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जम्मू कश्मीर: स्थायी नौकरी का दावा नहीं कर सकते कैजुअल वर्कर, हाईकोर्ट ने की नियमितीकरण वाली याचिका खारिज
Sat, 05 Nov 2022 02:36 AM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: विमल शर्मा
Updated Sat, 05 Nov 2022 02:36 AM IST
सार
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि नीड बेस्ड (कैजुअल) वर्कर सेवाएं खत्म किए जाने पर नियमितीकरण का दावा नहीं कर सकते। इसके साथ ही कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में नीड बेस्ड वर्करों की याचिका खारिज कर दी।
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highcourt srinagar
- फोटो : फाइल
विस्तार
जरूरत के आधार पर रखे गए नीड बेस्ड (कैजुअल) वर्कर सेवाएं खत्म किए जाने पर नियमितीकरण का दावा नहीं कर सकते। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में नीड बेस्ड वर्करों की याचिका खारिज करते हुए कहा, इन नियुक्तियों के लिए न तो कोई आवेदन लिया गया और न ही किसी तरह की प्रक्रिया का पालन किया गया।
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इसमें सिर्फ मंत्रियों और विधायकों की सिफारिश पर मनोनयन किया गया, जो कि गैर कानूनी है। न्यायाधीश संजय धर ने कहा कि पूरे मामले के तथ्यों को देखकर स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग में 17 अक्तूबर 2014 को जारी आदेश के तहत 1284 कैजुअल वर्करों की नर्सिंग अर्दली पद पर नियुक्ति तत्कालीन मंत्रियों और विधायकों की ओर से मनोनयन के आधार पर की गई।
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यह ऐसा मामला भी नहीं है, जिसमें याचिकाकर्ता लंबे समय तक सेवाएं देते रहे। केवल कुछ माह तक सेवाएं देने के बाद फंडिंग रोक दी गई और कैजुअल वर्करों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। यह पूरी तरह से जरूरत के अनुसार था।
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नियुक्तियां चूंकि मंत्रियों, विधायकों के मनोनयन से ही की गईं थीं, ऐसे में यह नियुक्तियां पिछले दरवाजे से की गईं थीं। इस लिहाज से यह प्रक्रिया ही अवैध है, जिसे अदालत सही नहीं ठहरा सकती।