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श्रीनगरः डीसी ने उमर को लोक व्यवस्था के लिए बताया खतरा, महबूबा की बेटी की याचिका पर 18 को सुनवाई
Tue, 03 Mar 2020 10:13 AM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/श्रीनगर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 03 Mar 2020 10:13 AM IST
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उमर अब्दुल्ला
- फोटो : फाइल फोटो
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत नजरबंदी के निर्णय को सही ठहराया है। प्रशासन ने हलफनामा देकर कहा है कि उमर अब्दुल्ला अब भी लोक व्यवस्था के लिए खतरा बने हुए हैं।
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जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने उमर की नजरबंदी को चुनौती देने वाली उनकी बहन सारा अब्दुल्ला पायलट की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पांच मार्च, गुरुवार को सुनवाई की तारीख तय कर दी।
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पीठ के समक्ष श्रीनगर के जिला उपायुक्त (डीसी) द्वारा दिए गए इस हलफनामे में उमर की नजरबंदी को सही बताया गया है। जिला उपायुक्त ने कहा कि 24 फरवरी को एडवाइजरी बोर्ड ने भी इसे सही बताया है। हलफनामे में उमर द्वारा एडवाइजरी बोर्ड के पास अपनी बातें न रखने के अलावा हाईकोर्ट का दरवाजा न खटखटाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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प्रशासन ने हलफनामे में कहा है कि उमर अनुच्छेद 370 को लेकर हमेशा भड़काऊ बयान देते रहे हैं। पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को खत्म करने से पहले भी उमर इसे लेकर काफी मुखर थे। अभी उनको रिहा करने से माहौल खराब हो सकता है। हलफनामे में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की भौगोलिक नजदीकियां होने के कारण लोक व्यवस्था पर लगातार परीक्षण की दरकार है।
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महबूबा की बेटी की याचिका पर 18 को सुनवाई
जस्टिस अरुण मिश्रा ने सुनवाई के दौरान कहा, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने भी याचिका दी है, जिसमें उसने अपनी मां महबूबा की पीएसए के तहत नजरबंदी को चुनौती दी है। उन्होंने सलाह दी कि दोनों ही मामलों को साथ सुना जाना चाहिए। इल्तिजा की याचिका पर 18 मार्च को, जबकि सारा की याचिका पर पांच मार्च को सुनवाई होगी।