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Jammu News: मुश्क बुदजी चावल फिर महकने को तैयार, दुबई तक व्यापार
Mon, 09 Oct 2023 01:56 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 09 Oct 2023 01:56 AM IST
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रंग लाई स्कॉस्ट की पहल : कोकरनाग के पांच गांवों में उगाए जाने वाले पारंपरिक धान को मिला है जीआई टैग
- तीन साल में खेती का दायर पांच हजार हेक्टेयर बढ़ाना लक्ष्य
- बीमारी के कारण विलुप्त होने की कगार पर थी धान की किस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कश्मीर की स्थानीय सुगंधित धान की किस्म मुश्क बुदजी शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट) के प्रयासों से फिर दुनिया पर छाने को तैयार है। इस किस्म की ओर किसानों का फिर से रुझान बढ़ने और सरकारी प्रयासों से मिले मंच से सुगंधित चावल के चर्चे दुबई तक में होने लगे हैं। इस संबंध में दुबई से भी कॉल आने लगे हैं।
मुश्क बुदजी चावल को बढ़ावा मिलने की संभावना है। प्रशासन की ओर से अगले तीन वर्षों में इसकी खेती का क्षेत्रफल 5000 हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना है। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट) के विशेषज्ञों के अनुसार चावल की यह पारंपरिक किस्म बीमारियों और रुझान कम होने से विलुप्त होने के कगार पर थी। इसके अलावा उपज में एकरूपता न होने, गुणवत्ता वाले बीज की कमी, खराब उपज क्षमता और अधिक उपज देने वाली धान की किस्मों के चलते क्षेत्र में भी कमी आ गई थी। दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग के पांच गांवों में 250 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर उगाई जाने वाली मुश्क बुडजी को कृषि विभाग और स्कॉस्ट के ठोस प्रयासों से अगस्त 2023 में जीआई टैग मिला है।
कृषि उत्पादन और किसान कल्याण विभाग कश्मीर के निदेशक चौधरी मोहम्मद इकबाल के अनुसार हमारा लक्ष्य कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के समग्र विकास योजना के तहत अगले तीन वर्षों में 5000 हेक्टेयर भूमि को मुश्क बुदजी की खेती के तहत लाना है। पिछले साल उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने अगले पांच वर्षों में 5013 करोड़ रुपये के परिव्यय और 29 परियोजनाओं को कवर करते हुए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के समग्र विकास कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य कृषि अर्थव्यवस्था को बदलना और जम्मू-कश्मीर को विकास के नए पथ पर लाना, निर्यात को बढ़ावा देना और केंद्र शासित प्रदेश में किसान समृद्धि और ग्रामीण आजीविका सुरक्षा के एक नए चरण की शुरुआत करना है।
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मुश्क बुदजी को बडगाम तक विस्तारित करने में मिली सफलता
कृषि उत्पादन और किसान कल्याण विभाग कश्मीर के निदेशक चौधरी मोहम्मद इकबाल के अनुसार मुश्क बुदजी को बडगाम तक विस्तारित करने में सफल रहे हैं और उम्मीद है कि अधिक किसान इस फसल को उगाएंगे। इससे बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसका उत्पादन बढ़ेगा। मुश्क बुदजी की खेती को पुनर्जीवित करने के तहत अनंतनाग जिले के कोकरनाग के सगाम और आसपास के गांवों की पहचान 2013 में की गई थी।
मुश्क बुदजी की नई किस्म और बेहतर
कृषि विभाग ने स्कॉस्ट-कश्मीर की मदद से मुश्क बुडजी बीजों की एक नई किस्म उत्पन्न की है। नई किस्म बीमारियों और बदलती जलवायु परिस्थितियों के प्रति प्रतिरोधी है। किसान उत्पादक संगठन की स्थापना के साथ मुश्क बुदजी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश दिलाने के प्रयास जारी हैं। प्रयास कर रहे हैं।
आधा दर्जन गांवों के 500 से अधिक किसान उगा रहे मुश्क बुदजी की खेती
दो अक्टूबर से कश्मीर हाट में शुरू हुए जीआई मोहत्सव में हिस्सा ले रहे कोकरनाग के सगाम गांव के मंजूर अहमद भट ने बताया कि लगभग आधा दर्जन गांवों के 500 से अधिक किसान मुश्क बुदजी की खेती कर रहे हैं। उपज की जीआई टैगिंग से काफी फायदा होगा। एक किलो मुश्क बुदजी की कीमद 260 रुपये है। इसे श्रीनगर हाट में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। उत्पाद के लिए दुबई से भी कॉल आए हैं। सगाम गांव के बुजुर्ग किसान गुलाम मोहम्मद ने बताया कि काफी समय पहले इसकी खेती बंद कर दी थी। अब सरकार के प्रयासों से फिर इसकी खेती के प्रति रुझान बढ़ा है।
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- तीन साल में खेती का दायर पांच हजार हेक्टेयर बढ़ाना लक्ष्य
- बीमारी के कारण विलुप्त होने की कगार पर थी धान की किस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कश्मीर की स्थानीय सुगंधित धान की किस्म मुश्क बुदजी शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट) के प्रयासों से फिर दुनिया पर छाने को तैयार है। इस किस्म की ओर किसानों का फिर से रुझान बढ़ने और सरकारी प्रयासों से मिले मंच से सुगंधित चावल के चर्चे दुबई तक में होने लगे हैं। इस संबंध में दुबई से भी कॉल आने लगे हैं।
मुश्क बुदजी चावल को बढ़ावा मिलने की संभावना है। प्रशासन की ओर से अगले तीन वर्षों में इसकी खेती का क्षेत्रफल 5000 हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना है। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट) के विशेषज्ञों के अनुसार चावल की यह पारंपरिक किस्म बीमारियों और रुझान कम होने से विलुप्त होने के कगार पर थी। इसके अलावा उपज में एकरूपता न होने, गुणवत्ता वाले बीज की कमी, खराब उपज क्षमता और अधिक उपज देने वाली धान की किस्मों के चलते क्षेत्र में भी कमी आ गई थी। दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग के पांच गांवों में 250 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर उगाई जाने वाली मुश्क बुडजी को कृषि विभाग और स्कॉस्ट के ठोस प्रयासों से अगस्त 2023 में जीआई टैग मिला है।
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कृषि उत्पादन और किसान कल्याण विभाग कश्मीर के निदेशक चौधरी मोहम्मद इकबाल के अनुसार हमारा लक्ष्य कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के समग्र विकास योजना के तहत अगले तीन वर्षों में 5000 हेक्टेयर भूमि को मुश्क बुदजी की खेती के तहत लाना है। पिछले साल उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने अगले पांच वर्षों में 5013 करोड़ रुपये के परिव्यय और 29 परियोजनाओं को कवर करते हुए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के समग्र विकास कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य कृषि अर्थव्यवस्था को बदलना और जम्मू-कश्मीर को विकास के नए पथ पर लाना, निर्यात को बढ़ावा देना और केंद्र शासित प्रदेश में किसान समृद्धि और ग्रामीण आजीविका सुरक्षा के एक नए चरण की शुरुआत करना है।
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मुश्क बुदजी को बडगाम तक विस्तारित करने में मिली सफलता
कृषि उत्पादन और किसान कल्याण विभाग कश्मीर के निदेशक चौधरी मोहम्मद इकबाल के अनुसार मुश्क बुदजी को बडगाम तक विस्तारित करने में सफल रहे हैं और उम्मीद है कि अधिक किसान इस फसल को उगाएंगे। इससे बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसका उत्पादन बढ़ेगा। मुश्क बुदजी की खेती को पुनर्जीवित करने के तहत अनंतनाग जिले के कोकरनाग के सगाम और आसपास के गांवों की पहचान 2013 में की गई थी।
मुश्क बुदजी की नई किस्म और बेहतर
कृषि विभाग ने स्कॉस्ट-कश्मीर की मदद से मुश्क बुडजी बीजों की एक नई किस्म उत्पन्न की है। नई किस्म बीमारियों और बदलती जलवायु परिस्थितियों के प्रति प्रतिरोधी है। किसान उत्पादक संगठन की स्थापना के साथ मुश्क बुदजी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश दिलाने के प्रयास जारी हैं। प्रयास कर रहे हैं।
आधा दर्जन गांवों के 500 से अधिक किसान उगा रहे मुश्क बुदजी की खेती
दो अक्टूबर से कश्मीर हाट में शुरू हुए जीआई मोहत्सव में हिस्सा ले रहे कोकरनाग के सगाम गांव के मंजूर अहमद भट ने बताया कि लगभग आधा दर्जन गांवों के 500 से अधिक किसान मुश्क बुदजी की खेती कर रहे हैं। उपज की जीआई टैगिंग से काफी फायदा होगा। एक किलो मुश्क बुदजी की कीमद 260 रुपये है। इसे श्रीनगर हाट में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। उत्पाद के लिए दुबई से भी कॉल आए हैं। सगाम गांव के बुजुर्ग किसान गुलाम मोहम्मद ने बताया कि काफी समय पहले इसकी खेती बंद कर दी थी। अब सरकार के प्रयासों से फिर इसकी खेती के प्रति रुझान बढ़ा है।