फिर डोमिसाइल कानून पर उठा बवंडर, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने कहा- जनसांख्यिकी में बदलाव की कोशिश
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बिहार के मूल निवासी और जम्मू-कश्मीर कैडर के आईएएस अधिकारी नवीन कुमार चौधरी को डोमिसाइल प्रमाण पत्र जारी होने के साथ ही एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह जनसांख्यिकी में बदलाव करने की कोशिश है। इस बीच नई व्यवस्था लागू होने के बाद 30 हजार से ज्यादा लोग ऑनलाइन डोमिसाइल प्रमाणपत्र ले चुके हैं।
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नेशनल कॉफ्रेंस(नेकां) ने जम्मू कश्मीर से बाहर के लोगों को डोमिसाइल प्रमाणपत्र देने को असांविधानिक और जनविरोधी प्रक्रिया बताया है। कहा कि इस कवायद का मकसद स्थायी बाशिंदों को राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर करना है। पार्टी ने डोमिसाइल आदेश को तुरंत वापस लिए जाने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि डोमिसाइल संबंधी नए नियमों से जम्मू कश्मीर के लोगों को नुकसान होगा।
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कहा कि डोमिसाइल नियमों को लेकर हमारी सभी आशंका सच साबित हो रही हैं। नेकां इस बदलाव का विरोध करती है क्योंकि हमें इस बदलाव के पीछे के इरादे सही नहीं लगते हैं। जम्मू कश्मीर के पीर पंजाल पर्वत के दोनों तरफ के लोगों को इन नए नियमों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि पार्टी नए नियमों का विरोध करती है। आरोप लगाया कि नए नियमों का उद्देश्य स्थानीय निवासियों को राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर करना है।
नए कानून पर पीपुल्स डेमोक्रटिक पार्टी (पीडीपी) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि केंद्र सरकार के इन अप्रत्यक्ष तरीकों का मकसद प्रदेश की जनसांख्यिकी में बदलाव करना है। आरोप लगाया कि केंद्र का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर के मुस्लिम बहुलता वाले राज्य की संरचना को बदलने का है। वह भी ऐसे समय में जब इस देश में सभी चीजों को धर्म के चश्मे से देखा जा रहा है।
पार्टी प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि एजेंडा सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी मंशा जनसांख्यिकीय बदलाव करने की है। नौकरियां, प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक पहचान और वे सभी चीजें जिन्हें कश्मीर के लोगों ने सुदृढ़ सांविधानिक गारंटी के माध्यम से बचा कर रखा था वह सभी उनके निशाने पर हैं।