव चोगा के किसान अशोक कुमार का कहना है कि आने वाले दिनों में धान लगाने के लिए किसानों को नहरी पानी की जरूरत होगी। लगभग 700 एकड़ कृषि योग्य भूमि पर धान लगाने के लिए किसान नहरी पानी पर निर्भर हैं। लेकिन, नहर टूटने पर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अगर इस बार मानसून बेहतर रहता है तो किसान समय पर धान की रोपाई कर पाएंगे। किसान हंसराज ने कहा कि शुरुआत जोरदार बरसात से हुई है, जिसके चलते मानसून के मजबूत रहने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ किसान धान की खेती के लिए दूसरे सिंचाई के साधनों पर निर्भर हैं। लेकिन, जलस्तर काफी गिर जाने से पंपसेट और मोटर से भी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा।
आंकड़ों के मुताबिक आरएस पुरा में कुल 60551 एकड़ भूमि कृषि योग्य है। गत वर्ष 45413 एकड़ भूमि पर किसानों ने बासमती चावल लगाया था। लेकिन, अब किसान बासमती चावल के बजाय शरबती व मोटे चावल लगाना ही बेहतर समझ रहे हैं। बासमती चावल तैयार होने में एक तो समय अधिक लगता है। दूसरी ओर सिंचाई के लिए पानी पर्याप्त नहीं मिल पा रहा है।
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नहर टूटने पर समय रहते विभाग उसे ठीक करता है। नहरी पानी कम होने का कारण दूसरे विंग से नहर में पानी कम छोड़ा जाना है। जिस हिसाब से पानी हमें मिल रहा है, उसी के मुताबिक हम दूसरी नहरों में पानी छोड़ रहे हैं।
- विनोद मेहरा, एईई, सिंचाई विभाग
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धान की फसल उगाने के लिए बारिश पर जता रहे भरोसा
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। जलस्तर नीचे जाने और नहरी पानी की पर्याप्त आपूर्ति न होने से किसान मानसून बेहतर रहने पर धान की फसल अच्छी होने की संभावना जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि आरएस पुरा सेक्टर के अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंच पाना आज भी पहले की तरह ही है। इस वर्ष भी नहरों की सफाई करवाई गई। लेकिन, हालत यह है कि मुख्य व माइनर नहरें टूटने से खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा।
सीमांत गांव चोगा के किसान अशोक कुमार का कहना है कि आने वाले दिनों में धान लगाने के लिए किसानों को नहरी पानी की जरूरत होगी। लगभग 700 एकड़ कृषि योग्य भूमि पर धान लगाने के लिए किसान नहरी पानी पर निर्भर हैं। लेकिन, नहर टूटने पर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अगर इस बार मानसून बेहतर रहता है तो किसान समय पर धान की रोपाई कर पाएंगे। किसान हंसराज ने कहा कि शुरुआत जोरदार बरसात से हुई है, जिसके चलते मानसून के मजबूत रहने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ किसान धान की खेती के लिए दूसरे सिंचाई के साधनों पर निर्भर हैं। लेकिन, जलस्तर काफी गिर जाने से पंपसेट और मोटर से भी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा।
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आंकड़ों के मुताबिक आरएस पुरा में कुल 60551 एकड़ भूमि कृषि योग्य है। गत वर्ष 45413 एकड़ भूमि पर किसानों ने बासमती चावल लगाया था। लेकिन, अब किसान बासमती चावल के बजाय शरबती व मोटे चावल लगाना ही बेहतर समझ रहे हैं। बासमती चावल तैयार होने में एक तो समय अधिक लगता है। दूसरी ओर सिंचाई के लिए पानी पर्याप्त नहीं मिल पा रहा है।
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नहर टूटने पर समय रहते विभाग उसे ठीक करता है। नहरी पानी कम होने का कारण दूसरे विंग से नहर में पानी कम छोड़ा जाना है। जिस हिसाब से पानी हमें मिल रहा है, उसी के मुताबिक हम दूसरी नहरों में पानी छोड़ रहे हैं।
- विनोद मेहरा, एईई, सिंचाई विभाग