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Jammu News: कैबिनेट सब-कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार अभी बाकी
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर आरक्षण नियमों को लेकर कैबिनेट सब-कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले ही राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार की भर्ती निकाल दी गई। इसे लेकर प्रदेश के हजारों युवाओं में आक्रोश है। इन युवाओं की नजर इस कमेटी की रिपोर्ट पर लगी थी। यह तीन सदस्यीय सब-कमेटी बीती 10 दिसंबर, 2024 को गठित की गई थी। इसे छह माह में अपनी रिपोर्ट देनी थी और आज 10 जून को यह समयावधि पूरी होने जा रही है।
बीते साल 15 मार्च को जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन रूल्स-2005 में संशोधन किया गया था। इसमें सरकारी पदों की भर्ती के साथ ही मेडिकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में रक्षा कर्मियों और पुलिसकर्मियों के बच्चों को भी आरक्षण की व्यवस्था कर दी गई थी। ओपन मेरिट यानी जनरल कैटेगरी के युवाओं ने इस फैसले का जबरदस्त विरोध किया था।
युवाओं का कहना था कि प्रदेश में 75 फीसदी जनरल कैटेगरी के लोग हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। वे सभी सरकारी पदों और शिक्षा संस्थानों में ओपन मेरिट के लिए 50 प्रतिशत सीलिंग की मांग कर रहे थे। इस फैसले के खिलाफ जहूर अहमद भट, इशरत नबी, इशफाक, शाहिद और अमीर लोन हाई कोर्ट भी गए। युवाओं के चौतरफा विरोध को देखते हुए आखिरकार सरकार ने कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया था। युवाओं ने सीएम उमर अब्दुल्ला से मिलकर तीन माह में रिपोर्ट दिए जाने का मामला उठाया था। सरकार ने छह माह की समय सीमा मांगी थी।
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इसलिए कर रहे विरोध....
युवाओं का कहना था कि आरक्षण नियमों में संशोधन से रेजीडेंट्स ऑफ बॉर्डर एरिया यानी आरबीए का आरक्षण 20 से घटकर 10 फीसदी रह गया है। वहीं, एसटी का आरक्षण 10 से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है। ओपन मेरिट वाले हर जगह भेदभाव का सामना कर रहे हैं।
बैठक के बाद कोई अपडेट देंगे : सतीश शर्मा
जम्मू-कश्मीर के युवा एवं खेल मंत्री सतीश शर्मा इस कैबिनेट सब-कमेटी में सदस्य भी हैं। उनका का कहना है कि जल्द ही इस सब-कमेटी की एक बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद ही कुछ अपडेट दे सकेंगे।
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कोर्ट जाने के मूड में छात्र
युवा अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए कोर्ट जाने के मूड में हैं। छात्र आवेश जमवाल का कहना है कि कैबिनेट सब-कमेटी के जरिए इंसाफ का कई माह से इंतजार कर रहे थे। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अजय लखोत्रा कहते हैं कि सरकार ने साबित कर दिया कि वो युवाओं की हितैषी नहीं। अब कोर्ट का ही सहारा है।
मुख्यमंत्री के सलाहकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट
जम्मू। जेके स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कार्यालय में उनके सलाहकार नासिर असलम वानी को आरक्षण नियमों को लेकर एक विस्तृत रिसर्च सौंपी। जम्मू-कश्मीर सेंटर फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डवलपमेंट के साथ मिलकर तैयार की गई इस रिपोर्ट में उन्होंने सामाजिक असमानता को लेकर विस्तृत विश्लेषण किया है। जाति गणना, आरक्षित वर्गों की उप-श्रेणियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़े अहम बिंदु साझा किए हैं। समाज में गहरे व्याप्त असमानता को दूर किए जाने के लिए 15 संस्तुतियां भी दी हैं। मुख्यमंत्री के सलाहकार से मिलने वालों में जेके स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नासिर खुहामी, मुश्ताक अबीब, दानिश लोन आदि शामिल थे।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर आरक्षण नियमों को लेकर कैबिनेट सब-कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले ही राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार की भर्ती निकाल दी गई। इसे लेकर प्रदेश के हजारों युवाओं में आक्रोश है। इन युवाओं की नजर इस कमेटी की रिपोर्ट पर लगी थी। यह तीन सदस्यीय सब-कमेटी बीती 10 दिसंबर, 2024 को गठित की गई थी। इसे छह माह में अपनी रिपोर्ट देनी थी और आज 10 जून को यह समयावधि पूरी होने जा रही है।
बीते साल 15 मार्च को जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन रूल्स-2005 में संशोधन किया गया था। इसमें सरकारी पदों की भर्ती के साथ ही मेडिकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में रक्षा कर्मियों और पुलिसकर्मियों के बच्चों को भी आरक्षण की व्यवस्था कर दी गई थी। ओपन मेरिट यानी जनरल कैटेगरी के युवाओं ने इस फैसले का जबरदस्त विरोध किया था।
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युवाओं का कहना था कि प्रदेश में 75 फीसदी जनरल कैटेगरी के लोग हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। वे सभी सरकारी पदों और शिक्षा संस्थानों में ओपन मेरिट के लिए 50 प्रतिशत सीलिंग की मांग कर रहे थे। इस फैसले के खिलाफ जहूर अहमद भट, इशरत नबी, इशफाक, शाहिद और अमीर लोन हाई कोर्ट भी गए। युवाओं के चौतरफा विरोध को देखते हुए आखिरकार सरकार ने कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया था। युवाओं ने सीएम उमर अब्दुल्ला से मिलकर तीन माह में रिपोर्ट दिए जाने का मामला उठाया था। सरकार ने छह माह की समय सीमा मांगी थी।
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इसलिए कर रहे विरोध....
युवाओं का कहना था कि आरक्षण नियमों में संशोधन से रेजीडेंट्स ऑफ बॉर्डर एरिया यानी आरबीए का आरक्षण 20 से घटकर 10 फीसदी रह गया है। वहीं, एसटी का आरक्षण 10 से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है। ओपन मेरिट वाले हर जगह भेदभाव का सामना कर रहे हैं।
बैठक के बाद कोई अपडेट देंगे : सतीश शर्मा
जम्मू-कश्मीर के युवा एवं खेल मंत्री सतीश शर्मा इस कैबिनेट सब-कमेटी में सदस्य भी हैं। उनका का कहना है कि जल्द ही इस सब-कमेटी की एक बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद ही कुछ अपडेट दे सकेंगे।
कोर्ट जाने के मूड में छात्र
युवा अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए कोर्ट जाने के मूड में हैं। छात्र आवेश जमवाल का कहना है कि कैबिनेट सब-कमेटी के जरिए इंसाफ का कई माह से इंतजार कर रहे थे। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अजय लखोत्रा कहते हैं कि सरकार ने साबित कर दिया कि वो युवाओं की हितैषी नहीं। अब कोर्ट का ही सहारा है।
मुख्यमंत्री के सलाहकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट
जम्मू। जेके स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कार्यालय में उनके सलाहकार नासिर असलम वानी को आरक्षण नियमों को लेकर एक विस्तृत रिसर्च सौंपी। जम्मू-कश्मीर सेंटर फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डवलपमेंट के साथ मिलकर तैयार की गई इस रिपोर्ट में उन्होंने सामाजिक असमानता को लेकर विस्तृत विश्लेषण किया है। जाति गणना, आरक्षित वर्गों की उप-श्रेणियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़े अहम बिंदु साझा किए हैं। समाज में गहरे व्याप्त असमानता को दूर किए जाने के लिए 15 संस्तुतियां भी दी हैं। मुख्यमंत्री के सलाहकार से मिलने वालों में जेके स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नासिर खुहामी, मुश्ताक अबीब, दानिश लोन आदि शामिल थे।