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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Tension on Border Fear of War Looms Over Uri Villages Amid Rising India Pakistan Strain

India Pakistan Border News: सरहद के गांवों में जंग की आशंका...दिलों में दुआएं, भविष्य की चिंता; लोगों को ये डर

Thu, 01 May 2025 02:58 PM IST
शाहरुख खान अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, उड़ी
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, उड़ी Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 01 May 2025 02:58 PM IST
सार

Pahalgam Attack Impact: सरहद के गांवों में जंग की आशंका है। पहाड़ी पर जंगल के बीच बसे उड़ी सेक्टर के आखिरी गांव तिलवारी के लोगों को डर है कि कहीं जंग न हो जाए। ये लोग दुआ कर रहे हैं कि युद्ध जैसे हालत न बनें। 
 

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Tension on Border Fear of War Looms Over Uri Villages Amid Rising India Pakistan Strain
प्रशिक्षण लेते छात्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Tension on Border: उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले बारामुला के उड़ी सेक्टर में कई जगहों पर पाकिस्तानी सेना ने छोटे हथियारों से भारतीय सेना की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया है। कुछ ऐसे गांव हैं, जहां गोलीबारी नहीं हुई, लेकिन वहां के लोग सतर्क हैं। यहां के लोगों का कहना है कि गोलीबारी की खबरें आने के साथ ही सभी सतर्क हैं। दुआ कर रहे हैं कि युद्ध जैसे हालत न बनें। 
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की ओर बहने वाली झेलम नदी के किनारे स्थित उड़ी टाउन से करीब सात किलोमीटर दूर उड़ी सेक्टर का गांव तिलवारी एक पहाड़ी पर बसा हुआ है। हरे-भरे घने जंगल इसकी सुंदरता बढ़ाते हैं। गांव के लोग आम जिंदगी गुजर बसर करते हैं। 
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खेती और दिहाड़ी मजदूरी मुख्य रूप से इनका पेशा है। पहलगाम हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव का असर इस गांव पर भी पड़ा है और लोग इसी खौफ में जी रहे हैं कि कहीं जंग न हो। 
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स्थानीय निवासी रिजवान गिलानी ने कहा कि हमारा गांव उड़ी सेक्टर का आखिरी गांव है। यहां कई वर्षों से शांति का माहौल था। अमन शांति के साथ हम जी रहे थे, लेकिन एक बार फिर से पहलगाम की घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव पैदा कर दिया है। 

हालांकि, हमारे गांव में अभी फायरिंग नहीं हुई है, लेकिन खौफ जरूर है। यहां वर्ष 2021 से पहले गोलीबारी हुई थी, कई जानें गई थीं और मकानों को भी नुकसान हुआ था। 

 

गोलियों की जगह अजान की आवाज सुनने को मिले 
एक अन्य स्थानीय निवासी बशीर खटाना ने कहा कि हमारा गांव पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बेहद करीब है। यहां से उनके मकान भी नजर आते हैं। जब वहां अजान होती है, वह भी हमें सुनाई देती है। अब बदले हालत के चलते सभी डरे हुए हैं और यही दुआ कर रहे हैं कि गोलीबारी की आवाज के बजाय यही अजान हमारे कानों में गूंजती रहे। 

एलओसी के करीब छात्र ले रहे विशेष प्रशिक्षण 
इस बीच युद्ध की स्थिति में सुरक्षा उपायों के बारे में एलओसी के करीब जीरो लाइन वाले क्षेत्र में छात्रों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एक स्थानीय ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के मद्देनजर शिक्षा विभाग संघर्ष की स्थिति में सुरक्षा उपायों पर छात्रों को विशेष प्रशिक्षण देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 

 

प्रशिक्षण में दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ने पर खुद को कैसे बचाना है, इस बारे में निर्देश शामिल हैं, जिसमें आर्टिलरी फायर से बचाव की तकनीक भी है। तिलवारी का यह स्कूल सीमा से महज 200 मीटर की दूरी पर पाकिस्तानी बंकरों के करीब स्थित हैं। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ शिक्षक और छात्र दोनों ही खतरनाक स्थिति के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। 
 

गौरतलब है कि उन्हें याद है कि इस स्कूल को पहले भी निशाना बनाया गया था, लेकिन कुछ वर्षों की शांति के बाद वे शांत वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम हो गए। हालांकि, वर्तमान में वे खुद को संकट की स्थिति में पाते हैं। 

 

शिक्षकों ने संघर्ष की स्थिति में पर्याप्त आश्रय सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि तिलवारी गांव में केवल दो सामुदायिक बंकर हैं। वे स्कूल परिसर के भीतर बंकरों के निर्माण की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।
 
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