{"_id":"abcfdd38e84b3adb35cb6c6df352d0f8","slug":"two-year-sentence-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नायब तहसीलदार को मिली गुनाहों की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नायब तहसीलदार को मिली गुनाहों की सजा
जेएनएफ/जम्मू
Updated Thu, 11 Feb 2016 01:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आठ साल पुराने मामले का निपटारा करते हुए स्पेशल जज एंटी करप्शन जम्मू की अदालत ने आरोपी नायब तहसीलदार मोहम्मद असगर भट को धोखाधड़ी का दोषी करार देते हुए दो साल की कैद और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है।
विज्ञापन
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार नायब तहसीलदार मोहम्मद असगर भट को जायंट अग्रेरियन रिफार्म्स कमिश्नर जम्मू के साथ अटैच किया था। शिकायतकर्ता के साथ नायब तहसीलदार की जान पहचान थी।
विज्ञापन
नायब तहसीलदार ने शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये की फीस के एवज में राजस्व रिकार्ड से जुड़े दस्तावेज बनाकर देने का भरोसा दिया। पैसे लेने के बाद नायब तहसीलदार ने तीन दस्तावेज बनाकर शिकायतकर्ता को सौंपे, लेकिन बाद में यह दस्तावेज फर्जी पाए गए।
विज्ञापन
जांच एजेंसी क्राइम ब्रांच ने पड़ताल में पाया कि एक तो दस्तावेज ही फर्जी थे, वहीं नायब तहसीलदार के पास इस स्तर के दस्तावेज बनाने के अधिकार भी नहीं थे। स्पेशल जज एंटी करप्शन जम्मू एके कौल ने अपने फैसले में कहा कि मामले में साबित होता है कि अभियुक्त ने सब कुछ जानते हुए भी धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
चूंकि अभियुक्त राजस्व अधिकारी है ऐसे में उस पर राजस्व रिकार्ड के कस्टोडियन की जिम्मेदारी भी बनती है। अपराध को देखते हुए किसी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं रह जाती। बहरहाल मामला चूंकि आठ साल से विचाराधीन चल रहा था और अभियुक्त की आयु 60 वर्ष है।
ऐसे में कठोर सजा का असर अभियुक्त के परिवार पर भी पड़ना लाजमी है, जबकि परिवार वालों का इस मामले में कोई कसूर नहीं है। तमाम पहलुओं को देखते हुए अदालत अभियुक्त को दो साल की कैद और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाती है।