बहादुरी और काबिलियत की मिसाल था शहीद अल्ताफ अहमद
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बांडीपोरा जिले में बुधवार को लश्कर के आतंकियों के हमले में पुलिस के विशेष जांच दल के सब इंस्पेक्टर अल्ताफ अहमद उर्फ अल्ताफ लैपटॉप शहीद हो गए। अल्ताफ को विभाग में ‘24 घंटे ड्यूटी काप’ के नाम से भी जाना जाता था।
विभाग के सूत्रों के मुताबिक 2008 के बाद से कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ किए गए 50 फीसदी आपरेशनों में अल्ताफ के शामिल होने के चलते वे आतंकियों के निशाने पर थे। अल्ताफ को रियासत और केंद्र सरकार द्वारा गैलेंट्री मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई आतंकी ठिकानों को नष्ट करने, कई आतंकियों को गिरफ्तार करने और कई को मार गिराने का भी अल्ताफ को श्रेय जाता है। आईजी कश्मीर सईद जावेद मुज्तबा गिलानी ने अल्ताफ को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अल्ताफ की मौत विभाग के लिए बड़ा नुकसान है।
अल्ताफ कर रहा था इस खूंखार आतंकी को ट्रेक
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सब इंस्पेक्टर अल्ताफ अहमद उर्फ अल्ताफ लैपटॉप पिछले कुछ दिनों से लश्कर कमांडर अबू कासिम की मूवमेंट को ट्रैक कर रहे थे। उसे पकड़ने के लिए एसएचओ बांडीपोरा और डीएसपी ऑपरेशन द्वारा बांडीपोरा शहर के पास एक नाका लगाया था।
अल्ताफ उस टाटा मोबाइल (जेके05ई-1096) का पीछा कर रहे थे जिसमें आतंकी सवार थे। वाहन को नाके पर रोककर आतंकियों को दबोचने की योजना थी। लेकिन, बांडीपोरा से करीब 4 किलोमीटर पहले दाछिना गांव के पास आतंकियों के वाहन ने सफेद रंग की निजी कार को ओवर टेक किया और वाहन रोककर उसमें सवार अल्ताफ पर गोलियों की बौछार कर दी।
अल्ताफ अहमद डार दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के जंगल पोरा गाव के रहने वाले थे। अल्ताफ के गांव वालों के अनुसार अल्ताफ को अल्ताफ कंप्यूटर, अल्ताफ लैपटॉप, अल्ताफ साउथ और अल्ताफ सिट जैसे कईं विभिन्न नामों से जाना जाता था।
वह कंप्यूटर विशेषज्ञ था और कई आतंकी गतिविधियों को ट्रैक कर चुका था। अल्ताफ की वीरता और बलिदान को सलाम करने के लिए पुष्प अर्पित समारोह श्रीनगर के पुलिस कंट्रोल रूम में किया गया।