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सुचेतगढ़ से जुड़ेगा घराना वेटलैंड, सीमा पर्यटन के खुलेंगे द्वार
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जम्मू। आरएस पुरा स्थित घराना वेटलैंड की भूमि का विस्तार होने के साथ बार्डर पर्यटन को बढ़ावा मिलने के रास्ते खुल गए हैं। इस वेटलैंड को भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित ऑक्ट्राय बीओपी पोस्ट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि पोस्ट पर रिट्रीट सेरेमनी देखने आने वाले पर्यटक वेटलैंड पर प्रवासी पक्षियों के बीच यागदार पल बिता सकें। वन्यजीव विभाग की प्रबंधन योजना में घराना का अगले दस साल में अनुमानित 24 करोड़ रुपये की लागत से चरणबद तरीके से विस्तार किया जाएगा।
घराना वेटलैंड को 4 फरवरी 1981 को अधिसूचित किया गया था। तब कागजों में वेटलैंड 400 से अधिक कनाल भूमि में दर्शाया गया था, लेकिन आबादी का विस्तार होने के साथ इसका दायरा भी घटता गया। वन्य जीव विभाग के पास करीब 90 कनाल भूमि पर पानी के छप्पड़ की ही जिम्मेदारी थी, जबकि वेटलैंड की आसपास की जमीन पर क्षेत्रवासी गतिविधियां कर रहे थे। लेकिन अब वेटलैंड को उसकी 402 कनाल भूमि वापस दे दी गई है। इसमें सरकारी व निजी भूमि शामिल है। विभाग की प्रबंधन योजना में वेटलैंड क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर निकल रहे गोबर आदि वेस्ट का वैज्ञानिक ढंग से निपटान किया जाएगा। वेटलैंड क्षेत्र की पूरी फेंसिंग होगी। छप्पड़ के आसपास फेंसिंग के साथ निकासी व्यवस्था की जाएगी, ताकि गंदगी बाहर न निकल सके। इसके अलावा संबंधित गांव के बाहर एप्रोच सड़क बनाई जाएगी और इसका सुचेतगढ़ तक विस्तार करने की योजना है। वेटलैंड क्षेत्र में जल स्तर बनाए रखने की व्यवस्था की जाएगी। पर्यटकों के लिए एग्जि और व्यू प्वाइंट स्थापित होंगे, मौजूदा समय में वेटलैंड पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। वर्तमान में छप्पड़ की साफ सफाई का काम किया जा रहा है।
24 प्रजातियों के पक्षी आते हैं हर साल
घराना में करीब से प्रवासी पक्षियों को देखने का मौका मिलता है। देश में घराना वेटलैंड एकमात्र ऐसा वन्य क्षेत्र हैं, यहां बिल्कुल पास से प्रवासी पक्षियों को देखने का मौका मिलता है। यहां चीन, सेंट्रल एशिया, मंगोलिया आदि देशों से दो से तीन हजार किलोमीटर का हवाई सफर तय करके करीब 24 प्रजातियों के पक्षी पहुंचते हैं। ये हिमालय को पार करके यहां आते हैं। इनमें प्रमुख कांब बतख, ब्रामणी बतख, जंगली (मालर्ड) बतख) ब्लैक इबिस, पेटेड स्ट्राक व यूरोशियन कबूतर शामिल हैं।
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हलचल बढ़ने से नहीं उतर रहे थे पक्षी
कुछ सालों से वेटलैंड क्षेत्र के आसपास लोगों की हलचल बढ़ने से पक्षी जमीन पर कम उतर रहे थे। बताया जाता है कि कुछ पक्षी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के बीच कठमरिया क्षेत्र के छप्पड़ में बसेरा करने लगे हैं। इसका मुख्य कारण यहां सुरक्षा कारणों से किसी व्यक्ति का नहीं पहुंचना है, जिससे पक्षी दल छप्पड़ में रहते रहे हैं।
पक्षियों के लिए लगाई जाएगी गेहूं
घराना वेटलैंड में प्रतिदिन छह हजार से अधिक पक्षियों का आवागमन होता है। ये छप्पड़ में रहते हैं और बाहर आकर गेहूं खाते हैं। चूंकि अब किसान गेहूं नहीं लगाएंगे। इस कारण वन्यजीव विभाग की गेहूं लगाने की व्यवस्था करेगा, ताकि पक्षियों के लिए खाने का प्रबंध हो सके।
वेटलैंड के विस्तार से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
घराना वेटलैंड के विस्तार से बार्डर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए सभी जरूरी कार्यों में तेजी लाई जाएगी। आगामी समय में वेटलैंड पर बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। ये पक्षी नवंबर के मध्य तक आकर गर्मी शुरू होने पर अपने मूल स्थानों पर लौट जाते हैं।
- अनिल खत्री, वार्डन, वन्य जीव, जम्मू
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घराना वेटलैंड को 4 फरवरी 1981 को अधिसूचित किया गया था। तब कागजों में वेटलैंड 400 से अधिक कनाल भूमि में दर्शाया गया था, लेकिन आबादी का विस्तार होने के साथ इसका दायरा भी घटता गया। वन्य जीव विभाग के पास करीब 90 कनाल भूमि पर पानी के छप्पड़ की ही जिम्मेदारी थी, जबकि वेटलैंड की आसपास की जमीन पर क्षेत्रवासी गतिविधियां कर रहे थे। लेकिन अब वेटलैंड को उसकी 402 कनाल भूमि वापस दे दी गई है। इसमें सरकारी व निजी भूमि शामिल है। विभाग की प्रबंधन योजना में वेटलैंड क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर निकल रहे गोबर आदि वेस्ट का वैज्ञानिक ढंग से निपटान किया जाएगा। वेटलैंड क्षेत्र की पूरी फेंसिंग होगी। छप्पड़ के आसपास फेंसिंग के साथ निकासी व्यवस्था की जाएगी, ताकि गंदगी बाहर न निकल सके। इसके अलावा संबंधित गांव के बाहर एप्रोच सड़क बनाई जाएगी और इसका सुचेतगढ़ तक विस्तार करने की योजना है। वेटलैंड क्षेत्र में जल स्तर बनाए रखने की व्यवस्था की जाएगी। पर्यटकों के लिए एग्जि और व्यू प्वाइंट स्थापित होंगे, मौजूदा समय में वेटलैंड पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। वर्तमान में छप्पड़ की साफ सफाई का काम किया जा रहा है।
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24 प्रजातियों के पक्षी आते हैं हर साल
घराना में करीब से प्रवासी पक्षियों को देखने का मौका मिलता है। देश में घराना वेटलैंड एकमात्र ऐसा वन्य क्षेत्र हैं, यहां बिल्कुल पास से प्रवासी पक्षियों को देखने का मौका मिलता है। यहां चीन, सेंट्रल एशिया, मंगोलिया आदि देशों से दो से तीन हजार किलोमीटर का हवाई सफर तय करके करीब 24 प्रजातियों के पक्षी पहुंचते हैं। ये हिमालय को पार करके यहां आते हैं। इनमें प्रमुख कांब बतख, ब्रामणी बतख, जंगली (मालर्ड) बतख) ब्लैक इबिस, पेटेड स्ट्राक व यूरोशियन कबूतर शामिल हैं।
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हलचल बढ़ने से नहीं उतर रहे थे पक्षी
कुछ सालों से वेटलैंड क्षेत्र के आसपास लोगों की हलचल बढ़ने से पक्षी जमीन पर कम उतर रहे थे। बताया जाता है कि कुछ पक्षी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के बीच कठमरिया क्षेत्र के छप्पड़ में बसेरा करने लगे हैं। इसका मुख्य कारण यहां सुरक्षा कारणों से किसी व्यक्ति का नहीं पहुंचना है, जिससे पक्षी दल छप्पड़ में रहते रहे हैं।
पक्षियों के लिए लगाई जाएगी गेहूं
घराना वेटलैंड में प्रतिदिन छह हजार से अधिक पक्षियों का आवागमन होता है। ये छप्पड़ में रहते हैं और बाहर आकर गेहूं खाते हैं। चूंकि अब किसान गेहूं नहीं लगाएंगे। इस कारण वन्यजीव विभाग की गेहूं लगाने की व्यवस्था करेगा, ताकि पक्षियों के लिए खाने का प्रबंध हो सके।
वेटलैंड के विस्तार से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
घराना वेटलैंड के विस्तार से बार्डर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए सभी जरूरी कार्यों में तेजी लाई जाएगी। आगामी समय में वेटलैंड पर बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। ये पक्षी नवंबर के मध्य तक आकर गर्मी शुरू होने पर अपने मूल स्थानों पर लौट जाते हैं।
- अनिल खत्री, वार्डन, वन्य जीव, जम्मू