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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   There is a festive fervour security is tight, enthusiasm is at its peak and cities are decorated vande bharat

Vande Bharat: छह जून का सूरज लाएगा तरक्की की रोशनी, कटड़ा से कश्मीर तक अब हर कोना होगा जुड़ा... सपना होगा साकार

Thu, 05 Jun 2025 12:37 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Thu, 05 Jun 2025 12:37 PM IST
सार

छह जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना का उद्घाटन करेंगे, जिससे कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से सीधा रेल संपर्क मिलेगा। इस ऐतिहासिक शुरुआत से लोगों की बरसों की मुरादें पूरी होंगी। 

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There is a festive fervour security is tight, enthusiasm is at its peak and cities are decorated vande bharat
पीएम मोदी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

छह जून...ये महज तारीख नहीं। तरक्की का एक नया अध्याय लिखा जाएगा इस दिन। विकास के एक नए सफर की शुरुआत होगी इस दिन। वर्षों की मुराद फरियाद पूरी होगी इस दिन। कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश एक पटरी पर दौड़ेगा। पूरा देश एक स्वर में गाएगा वंदे भारत। उत्सव बड़ा है। जश्न की तैयारियां भी बड़ी हैं। ग्राउंड जीरो से आप भी पढि़ए, हर वह चीज जो आप जानना चाहते हैं। मसलन कैसे इस सौगात के स्वागत के लिए शहर सजे-संवरे हुए हैं। सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं? लोग क्या सोच रहे हैं?
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प्रधानमंत्री मोदी करेंगे उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना का शुक्रवार को शुभारंभ करेंगे। सुरक्षा सख्त जरूर है, पर उसमें भी सुकून है। स्टेशन और शहर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए सज-संवर रहे हैं। घर-घर में चर्चा में ट्रेन है।

43,800 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना की सौगात देश और खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों की जिंदगी में क्या-क्या बेहतरी लाएगी, इन दिनों चर्चा का विषय है। चर्चा छिड़ते ही लोगों के चेहरे पर चमक दिखती है। यह साफ बताती है कि इस परियोजना की उनकी जिंदगी में कितनी अहमियत है। यही नहीं पर्यटन से लेकर रोजगार, अर्थव्यवस्था को लेकर वे फायदे गिनाने लगते हैं। 
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रामबन :
चेहरे की चमक को लेकर सवाल होते ही एक सांस में गिना देते हैं स्टेशनों के नामट्रेन लोगों की जिंदगी में क्या बदलाव लाने वाली है, यह सवाल रामबन से होकर संगलदान, सुम्बड़ और खड़ी स्टेशन के लिए बेहद अहम है। रामबन में भले ही ट्रेन का ठहराव नहीं है, लेकिन उनके जिले में तीन स्टेशन बन गए हैं।

चर्चा छिड़ते ही ज्यादातर लोग एक सांस में स्टेशनों के नाम गिना देते हैं। रामबन निवासी आकृति चिब कहती हैं, रामबन आर्थिक दृष्टि से बहुत संपन्न नहीं है। यहां पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण रास्ते भी ऊबड़-खाबड़ हैं। ऊपर से ये रास्ते खुले रहेंगे या बंद यह मौसम तय करता है। यानी आवागमन मुश्किल रहता है। वह कहती हैं, ट्रेन चलने से आवाजाही बढ़ेगी। सफर आसान होगा। डगनटाॅप, सुम्बड़ और आसपास के इलाकों को नई पहचान मिलेगी। स्टेशन बनने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अभी तक लोग बस और निजी या किराये की गाड़ी से सफर करते हैं। अब सबसे पास संगलदान स्टेशन है, लोगों के लिए ट्रेन एक बेहतर विकल्प होगी।

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इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहे प्रदीप सिंह भूतियाल सवाल करते ही तपाक से कहते हैं, हमने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि यहां कभी ट्रेन चलेगी। हमारा गांव पथरीली पहाड़ियों पर है। सच कहूं तो जो लोग गांव से बाहर गए हैं, उन्होंने ही ट्रेन देखी है। ज्यादातर लोगों ने या तो ट्रेन मोबाइल फोन पर देखी है या फिर फिल्मों में। यकीन ही नहीं हो रहा है कि हमारे गांव से भी ट्रेन चलेगी।बनिहाल

गश्त बढ़ी, हर आने-जाने वाले पर नजर
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए बनिहाल में इस वक्त सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। गश्त लगातार जारी है। ट्रैक के दोनों तरफ जीआरपी ने मोर्चा संभाल रखा है। हर आने-जाने वाले से गहन पूछताछ जारी है। बनिहाल निवासी राशिद रसूल कहते हैं, हमें कितनी खुशी है, इसको पूरी तरह से बयां कर पाना मेरे लिए मुश्किल है।

बस, इतना ही समझ लीजिए कि मुद्दतों का इंतजार कुछ घंटों में खत्म होने को है। देखिए, यहां पर ट्रैक पहले से ही है, पर यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट कश्मीर के लिए बेहद अहम है। जिलाल अहमद वानी कहते हैं कि कारोबार बढ़ेगा, लोग अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली या अन्य शहर आसानी से भेज सकेंगे। यही नहीं मौसम की बेरुखी अब हमारे कदम नहीं रोक सकेगी।

रियासी :
हमारे लिए तो ये जंगल में मंगल की तरहशुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब रियासी जिले के कटड़ा से कश्मीर के लिए रेल को हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे, तो इस के साथ ही पूरा देश रेल लिंक मार्ग से जुड़ जाएगा- सुरिंदर शर्मा यह कहते हुए चहक पड़ते हैं। वह बताते हैं, जब प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ था, तो पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण काफी परेशानियों का सामना आने वाली कंपनियों को करना पड़ा था। कंपनियों ने कमाल कर दिया। शायद इसे ही कहते हैं, जंगल में मंगल होना। हमारे लिए तो चौतरफा सुविधाएं बढ़ीं। संपर्क मार्ग बन गए। टनल बन गए। हर तरफ विकास नजर आ रहा है।

संजय शर्मा की फिक्र दूसरी है। सवाल होते ही वह कहते हैं, अभी तो हम ट्रेन के आने-जाने का समय अपने जेहन में बैठा रहे हैं। निश्चित तौर पर ट्रेन चलने का फायदा सबको मिलेगा। बक्कल निवासी प्रीतिमा देवी कहती हैं, मेरे घर से थोड़ी ही दूर पर रेलवे स्टेशन है। पिछले एक-दो दिन से यहां पर काफी चहल-पहल दिख रही है। स्टेशन के पास जाने पर रोक लगाई गई है। धनोड के रहने वाले तरुण कहते हैं, मेरा गांव दो रेलवे स्टेशनों के बीच है। ट्रेन से कश्मीर जाने का मेरा सपना रहा है। अब यह पूरा होने जा रहा है। 

यह खबर भी पढ़ें: रेल से बढ़ेगी रील की रफ्तार: कश्मीर में फिर गूंजेगा... लाइट, कैमरा, एक्शन; घाटी की खूबसूरती फिर परदे पर चमकेगी

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