गन का लाइसेंस लेने आ रहे हैं या कार का?
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गन लाइसेंस लेने के लिए जिला उपायुक्त कार्यालय में आवेदकों की भीड़ इस कद्र लगी होती है कि जैसे लाइसेंस गन का नहीं, बल्कि मोटरसाइकिल या कार का लेना होता है।
डीसी कार्यालय में दो हजार से ज्यादा लोगों ने गन लाइसेंस के लिए आवेदन किए हैं, जिन्हें डीसी ने पेंडिंग लिस्ट में रखा हुआ है और हर आवेदन करने वाले से हथियार रखने का कारण पूछ रहे हैं कि आखिर उन्हें क्या जरूरत है।
बावजूद लोग बाज नहीं आ रहे हैं। सिरदर्दी बनते जा रहे गन लाइसेंस के लिए सिफारिशें भी बहुत लगाई जा रही हैं।
लोग प्रभावी लोगों की सिफारिशें भी लगा रहे
डीसी अजीत कुमार साहू के मुताबिक सभी लोगों के पास हथियार होना कोई अच्छी बात नहीं है। इसलिए वह गन लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले से उसका नाम, कामधंधा, कहां रहते हैं, क्या करते हैं।
लाइसेंस क्यों चाहिए आदि कई प्रकार के सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन आवेदन करने वाले बिना किसी बात को समझे दोबारा-दोबारा से आफिस पहुंच रहे हैं और यही नहीं, प्रभावी लोगों की सिफारिशें भी लगा रहे हैं।
गन लाइसेंस आवेदन करने के लिए बेल्ट फोर्स के लोग तो कम हैं, लेकिन किसान, दुकानदार, व्यापारी, सरपंच, गली मोहल्ला और छोटे संगठनों के प्रधान और छुटपुट काम धंधे वाले लोग ज्यादा हैं। डीसी ने साफ तौर पर कहा है कि हथियार का शौक रखने वालों को किसी भी कीमत पर गन लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।