Jammu Kashmir: संभाग के चार मेडिकल कॉलेजों में एमआरआई सुविधा नहीं, जम्मू की लंबे समय से खराब
संभाग के जीएमसी राजोरी, डोडा और कठुआ में अभी तक एमआरआई मशीन नहीं लग पाई है। इन जिलों से मरीज सरकारी स्तर पर एमआरआई के लिए जीएमसी जम्मू आते हैं। यहां भी मशीन के बंद रहने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
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जम्मू संभाग में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के दावे किए जा रहे हैं। संभाग में कुछ सालों में तीन नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, लेकिन महत्वपूर्ण उपकरणों को लेकर अभी नए मेडिकल कॉलेजों में कुछ खास नहीं हो पाया है। संभाग के जीएमसी राजोरी, डोडा और कठुआ में अभी तक एमआरआई मशीन नहीं लग पाई है।
इन जिलों से सैकड़ों मरीज सरकारी स्तर पर एमआरआई के लिए जीएमसी जम्मू आते हैं, लेकिन यहां भी मशीन के बंद रहने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। वर्ष 2017 में प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने की कवायद की गई थी, जिसमें वर्ष 2019 में जीएमसी कठुआ और जीएमसी राजोरी में 100-100 एमबीबीएस छात्रों का बैच शुरू किया गया।
इसके अगले साल वर्ष 2020 में जीएमसी डोडा में भी 100 एमबीबीएस छात्रों का बैच शुरू किया गया। इन तीनों मेडिकल कालेजों के शुरू होने से सामान्य तौर पर मरीज स्थानीय अस्पतालों में पहुंचने लगे, लेकिन एमआरआई जैसे जरूरी टेस्ट के लिए उन्हें लंबा सफर तय करके अभी भी जीएमसी जम्मू आना पड़ रहा है।
तीनों मेडिकल कालेजों में एमआरआई मशीन को शुरू करने के लिए हिम्मत नहीं दिखाई गई। नतीजतन जिला स्तर पर मरीजों को जीएमसी के नाम से शुरू हुए इन अस्पतालों में अत्याधुनिक टेस्टों से वंचित रहना पड़ रहा है।
वहीं, जीएमसी जम्मू में एमआरआई मशीन खराब होने से भी मरीज परेशान हैं। यहां रोजाना जिला स्तर से भी ऐसे कई मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें एमआरआई की जरूरत है, लेकिन उन्हें अगले दो से तीन महीने की तिथि देकर भेज दिया जा रहा है।
जीएमसी के एमआरआई सेक्शन में अपने मरीज के साथ आए कुंजवानी निवासी इंद्रपाल सिंह ने बताया कि उनके मरीज को न्यूरो की समस्या होने के कारण एमआरआई की जरूरत है, लेकिन अस्पताल में एमआरआई की मशीन खराब पड़ी है। जिससे उन्हें मजबूरन निजी क्लीनिक में जाकर टेस्ट करवाना पड़ेगा।
जीएमसी राजोरी के प्रिंसिपल डॉ. अमरजीत सिंह भाटिया का कहना है कि अस्पताल में एमआरआई मशीन के लिए डीपीआर बनाकर भेज दी गई है। उम्मीद है कि जल्द मशीन के लगने से लोगों को राहत मिलेगी। जीएमसी कठुआ के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री का कहना है कि पीएम पैकेज के तहत एमआरआई मशीन की मांग की गई है। जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
नई मशीनों को शुरू करने को रेडियोलाजिस्ट की कमी बड़ी चुनौती
नए मेडिकल कालेजों में अगर एमआरआई जैसी अत्याधुनिक मशीनें स्थापित कर भी दी जाती हैं, तो इन्हें चलाने के लिए रेडियोलाजिस्ट की कमी बड़ी चुनौती रहेगी। नए मेडिकल कॉलेजों में पहले से ही सीमित स्टाफ से अस्पतालों को चलाया जा रहा है।
एमआरआई जैसी मशीनों को चलाने के लिए प्रशिक्षित रेडियोलाजिस्ट की जरूरत होती है, जो फिलहाल जीएमसी जम्मू में मौजूद हैं। हालांकि डीएनबी सीटें बढ़ने से अगले कुछ समय में विशेषज्ञ डाक्टरों और टेक्नीशियनों की कमी को दूर किया जा सकेगा।