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प्रदेश में दूध और मटन का उत्पादन बढ़ाने को पैकेजिंग और ब्रांडिंग को बढ़ाना होगा : डुल्लू
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- मुख्य सचिव ने प्रदेश में दूध और मटन का उत्पादन बढ़ाने के लिए की एपीडी की समीक्षा
- प्रदेश में 370 लाख किलो मांस का हो रहा उत्पादन, 545 लाख किलोग्राम मांस की है स्थानीय स्तर पर खपत
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपभोक्ता राज्य होने के नाते यह क्षेत्र दूध, मटन और उनके प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार प्रदान है। स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए भी उत्पादों के व्यावसायिक विस्तार और निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रदेश को बुनियादी पैकेजिंग और ब्रांडिंग से आगे बढ़ना होगा। यह बातें मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने वीरवार को कहीं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए जिससे उच्च मांग वाले उत्पाद और स्थायी आजीविका प्राप्त हो सके। मुख्य सचिव वीरवार को प्रदेश में दूध और मटन का उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादन विभाग (एपीडी) की समीक्षा कर रहे थे। अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि विभाग शैलेंद्र कुमार ने बताया कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति उपलब्धता 577 ग्राम प्रतिदिन के साथ सलाना 28.75 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन होता है, जो राष्ट्रीय औसत 471 ग्राम से अधिक है। विभाग का लक्ष्य अगले 5-7 वर्ष में कम से कम 20% उत्पादन को संगठित क्षेत्र के अंतर्गत लाना है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर एआई सेवाओं का विस्तार करने के लिए लगभग 1,600 ‘पशु सखियों’ (मैत्री) को पहले ही लगाया जा चुका है। प्रदेश में दो वीर्य केंद्र स्थापित हो रहा है। विभाग अमेरिका से 40 एचजीएम सांड खरीदने और हर जिले में दूध प्रसंस्करण और कोल्ड सिस्टम स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है। मटन उत्पादन के बाबत बताया कि प्रदेश में 43.68 लाख भेड़ें और 22.5 लाख बकरियां हैं जिनसे सलाना करीब 370 लाख किलो मांस और 80 लाख किलो ऊन उत्पादित होता है। स्थानीय मांग लगभग 545 लाख किलोग्राम मांस की है।
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इस अंतर को पाटने के लिए विभाग आनुवंशिक सुधार में तेजी लाने के लिए भ्रूण स्थानांतरण तकनीक (ईटीटी) और मल्टीपल ओव्यूलेशन, भ्रूण स्थानांतरण (एमओईटी) जैसे उन्नत प्रजनन तरीकोंं का अनुसरण कर रहा है। सालाना 6,000 भ्रूण उत्पादन के लक्ष्य के साथ भ्रूण निर्माण प्रयोगशाला स्थापित करने, क्रायोप्रिजर्वेशन के लिए सुविधा विकसित करने और हर जिले में ईटीटी प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना भी चल रही हैं।
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- प्रदेश में 370 लाख किलो मांस का हो रहा उत्पादन, 545 लाख किलोग्राम मांस की है स्थानीय स्तर पर खपत
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपभोक्ता राज्य होने के नाते यह क्षेत्र दूध, मटन और उनके प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार प्रदान है। स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए भी उत्पादों के व्यावसायिक विस्तार और निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रदेश को बुनियादी पैकेजिंग और ब्रांडिंग से आगे बढ़ना होगा। यह बातें मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने वीरवार को कहीं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए जिससे उच्च मांग वाले उत्पाद और स्थायी आजीविका प्राप्त हो सके। मुख्य सचिव वीरवार को प्रदेश में दूध और मटन का उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादन विभाग (एपीडी) की समीक्षा कर रहे थे। अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि विभाग शैलेंद्र कुमार ने बताया कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति उपलब्धता 577 ग्राम प्रतिदिन के साथ सलाना 28.75 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन होता है, जो राष्ट्रीय औसत 471 ग्राम से अधिक है। विभाग का लक्ष्य अगले 5-7 वर्ष में कम से कम 20% उत्पादन को संगठित क्षेत्र के अंतर्गत लाना है।
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इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर एआई सेवाओं का विस्तार करने के लिए लगभग 1,600 ‘पशु सखियों’ (मैत्री) को पहले ही लगाया जा चुका है। प्रदेश में दो वीर्य केंद्र स्थापित हो रहा है। विभाग अमेरिका से 40 एचजीएम सांड खरीदने और हर जिले में दूध प्रसंस्करण और कोल्ड सिस्टम स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है। मटन उत्पादन के बाबत बताया कि प्रदेश में 43.68 लाख भेड़ें और 22.5 लाख बकरियां हैं जिनसे सलाना करीब 370 लाख किलो मांस और 80 लाख किलो ऊन उत्पादित होता है। स्थानीय मांग लगभग 545 लाख किलोग्राम मांस की है।
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इस अंतर को पाटने के लिए विभाग आनुवंशिक सुधार में तेजी लाने के लिए भ्रूण स्थानांतरण तकनीक (ईटीटी) और मल्टीपल ओव्यूलेशन, भ्रूण स्थानांतरण (एमओईटी) जैसे उन्नत प्रजनन तरीकोंं का अनुसरण कर रहा है। सालाना 6,000 भ्रूण उत्पादन के लक्ष्य के साथ भ्रूण निर्माण प्रयोगशाला स्थापित करने, क्रायोप्रिजर्वेशन के लिए सुविधा विकसित करने और हर जिले में ईटीटी प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना भी चल रही हैं।