{"_id":"68c1dc47e943e408230724c3","slug":"the-promise-of-giving-sixth-schedule-status-to-ladakh-should-be-fulfilled-before-elections-wangchuk-srinagar-news-c-10-lko1021-710263-2025-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने का वादा चुनावों से पहले पूरा हो : वांगचुक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने का वादा चुनावों से पहले पूरा हो : वांगचुक
Thu, 11 Sep 2025 01:45 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 11 Sep 2025 01:45 AM IST
विज्ञापन
लेह। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने कहा कि लेह में जल्द ही हिल काउंसिल के चुनाव होने हैं। वांगचुक ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पिछले हिल काउंसिल चुनावों के दौरान किए गए उसके वादे की याद दिलाई कि लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, आगामी चुनावों से पहले यह वादा पूरा किया जाना चाहिए।
वांगचुक ने यह भी कहा कि यह अनशन 35 दिनों का होगा और गांधी जयंती (2 अक्तूबर) उनके विरोध प्रदर्शन में एक ऐतिहासिक दिन होगा। उन्होंने कहा, लेह सर्वोच्च निकाय ने यह संदेश देने के लिए एक सर्व-धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की कि हमारा विरोध शांतिपूर्ण, अहिंसक है और हमारी माँगें भारतीय संविधान के दायरे में हैं।
वांगचुक ने यह भी कहा कि सरकारी एजेंसियां उन्हें परेशान कर रही हैं और उन्हें आयकर विभाग से एक नोटिस मिला है। विदेशी चंदा लेने के आरोप में उनके खिलाफ सीबीआई जांच भी शुरू की गई है। कहा, उन्होंने मेरे खिलाफ सीबीआई जांच शुरू कर दी है, यह स्वागत योग्य है... सीबीआई अधिकारी आए और कहा कि हम एफसीआरए लाइसेंस के बिना विदेशी चंदा ले रहे हैं... हम कोई विदेशी चंदा नहीं लेते, हम अपने ज्ञान के लिए सेवा शुल्क लेते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि उनके संस्थान - हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग ने अफगानिस्तान में आवास निर्माण के लिए अपनी गृह निर्माण तकनीकों को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ साझा किया है और कुछ अन्य विदेशी संस्थानों के साथ भी इसी तरह का आदान-प्रदान किया है। वांगचुक ने कहा, वे मेरी जांच के लिए सीबीआई और ईडी भेज सकते हैं, लेकिन उन्हें केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और हिल काउंसिल के ख़िलाफ़ लगे आरोपों की भी जांच करनी चाहिए।
जलवायु कार्यकर्ता ने कहा कि मेरे ऊपर देशद्रोह का आरोप लगाया जा रहा है। कुछ लोगों के लिए, एक कंपनी ही देश बन गई है। पूर्वी लद्दाख में लगभग 48,000 एकड़ ज़मीन एक सौर ऊर्जा परियोजना के लिए निर्धारित की गई है। यह ज़मीन फिलहाल भारतीय सौर ऊर्जा निगम को दी जा रही है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि अंततः इसे एक निगम को दे दिया जाएगा। क्या कंपनी का विरोध करना भारत का विरोध करने के बराबर है? एचआईएएल एक ऐसा संस्थान है जहां छात्रों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। हम जलवायु परिवर्तन का अध्ययन कर रहे हैं और वे ज़मीन वापस लेना चाहते हैं, उन्होंने दुख जताया।
वांगचुक ने आगे कहा कि यह मुद्दा सिर्फ़ लद्दाख के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिमालय और देश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि लद्दाख के लोग, जो हर संघर्ष में भारतीय सेना के साथ खड़े रहे हैं, प्रभावित होने लग सकते हैं। लद्दाख के लोग हमेशा राष्ट्रवादी रहेंगे, लेकिन मुझे डर है कि वे दिल्ली और मुंबई के लोगों जैसे हो जाएँगे... जब सीमा पर हमला होता है, तो लद्दाख के लोग ही सेना की मदद करते हैं, उनका बोझ उठाते हैं और उनके लिए काम करते हैं। दिल्ली के लोग सीमा पर दुश्मन का सामना करने नहीं आते। वांगचुक ने कहा, मुझे डर है कि लद्दाख के लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
विज्ञापन
वांगचुक ने यह भी कहा कि यह अनशन 35 दिनों का होगा और गांधी जयंती (2 अक्तूबर) उनके विरोध प्रदर्शन में एक ऐतिहासिक दिन होगा। उन्होंने कहा, लेह सर्वोच्च निकाय ने यह संदेश देने के लिए एक सर्व-धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की कि हमारा विरोध शांतिपूर्ण, अहिंसक है और हमारी माँगें भारतीय संविधान के दायरे में हैं।
विज्ञापन
वांगचुक ने यह भी कहा कि सरकारी एजेंसियां उन्हें परेशान कर रही हैं और उन्हें आयकर विभाग से एक नोटिस मिला है। विदेशी चंदा लेने के आरोप में उनके खिलाफ सीबीआई जांच भी शुरू की गई है। कहा, उन्होंने मेरे खिलाफ सीबीआई जांच शुरू कर दी है, यह स्वागत योग्य है... सीबीआई अधिकारी आए और कहा कि हम एफसीआरए लाइसेंस के बिना विदेशी चंदा ले रहे हैं... हम कोई विदेशी चंदा नहीं लेते, हम अपने ज्ञान के लिए सेवा शुल्क लेते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि उनके संस्थान - हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग ने अफगानिस्तान में आवास निर्माण के लिए अपनी गृह निर्माण तकनीकों को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ साझा किया है और कुछ अन्य विदेशी संस्थानों के साथ भी इसी तरह का आदान-प्रदान किया है। वांगचुक ने कहा, वे मेरी जांच के लिए सीबीआई और ईडी भेज सकते हैं, लेकिन उन्हें केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और हिल काउंसिल के ख़िलाफ़ लगे आरोपों की भी जांच करनी चाहिए।
जलवायु कार्यकर्ता ने कहा कि मेरे ऊपर देशद्रोह का आरोप लगाया जा रहा है। कुछ लोगों के लिए, एक कंपनी ही देश बन गई है। पूर्वी लद्दाख में लगभग 48,000 एकड़ ज़मीन एक सौर ऊर्जा परियोजना के लिए निर्धारित की गई है। यह ज़मीन फिलहाल भारतीय सौर ऊर्जा निगम को दी जा रही है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि अंततः इसे एक निगम को दे दिया जाएगा। क्या कंपनी का विरोध करना भारत का विरोध करने के बराबर है? एचआईएएल एक ऐसा संस्थान है जहां छात्रों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। हम जलवायु परिवर्तन का अध्ययन कर रहे हैं और वे ज़मीन वापस लेना चाहते हैं, उन्होंने दुख जताया।
वांगचुक ने आगे कहा कि यह मुद्दा सिर्फ़ लद्दाख के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिमालय और देश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि लद्दाख के लोग, जो हर संघर्ष में भारतीय सेना के साथ खड़े रहे हैं, प्रभावित होने लग सकते हैं। लद्दाख के लोग हमेशा राष्ट्रवादी रहेंगे, लेकिन मुझे डर है कि वे दिल्ली और मुंबई के लोगों जैसे हो जाएँगे... जब सीमा पर हमला होता है, तो लद्दाख के लोग ही सेना की मदद करते हैं, उनका बोझ उठाते हैं और उनके लिए काम करते हैं। दिल्ली के लोग सीमा पर दुश्मन का सामना करने नहीं आते। वांगचुक ने कहा, मुझे डर है कि लद्दाख के लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।