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जम्मू-कश्मीर में जानवरों के वध पर कोई प्रतिबंध नहीं, प्रशासन ने किया स्पष्ट

Sat, 17 Jul 2021 01:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा श्रीनगर, पीटीआई
श्रीनगर, पीटीआई Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 17 Jul 2021 01:19 AM IST
सार

यह आदेश पशु वध से संबंधित विभिन्न अधिनियमों के क्रियान्वयन के लिए जीव जंतु कल्याण बोर्ड की ओर से जारी किया गया था और प्रशासन का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

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There is no ban on the slaughter of animals in Jammu and Kashmir administration clarified
demo pic.. - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने ईद-उल-अजहा के मौके पर गायों और ऊंटों को अवैध रूप से मारने पर रोक लगाने वाले आदेश को लेकर शुक्रवार को स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि केन्द्र शासित प्रदेश में गोवंश के पशुओं के वध पर किसी प्रकार की कोई रोक नहीं है। यह आदेश पशु वध से संबंधित विभिन्न अधिनियमों के क्रियान्वयन के लिए जीव जंतु कल्याण बोर्ड की ओर से जारी किया गया था और प्रशासन का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

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एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि पशु और भेड़ पालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नियमों के अनुसार जानवरों के वध पर प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया है।
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प्रवक्ता ने कहा, ‘‘भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड प्रत्येक वर्ष कानूनों और नियमों का पालन करते हुए पशु वध के संबंध में परामर्श जारी करता है। इस साल भी यही परामर्श जारी किया गया है और संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है।’’
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इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पशु-भेड़पालन एवं मत्स्य पालन विभाग ने इस संबंध में जम्मू के साथ-साथ कश्मीर के संभागीय आयुक्तों और आईजीपी (पुलिस महानिरीक्षक) को पत्र लिखकर बकरीद के अवसर पर गायों, बछड़ों और ऊंटों को मारने पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। गौरतलब है कि ईद के अवसर पर भेड़, गाय, बछड़ों और ऊंटों की कुर्बानी दी जाती है।

जम्मू-कश्मीर पशु-भेड़पालन और मत्स्य पालन विभाग के निदेशक (योजना) ने भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा जीव जंतु कल्याण बोर्ड के 25 जून को लिखे गए एक आधिकारिक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि 21-23 जुलाई, 2021 तक बकरीद (ईद-उल-अजहा) के दौरान केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में बलि के रूप में जानवरों का वध किए जाने की संभावना है।

पत्र के मुताबिक भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने पशु कल्याण के मद्देनजर पशु कल्याण कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए सभी एहतियाती उपायों को लागू करने का अनुरोध किया है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, पशु कल्याण नियम, 1978, पशुओं का परिवहन (संशोधन) नियम, 2001, कसाईखाना नियम, 2001 के तहत त्योहार के दौरान जानवरों (जिसके तहत ऊंटों का वध नहीं किया जा सकता) के वध के लिए भारतीय नगरपालिका कानून और खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के निर्देश जारी किए गए हैं।

निदेशक ने कहा कि उन्हें पशु कल्याण कानूनों के क्रियान्वयन के लिए ऊपर उल्लिखित अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के अनुसार सभी निवारक उपाय करने, जानवरों की अवैध हत्या को रोकने तथा पशु कल्याण कानूनों का उल्लंघन करने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश मिलते हैं।

इस पत्र की प्रतियां भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष, सभी जिलाधिकारी, आयुक्त, एसएमसी/जेएमसी; निदेशक, पशुपालन विभाग, जम्मू कश्मीर, निदेशक, भेड़पालन विभाग, जम्मू कश्मीर, निदेशक, शहरी स्थानीय निकाय, जम्मू कश्मीर; और सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को सूचना के लिए भेजी गई थीं। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस पत्र का कड़ा विरोध किया है।

प्रमुख राजनीतिक दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर गायों और ऊंटों की अवैध हत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले पत्र का कड़ा विरोध करते हुए इस आदेश को रद्द करने की मांग की थी। आदेश पर नाराजगी व्यक्त करते हुए, पार्टी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि यह रेखांकित करना संभव है कि इस प्रकार के उपाय ‘‘अन्यायपूर्ण और अक्षम्य’’ हैं।


जम्मू-कश्मीर में कई धार्मिक संगठनों के समूह मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने प्रतिबंध के खिलाफ शुक्रवार को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि यह प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा-सीधा उल्लंघन है। गौरतलब है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक ही एमएमयू के अध्यक्ष हैं।

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