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जम्मू-कश्मीर : कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को रोकने के लिए की जा रही है टारगेट किलिंग, निशाने पर अमरनाथ यात्रा
Sun, 15 May 2022 04:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 15 May 2022 04:33 AM IST
सार
पंडित मुलाजिमों को निशाना बनाकर उन्हें पलायन करने के लिए मजबूर करने की साजिश। पाकिस्तान और आईएसआई के इशारे पर लश्कर को लक्षित हत्याओं की सौंपी गई है कमान।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
कश्मीर में तहसील कार्यालय परिसर में घुसकर कश्मीरी पंडित मुलाजिम पर हमला उन्हें पलायन के लिए मजबूर करने की साजिश है। इनपुट है कि पाकिस्तान और आईएसआई ने टारगेट किलिंग के तहत अब पीएम पैकेज में नियुक्त कर्मचारी को इसलिए निशाना बनाया ताकि अन्य में दहशत पैदा हो सके। वे ट्रांजिट कैंप छोड़कर घाटी छोड़ दें। इससे कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी के प्रयासों पर ब्रेक लग सके। दो साल बाद हो रही अमरनाथ यात्रा को बाधित करने की साजिश के तहत भी हमले किए जा रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद कहते हैं कि पाकिस्तान की इस नई साजिश को समझते हुए उसका प्रभावी काउंटर किया जाना जरूरी है, अन्यथा अल्पसंख्यक हिंदुओं में डर का माहौल पैदा होगा। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि घाटी में टारगेट किलिंग की घटनाएं बढ़ने के पीछे पाकिस्तान और उसकी एजेंसी आईएसआई है। सीमा पार के इशारे पर खासकर लश्कर-ए-ताइबा को टारगेट किलिंग और अल्पसंख्यकों में भय का माहौल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स टारगेट किलिंग के लिए सॉफ्ट टारगेट चुनते हैं और घाटी में सक्रिय आतंकियों व ओवर ग्राउंड वर्कर्स को इन्हें निशाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद लगभग तीन साल में 14 कश्मीरी पंडितों, गैर-कश्मीरी हिंदुओं की दहशतगर्दों ने हत्या कर दी है। इनमें दवा कारोबारी से लेकर मजदूर तक शामिल हैं। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष जिन्होंने आतंकवाद के दौर में भी घाटी नहीं छोड़ी, का कहना है कि सरकार को पंडितों और अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त करने चाहिए ताकि वे कभी भी अपने को असुरक्षित महसूस न कर सकें। इससे तीन दशक बाद घाटी के माहौल में आए बदलाव को बल मिलेगा।
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गेम प्लान बिगड़ने से रोकने के लिए टारगेट किलिंग
सूत्र बताते हैं कि टारगेट किलिंग के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर में शांति और युवाओं के हाथों में पत्थर व बंदूक के बजाय कलम पाकिस्तान को बर्दाश्त नहीं। 370 हटने के बाद माहौल में आए बदलाव, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए प्रयास शुरू होने और उनकी संपत्तियों पर कब्जे हटवाने, नए जम्मू-कश्मीर में निवेश के प्रस्ताव आने, रोजगार के रास्ते खुलने से पाकिस्तान को अपने तीन दशक से अधिक समय का गेम प्लान बिगड़ता नजर आ रहा है। इसी के चलते लोगों में दहशत का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
नई तंजीम की जानकारी जुटा रहीं एजेंसियां
जानकार बताते हैं कि नब्बे के दशक में जेकेएलएफ के साथ ही अल्ला टाइगर्स नाम का आतंकी संगठन सक्रिय था। बाद में इस संगठन के बारे में कोई जानकारी नहीं रही। अब कश्मीर टाइगर्स ने पंडित कर्मचारी पर हमले की जिम्मेदारी ली है। सुरक्षा एजेंसियां नई तंजीम की जानकारी जुटा रही हैं। साथ ही पुराने संगठन से भी तार जोड़ने की कोशिश कर रही है।