कठुआ में दहशतगर्द का खुलासा: जम्मू दहलाने की 14 साल से कोशिश में पाकिस्तानी आतंकी फरीद, उसने ही भेजे स्टिकी बम
कठुआ में स्टिकी बम के साथ पकड़े गए आतंकी जाकिर का हैंडलर फरीद पाकिस्तानी फौज में था। फरीद 14 साल पहले जम्मू-कश्मीर को दहलाने के लिए अपना नाम गुलशन कुमार बताकर भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद वह पकड़ा गया और उसे सजा हुई। इसके बाद उसे वापस भेज दिया गया। अब वह जाकिर को मोहरा बनाकर प्रदेश में बड़ा धमाका करना चाहता था।
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जैश के जिस आतंकी जाकिर से मलाड़ इलाके में स्टिकी बम और आईईडी समेत विस्फोटक बरामद किए गए हैं, उसका हैंडलर फरीद पाकिस्तानी फौज में था। पाकिस्तान की 10 आजाद कश्मीर रेजीमेंट का सैनिक गुलाम फरीद निवासी रोपड़ भिंबर पाकिस्तान 14 साल पहले जम्मू-कश्मीर को दहलाने के लिए अपना नाम गुलशन कुमार बताकर भारत में दाखिल हुआ था।
वह दो फिदायीन साथियों के साथ जम्मू के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया। 21 दिसंबर 2008 को एफआईआर संख्या 87/2008 में 120-बी आरपीसी, 3/7/25 आर्म्स एक्ट, 3 ईएओ, 4/5 ईएसए, 14 विदेशी एक्ट दर्ज किया गया था।
फरीद के साथ ही गिरफ्तार किए गए दो अन्य विदेशी आतंकियों में मोहम्मद इमरान निवासी 8 डेरा नवाब खान भागलपुर पाकिस्तान और मोहम्मद अब्दुल्ला निवासी सीरिया तहसील सेरीपोरा पाकिस्तान को भी गिरफ्तार किया गया था जो एक आत्मघाती मिशन पर थे।
मामले में 16 फरवरी 2009 को प्रधान सत्र न्यायालय जम्मू में चालान पेश किया गया। पूछताछ के दौरान पता चला था कि आतंकी जम्मू में प्रवेश करने के लिए कराची से ढाका गए थे और वहां से जम्मू पहुंचने के लिए कोलकाता में दाखिल हुए थे।
उसने रास्ते में सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए अपना नाम बदलकर गुलशन कुमार भी रख लिया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में फरीद को रिहा करने के बाद पाकिस्तान भेज दिया गया, लेकिन फरीद के दिमाग में जम्मू-कश्मीर को दहलाने की साजिश जारी रही।
और उसकी इस साजिश का खुलासा दो अक्तूबर को जैश के कठुआ जिले से आतंकी जाकिर हुसैन की गिरफ्तारी के साथ हुआ। जिसके बाद जाकिर की निशानदेही पर अब तक चार स्टिकी बम और तीन आईईडी बरामद कर लिए गए हैं।
जैश के आतंकी जाकिर की निशानदेही पर बिलावर के मलाड़ से पकड़ा गया असलहा
त्योहारों पर जम्मू-कश्मीर को दहलाने की बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए कठुआ पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी जाकिर हुसैन की निशानदेही पर तीन स्टिकी बम और तीन आईईडी बरामद की हैं। जाकिर को पिछले दिनों पकड़ा गया था।
उसकी निशानदेही पर बिलावर में उसी के गांव मलाड़ से बरामद विस्फोटक सामग्री के साथ एक रिमोट कंट्रोल, तार और बम बनाने के कुछ उपकरण भी मिले हैं। जाकिर से पुलिस पांच दिनों से कड़ी पूछताछ कर रही थी। इसी दौरान उसके ठिकाने का पता चला। जाकिर ने इसी ठिकाने में असलहा छिपाकर रखा था।
शनिवार सुबह पुलिस टीम कठुआ से बिलावर के लिए रवाना हुई। जाकिर के गांव मलाड़ में घंटो चली जांच के बाद पुलिस ने असलहा बरामद कर लिया। शाम साढ़े पांच बजे के बाद टीम कठुआ लौटी। जिला पुलिस प्रमुख रमेश चंद्र कोतवाल ने देर शाम प्रेस वार्ता में इसका खुलासा किया।
एसएसपी ने बताया कि पाकिस्तान सरेंडर कर चुके पूर्व आतंकियों, सजा पा चुके आतंकियों और ओजीडब्ल्यू को सक्रिय करने के लिए काम कर रहा है। जाकिर को भी पाकिस्तान से फरीद सोशल मीडिया के माध्यम से निर्देश देता था। बताया कि जाकिर से दो अक्तूबर को स्टिकी बम और बीस हजार नकदी बरामद हुई थी।
एसएसपी ने कहा कि इन हथियारों से जम्मू-कश्मीर में बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश थी। उन्होंने कहा कि उधमपुर में हुए स्टिकी बम धमाकों के साथ कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
ड्रोन से आई खेप बिलावर तक कैसे पहुंची
स्टिकी बम और आईईडी समेत अन्य विस्फोटक सामग्री की खेप ड्रोन के जरिए आई थी, लेकिन इसे कहां उतारा गया और कैसे बिलावर के मलाड़ तक पहुंचाया गया, इस की जांच की जा रही है। एसएसपी ने कहा कि ड्रोन की चुनौती से निपटने के लिए तमाम एजेंसियां काम कर रही हैं। सतर्कता से ही इस मामले का भंडाफोड़ किया जा सका है।
14 साल जेल काट चुका है जाकिर
एसएसपी ने बताया कि जाकिर 14 साल सजा काट चुका है और 2019 में रिहा हुआ था। कठुआ के साथ-साथ घाटी में यह किस किस के संपर्क में था, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व आतंकियों से सीमा पार बैठे हैंडलर संपर्क साध रहे हैं। उधमपुर में धमाकों के लिए पकड़ा गया असलम और कठुआ में जाकिर ऐसे ही मामले हैं।