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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Udhampur-Srinagar rail link will increase the movement of film units, shooting will become easier

रेल से बढ़ेगी रील की रफ्तार: कश्मीर में फिर गूंजेगा... लाइट, कैमरा, एक्शन; घाटी की खूबसूरती फिर परदे पर चमकेगी

Thu, 05 Jun 2025 11:44 AM IST
निकिता गुप्ता गौरव रावत अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
गौरव रावत अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Thu, 05 Jun 2025 11:44 AM IST
सार

उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक के शुरू होने से कश्मीर में फिल्म शूटिंग को नया बढ़ावा मिलेगा, जिससे फिल्म यूनिट्स का आना-जाना आसान होगा। इससे स्थानीय कलाकारों को मौके मिलेंगे और पर्यटन व अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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Udhampur-Srinagar rail link will increase the movement of film units, shooting will become easier
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : बसित जरगर

विस्तार

वो दिन फिर लौटने की उम्मीद है जब कश्मीर की वादियों में कैमरे घूमते थे और ‘लाइट, कैमरा, एक्शन’ की आवाज गूंजती थी। उधमपुर-बारामुला-श्रीनगर रेलवे लिंक के शुरू होने से घाटी में फिल्म निर्माण गतिविधियों को नया बल मिलने की उम्मीद है।

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स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ मुंबई में काम कर रहे कश्मीरी फिल्मकारों को भी अब नए अवसर नजर आने लगे हैं।फिल्म निर्देशक रोहित भट्ट का मानना है कि रेल सेवा शुरू होने से कश्मीर देश के बाकी हिस्सों से सीधे जुड़ जाएगा। इससे बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग से संपर्क आसान होगा।
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पहले ट्रकों और हवाई जहाजों से शूटिंग का सामान लाना बहुत महंगा पड़ता था, अब रेल के माध्यम से कम बजट की फिल्में भी यहां शूट हो सकेंगी। जाने-माने अभिनेता और निर्देशक अयाश आरिफ के अनुसार, भारी उपकरण और तकनीकी स्टाफ को लाने में अब सहूलियत होगी। इससे न केवल फिल्म यूनिट्स का खर्च घटेगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को भी रोजगार मिलेगा।

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बॉलीवुड से सीधा जुड़ाव संभवबॉलीवुड अभिनेता और श्रीनगर निवासी मीर सरवर कहते हैं कि शूटिंग के रुकने से हजारों लोग बेरोजगार हो जाते हैं। रेल सेवा शुरू होने से मुंबई, दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ से आना-जाना आसान होगा। सरकार को अब मुंबई में बड़े स्तर पर इवेंट आयोजित करने चाहिए, ताकि निर्माता-निर्देशकों को कश्मीर की ओर आकर्षित किया जा सके। एक्टर और निर्माता मुश्ताक अली खान ने कहा कि ट्रेन सेवा को लेकर पूरा कश्मीर उत्साहित है। कटड़ा तक आकर रुकना अटपटा लगता था। घाटी तक रेल विस्तार होने यहां इंकलाब आएगा। फिल्म यूनिट्स के आने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

फिल्मों से सुधरती है स्थानीय अर्थव्यवस्थाफिल्म निर्देशक रोहित भट्ट का मानना है कि फिल्मों की शूटिंग केवल कला नहीं, बल्कि स्थानीय आजीविका का बड़ा स्रोत भी है। एक फिल्म यूनिट जब दो-तीन हफ्तों तक यहां रुकती है तो होटल, टैक्सी, खानपान, गाइड और तकनीकी स्टाफ की मांग बढ़ती है। इससे सैकड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलता है। जम्मू-कश्मीर की नई फिल्म नीति के तहत अब तमाम औपचारिकताएं ऑनलाइन पूरी हो जाती हैं, जिससे प्रक्रिया और सुगम हो गई है।

कश्मीर रहा है बड़े परदे का पसंदीदा ठिकाना
कश्मीर की हसीन वादियां हमेशा से फिल्मकारों की पसंद रही हैं। यहां 1964 में ‘कश्मीर की कली’, 1973 में ‘बॉबी’, 2000 में ‘मिशन कश्मीर’, 2014 में ‘हैदर’ और हाल ही में ‘डंकी’ जैसी तमाम फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। 2020 में रिलीज हुई ‘शिकारा’ के 95 फीसदी दृश्य स्थानीय क्रू के साथ घाटी में ही फिल्माए गए थे। इन फिल्मों ने सिर्फ मनोरंजन नहीं दिया, बल्कि कश्मीर की खूबसूरती, संस्कृति और जज़्बात को देश-दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। अब रेल सेवा के जरिए उम्मीदें और भी बंध चुकी हैं कि फिल्मी दुनिया फिर से घाटी में लौटेगी।

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