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Jammu News: तीन न्यायाधीश करेंगे 25 पुस्तकों की जब्ती को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ सोमवार को उन पांच अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिसमें बीएनएसएस की धारा 98 के तहत 25 पुस्तकों को जब्त घोषित करने वाली सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली की अध्यक्षता वाली इस पीठ में न्यायमूर्ति राजेश ओसवाल और न्यायमूर्ति शहजाद अजीम भी शामिल हैं। पीठ की ओर से शाकिर शब्बीर, स्वास्तिक सिंह, डेविड देवदास, माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई किए जाने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार 5 अगस्त 2025 को जारी अधिसूचना के आधार पर जब्त की जाने वाली पुस्तकें कश्मीर में झूठी कहानी और अलगाववाद का प्रचार करती हैं।
याचिका में कहा गया है कि 25 पुस्तकों का सार मुख्यतः कश्मीर के सामाजिक-राजनीतिक जीवन और घाटी के सांस्कृतिक इतिहास में गुंथे असंख्य राजनीतिक संघर्षों से संबंधित है। याचिका कर्ताओं का कहना है कि जब्ती आदेश में यह विवरण नहीं दिया गया है कि 25 पुस्तकों को अलगाववादी कैसे माना गया। संवाद
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मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली की अध्यक्षता वाली इस पीठ में न्यायमूर्ति राजेश ओसवाल और न्यायमूर्ति शहजाद अजीम भी शामिल हैं। पीठ की ओर से शाकिर शब्बीर, स्वास्तिक सिंह, डेविड देवदास, माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई किए जाने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार 5 अगस्त 2025 को जारी अधिसूचना के आधार पर जब्त की जाने वाली पुस्तकें कश्मीर में झूठी कहानी और अलगाववाद का प्रचार करती हैं।
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याचिका में कहा गया है कि 25 पुस्तकों का सार मुख्यतः कश्मीर के सामाजिक-राजनीतिक जीवन और घाटी के सांस्कृतिक इतिहास में गुंथे असंख्य राजनीतिक संघर्षों से संबंधित है। याचिका कर्ताओं का कहना है कि जब्ती आदेश में यह विवरण नहीं दिया गया है कि 25 पुस्तकों को अलगाववादी कैसे माना गया। संवाद
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