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पहल : क्यूआर कोड प्रणाली से होगी जम्मू -कश्मीर के मशहूर हस्तनिर्मित कालीन की पहचान
Fri, 11 Feb 2022 07:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 11 Feb 2022 07:09 AM IST
सार
उपराज्यपाल ने किया शुभारंभ, कहा-आधुनिक तकनीक से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कालीन उद्योग के निर्यात को बढ़ावा देंगे।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कोड प्रणाली को लागू किया....
- फोटो : ani
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कालीनों की पहचान अब क्यूआर कोड के माध्यम से मिलेगी। कालीनों के प्रमाणीकरण और लेबलिंग के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रणाली का वीरवार को शुभारंभ किया गया। यह देश में अपनी तरह का पहला तंत्र है।
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कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए उपराज्यपाल मनोज ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हस्तशिल्प की रचनात्मक परंपराओं का भंडार है, जो सदियों से सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में काम कर रहा है। यह परंपरा जटिल डिजाइन और सूक्ष्म रंगों के साथ हस्तनिर्मित कालीनों में स्पष्ट दिखाई देती है। हम आधुनिक तकनीक की मदद से इन कालीनों की विशिष्टता को मानकीकृत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कालीन उद्योग के निर्यात को बढ़ावा देने में सक्षम होंगे।
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सिन्हा ने कहा कि क्यूआर आधारित प्रणाली के साथ ग्राहक जम्मू-कश्मीर में तैयार की गई कालीनों की प्रामाणिकता, अन्य आवश्यक विवरणों की जांच और सत्यापन कर सकते हैं। उन्होंने प्रदेश के हस्तशिल्प और हथकरघा पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करते हुए शिल्पकारों और कालीन बुनकरों के काम की प्रशंसा की। सरकार अमूल्य कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में जम्मू - कश्मीर की एक अलग पहचान है।
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भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) ने कश्मीरी कालीनों को बढ़ावा देने के लिए जीआई प्रमाणन, परीक्षण, लेबलिंग और प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रदेश प्रशासन ने निर्यात प्रोत्साहन योजना शुरू की है। योजना के तहत किसी भी देश को निर्यात किए गए जीआई प्रमाणित हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की कुल मात्रा का दस फीसदी प्रोत्साहन के साथ विभाग के साथ पंजीकृत पात्र निर्यातकों को अधिकतम प्रतिपूर्ति पांच करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।
प्रदेश के बाहर भी प्रचार शुरू करेगा विभाग
हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग व भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर हाथ से बुने हुए कालीनों के जीआई टैग को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रदेश के भीतर और बाहर व्यापक जागरूकता और प्रचार अभियान शुरू करेगा। बताया गया कि निफ्ट श्रीनगर के सहयोग से हस्तशिल्प उत्पादों की नवीन और किफायती पैकेजिंग पर एक परियोजना भी पूरी की गई है। इस दौरान प्रमुख सचिव रंजन प्रकाश ठाकुर आदि मौजूद रहे।
25 देशों को निर्यात हो रहा कालीन
जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में करीब 25 देशों को कालीनों का निर्यात किया जा रहा है। इसमें 2020-21 में जर्मनी को 115 करोड़, अमेरिका को 34 करोड़, यूएई को 36 करोड़, और नीदरलैंड को 22 करोड़ रुपये के कालीन निर्यात किए गए हैं।