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ड्रोन के जरिये अखनूर में भेजी आईईडी से भीड़ वाली जगह पर मचानी थी तबाही
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जम्मू। पाकिस्तान आतंकी संगठनों तक हथियार, नशा और पैसे पहुंचाने के लिए लगातार ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है कि फरवरी में संघर्ष विराम के बावजूद पाकिस्तान ऐसा कर रहा है। अखनूर में जो पांच किलो आईईडी ड्रोन के जरिए भेजी गई थी, उसका इस्तेमाल जम्मू संभाग में किसी भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में विस्फोट करने में इस्तेमाल होना था। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि यह आईईडी जैश ए मोहम्मद आतंकी संगठन ने तैयार की थी और उसके आतंकियों ने इसका इस्तेमाल करना था, ताकि बड़े स्तर पर तबाही मचाई जा सके।
डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए ताइबा के आतंकियों के पास हथियार और गोला बारूद की कमी है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर आतंकियों के लिए काम करने वाले कई ओजी वर्करों और इनके मददगारों को हथियारों और गोला बारूद के साथ पकड़ा है। जिससे इनके पास कमी आई है। इस कमी को पूरा करने के लिए पाकिस्तान ड्रोन के जरिए सप्लाई भेजने का प्रयास कर रहा है। पिछले सात सितंबर से ही पाकिस्तान आतंकियों तक यह पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
ड्रोन से निपटना बड़ी चुनौती
सिंह का कहना है कि ड्रोन सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती है। जिससे निपटने के लिए हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें खुशी है कि सुरक्षाबल इसका अच्छे से सामना कर रहे हैं और ऐसे कई प्रयास विफल किए गए हैं।
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डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए ताइबा के आतंकियों के पास हथियार और गोला बारूद की कमी है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर आतंकियों के लिए काम करने वाले कई ओजी वर्करों और इनके मददगारों को हथियारों और गोला बारूद के साथ पकड़ा है। जिससे इनके पास कमी आई है। इस कमी को पूरा करने के लिए पाकिस्तान ड्रोन के जरिए सप्लाई भेजने का प्रयास कर रहा है। पिछले सात सितंबर से ही पाकिस्तान आतंकियों तक यह पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
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ड्रोन से निपटना बड़ी चुनौती
सिंह का कहना है कि ड्रोन सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती है। जिससे निपटने के लिए हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें खुशी है कि सुरक्षाबल इसका अच्छे से सामना कर रहे हैं और ऐसे कई प्रयास विफल किए गए हैं।
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