Jammu Kashmir News : उम्मीद की मशाल हैं घाटी के चौधरी, मजबूरी में दसवीं तक ही पढ़े...अब घर-घर जगा रहे अलख
सरकारी स्कूलों में दाखिला करवाने के लिए अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं रमेश चौधरी। कोरोना के बाद अब तक 52 बच्चों का करवाया दाखिला।
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पारिवारिक परिस्थितियां ठीक नहीं होने से दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे इसके लिए अब घर-घर जाकर शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। आरएस पुरा कस्बे के वार्ड-9 के युवक रमेश चौधरी क्षेत्र के ग्रामीण बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए प्रयासरत हैं। बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला करवाने के लिए अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं।
कोराना के बीच दो साल तक स्कूल बंद रहने के बाद सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के साथ मिलकर रमेश गांव-गांव में जाकर लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में बता रहे हैं। साथ ही शिक्षा विभाग की ओर निशुल्क शिक्षा के साथ सरकारी स्कूलों में दी जा रही अन्य सुविधाओं के बारे में भी लोगों को बता रहे हैं।
कोरोना महामारी के बाद स्कूल खुलने के उपरांत अब तक रमेश 52 बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाने में सफल हुए हैं। कस्बे में छोटी सी किराना की दुकान चलाकर अपना परिवार चला रहे रमेश ने बताया कि जिन बच्चों का स्कूलों में दाखिला करवाया है, उनमें अधिकतर मजदूरी कर जीवन-यापन कर रहे थे।
सरकारी स्कूलों की दशा सुधारे सरकार, भरे जाएं शिक्षकों के पद
रमेश का कहना है कि सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत के कारण भी अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल नहीं करवाते। बताते हैं कि सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं, जहां उनके बच्चों का भविष्य खतरे में हैं। कई सरकारी स्कूलों में पीने के लिए स्वच्छ पानी तक नहीं है। शौचालय भी खस्ताहाल हैं। शिक्षक भी नहीं हैं।
रमेश ने कहा कि जोनल शिक्षा अधिकारी आरएस पुरा को कई बार इन समस्याओं के बारे में बताया गया, लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा। आरएस पुरा कस्बे के दो मिडिल स्कूलों में दो साल से हेडमास्टर का पद रिक्त है।
एक 12 वर्षीय बालिका को पहली कक्षा में दाखिला करवाने के लिए स्कूल प्रबंधन ने मना कर दिया। जोनल शिक्षा अधिकारी के समक्ष बात रखने पर बच्ची को दाखिला मिल पाया। रमेश ने कहा कि शिक्षा मौलिक अधिकार है। सरकार को चाहिए कि सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाए, शिक्षकों के खाली पद भरे जाएं।