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Jammu News: जम्मू में 42 में से 23 टैंकर की अवधि पूरी, 1.50 लाख आबादी होगी प्रभावित
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अगले माह प्रचंड गर्मी में लोगों को पेयजल किल्लत से दो चार होना पड़ेगा। कारण- 42 में से 23 टैंकर के 15 साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में 19 टैंकरों के माध्यम से शहर में पेयजल आपूर्ति होगी। ये हालात हर साल होते हैं। मगर अब स्थिति और नाजुक हो सकती है।
विभाग की लापरवाही से करीब 1.50 लाख आबादी प्रभावित होने की संभावना है, क्योंकि जानकारी होने के बावजूद टैंकर खरीदने या फिर अन्य विकल्प ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अप्रैल में टैंकरों को खड़ा कर दिया। पहले ही कुछ जगहों में तीन से पांच दिन बाद पानी आ रहा है। पिछले साल मई में 7500 से नौ हजार कॉल आई जिनमें 3420 को ही राहत मिल पाई। पुराना शहर, जानीपुर, बख्शी नगर, पलौड़ा, सतवारी, सैनिक कॉलोनी, नरवाल, बठिंडी, सुजवां, त्रिकुटा नगर, संजय नगर समेत अन्य जगह में समस्या ज्यादा है। इन इलाकों में सरकारी के अलावा प्रतिदिन औसतन चार से पांच निजी टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। एक सरकारी टैंकर के बाद दूसरा आने में दो घंटे का समय लग जाता है। अभी शहर में दो तरह के टैंकरों का प्रयोग हो रहा है, जो चार हजार लीटर और नौ हजार लीटर क्षमता के है। निजी टैंकर के लिए 1200 से 1500 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। दूसरी ओर, जल शक्ति विभाग नए टैंकर खरीदने का फैसला नहीं ले पाया।
कारण, विकल्प और ऐसे करें संपर्क
एक टैंकर एक लीटर डीजल में दस किलोमीटर सफर तय कर सकता है। मगर 15 साल पुराने टैंकर मात्र तीन किलोमीटर में ही हांफ जाते थे। इससे हर माह पानी आपूर्ति पर अतिरिक्त राशि खर्च हो रही थी। जलशक्ति विभाग निजी टैंकरों को हायर कर सकता है। पानी आपूर्ति के हिसाब से ठेकेदार को पेमेंट होगी। पूर्व मुख्य अभियंता अशोक गंडोत्रा के अनुसार आबादी के हिसाब से टैंकर होने चाहिए। मौजूदा समय में ढांचा विकसित नहीं हो रहा, जिससे परेशानी आ रही है। पानी के स्रोतों को भी बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं, अगर आपने टैंकर मंगवाना है तो संबंधिक पार्षद के साथ संपर्क करें। एक्सईएन की स्वीकृति मिलने के बाद टैंकर इलाके में पहुंच जाएगा।
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पार्षद बोले- पहले ही होना चाहिए था प्रबंध
वार्ड 28 के पार्षद गौरव चोपड़ा ने बताया कि गर्मी से पहले व्यवस्था होनी चाहिए थी। मई में पानी की मांग बढ़ेगी। ऐसे में टैंकर ही अंतिम विकल्प होगा। इसी तरह वार्ड 74 के पार्षद सौबल अली ने कहा- ग्रामीण इलाकों को शहर से जोड़ा गया है। गर्मी में लोग टैंकरों पर आश्रित हैं। इनमें कटौती से परेशानी बढ़ेगी।
15 साल पुराने वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में कुछ टैंकरों को बंद कर दिया है। अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
- अरुण खन्ना, चेयरमैन हेल्थ एंड सैनिटेशन कमेटी, पीएचई
टैंकरों को बंद करने के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है। जल्द ही नए टैंकर खरीदे जाएंगे।
- सुमन, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग
लोगों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जल्द ही बैठक की जाएगी।
- राजिंदर शर्मा, मेयर
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जम्मू। अगले माह प्रचंड गर्मी में लोगों को पेयजल किल्लत से दो चार होना पड़ेगा। कारण- 42 में से 23 टैंकर के 15 साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में 19 टैंकरों के माध्यम से शहर में पेयजल आपूर्ति होगी। ये हालात हर साल होते हैं। मगर अब स्थिति और नाजुक हो सकती है।
विभाग की लापरवाही से करीब 1.50 लाख आबादी प्रभावित होने की संभावना है, क्योंकि जानकारी होने के बावजूद टैंकर खरीदने या फिर अन्य विकल्प ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अप्रैल में टैंकरों को खड़ा कर दिया। पहले ही कुछ जगहों में तीन से पांच दिन बाद पानी आ रहा है। पिछले साल मई में 7500 से नौ हजार कॉल आई जिनमें 3420 को ही राहत मिल पाई। पुराना शहर, जानीपुर, बख्शी नगर, पलौड़ा, सतवारी, सैनिक कॉलोनी, नरवाल, बठिंडी, सुजवां, त्रिकुटा नगर, संजय नगर समेत अन्य जगह में समस्या ज्यादा है। इन इलाकों में सरकारी के अलावा प्रतिदिन औसतन चार से पांच निजी टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। एक सरकारी टैंकर के बाद दूसरा आने में दो घंटे का समय लग जाता है। अभी शहर में दो तरह के टैंकरों का प्रयोग हो रहा है, जो चार हजार लीटर और नौ हजार लीटर क्षमता के है। निजी टैंकर के लिए 1200 से 1500 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। दूसरी ओर, जल शक्ति विभाग नए टैंकर खरीदने का फैसला नहीं ले पाया।
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कारण, विकल्प और ऐसे करें संपर्क
एक टैंकर एक लीटर डीजल में दस किलोमीटर सफर तय कर सकता है। मगर 15 साल पुराने टैंकर मात्र तीन किलोमीटर में ही हांफ जाते थे। इससे हर माह पानी आपूर्ति पर अतिरिक्त राशि खर्च हो रही थी। जलशक्ति विभाग निजी टैंकरों को हायर कर सकता है। पानी आपूर्ति के हिसाब से ठेकेदार को पेमेंट होगी। पूर्व मुख्य अभियंता अशोक गंडोत्रा के अनुसार आबादी के हिसाब से टैंकर होने चाहिए। मौजूदा समय में ढांचा विकसित नहीं हो रहा, जिससे परेशानी आ रही है। पानी के स्रोतों को भी बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं, अगर आपने टैंकर मंगवाना है तो संबंधिक पार्षद के साथ संपर्क करें। एक्सईएन की स्वीकृति मिलने के बाद टैंकर इलाके में पहुंच जाएगा।
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पार्षद बोले- पहले ही होना चाहिए था प्रबंध
वार्ड 28 के पार्षद गौरव चोपड़ा ने बताया कि गर्मी से पहले व्यवस्था होनी चाहिए थी। मई में पानी की मांग बढ़ेगी। ऐसे में टैंकर ही अंतिम विकल्प होगा। इसी तरह वार्ड 74 के पार्षद सौबल अली ने कहा- ग्रामीण इलाकों को शहर से जोड़ा गया है। गर्मी में लोग टैंकरों पर आश्रित हैं। इनमें कटौती से परेशानी बढ़ेगी।
15 साल पुराने वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में कुछ टैंकरों को बंद कर दिया है। अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
- अरुण खन्ना, चेयरमैन हेल्थ एंड सैनिटेशन कमेटी, पीएचई
टैंकरों को बंद करने के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है। जल्द ही नए टैंकर खरीदे जाएंगे।
- सुमन, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग
लोगों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जल्द ही बैठक की जाएगी।
- राजिंदर शर्मा, मेयर