कश्मीर में पर्यटको की बेरूखी से फिर होने लगी मायूसी
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देश में एक तरफ जहां तापमान 50 डिग्री तक पहुंच रहा है, वहीं कश्मीर में ठंडी हसीन वादियों का सुहाना मौसम है। हल्की बारिश, ठंडी हवाओं और डल झील की खूबसूरती किसी को भी मोह लेगी। यह सब होने के बावजूद कश्मीर पर्यटकों की राह देख रहा है। डल झील में न तो शिकारा में रौनक दिख रही है न ही हाउसबोट और होटलों में पर्यटकों की आमद है।
किसी होटल में एक कमरा बुक है तो किसी में दो। यही हाल हाउसबोट का भी है। पर्यटन कारोबारी भरे मन से एक ही बात कह रहे हैं, यहां सबकुछ ठीक है। टीवी को देखकर मत कुछ सोचिए। आप आइए तो सही, हम आपकी खिदमत में पलकें बिछा देंगे। देश भर में एक दर्जन रोड शो करने के बावजूद कश्मीर में पीक सीजन होते हुए भी पर्यटकों का टोटा है। पर्यटन विभाग और पर्यटन कारोबारियों के जी-तोड़ प्रयास भी पर्यटकों को घाटी की तरफ नहीं खींच पाए।
कश्मीर हाउसबोट एसोसिएशन के प्रधान गुलाम रसूल ने बताया कि कुल 965 हाउसबोट हैं। सिर्फ 250 हाउसबोट में ही कुछ पर्यटक हैं। हमने तो बहुत प्रयास किए हैं। देश के पर्यटकों से कहना चाहता हूं कि आप कश्मीर आइए तो सही, यहां ऐसा कुछ नहीं जो टीवी पर देखते हैं। वह 30 फीसदी छूट भी दे रहे हैं।
सब कुछ है, लेकिन टूरिस्ट नहीं
कश्मीर होटल एसोसिएशन के प्रधान जावेद बुर्जा का कहना है कि पहलगाम, श्रीनगर, गुलमर्ग और सोनमर्ग में 3 हजार होटलों के 20 हजार कमरे हैं, जिनमें से हर रोज 500 से 600 होटलों में कहीं एक कमरा बुक होता है, तो कहीं पर दो कमरे, जबकि हमने 40 फीसदी तक की छूट दे रखी है।
वह पर्यटकों के रवैये से बहुत आहत हैं। सब कुछ ठीक होते हुए भी घाटी में पर्यटक नहीं आना बहुत दर्द देने वाला हैं। कश्मीर चैंबर काफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मुश्ताक वानी का कहना है कि कश्मीर में सब कुछ है, लेकिन टूरिस्ट नहीं है। छह महीने तक हमने हिंसा की मार झेली। इसमें कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ। पीक सीजन से कुछ उम्मीद थी, लेकिन इसमें भी कोई लाभ नहीं हुआ।