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Poonch Attack: इस साल आतंकी हमलों में 24 जवानों का बलिदान, 28 दहशतगर्द भी ढेर; सुरक्षा विशेषज्ञ इसलिए चिंतित
Sat, 23 Dec 2023 11:03 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 23 Dec 2023 11:03 AM IST
सार
पुंछ में वीरवार को हुए आतंकी हमले के बाद क्षेत्र में बढ़ती आतंकी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सेना के नगरोटा स्थित 16वीं कोर का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने स्वीकार किया कि जिस इलाके में घटना हुई, वह कठिन इलाका है। उन्होंने कहा, लेकिन व्यक्ति को सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
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पुंछ में तलाशी अभियान
- फोटो : एजेंसी
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विस्तार
सुरक्षा और रक्षा विशेषज्ञों ने जम्मू क्षेत्र में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ सुरक्षा प्रबंधन और खुफिया नेटवर्क को तत्काल मजबूत करने का आह्वान किया है। इस साल आतंकी घटनाओं में 24 सुरक्षाकर्मियों और 28 आतंकवादियों सहित 59 लोगों की मौत हो गई।
वीरवार को पुंछ में हुए आतंकी हमले के बाद क्षेत्र में बढ़ती आतंकी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सेना के नगरोटा स्थित 16वीं कोर का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने स्वीकार किया कि जिस इलाके में घटना हुई, वह कठिन इलाका है। उन्होंने कहा, लेकिन व्यक्ति को सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कोर के शीर्ष अधिकारियों को ड्राइंग बोर्ड पर वापस जाना चाहिए और क्षेत्र में लगातार हो रहे घटनाक्रम का विश्लेषण करना चाहिए। 2019 में बालाकोट हमले में शामिल सेना अधिकारियों में से एक लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा, इस क्षेत्र में तस्करों, ड्रग कार्टेल और सिस्टम में लोगों के बीच एक अपवित्र गठजोड़ है।
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इसकी रीढ़ तोड़ने की तत्काल आवश्यकता है। जनरल सिंह ने यह भी सलाह दी कि अब समय आ गया है कि वरिष्ठ लोग जंगल युद्ध के ड्राइंग बोर्ड और बुनियादी प्रशिक्षण पर वापस जाएं। उन्होंने कहा, हमें तकनीकी इनपुट पर अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि वे कई बार गुमराह करने वाले होते हैं।
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वीरवार को पुंछ में हुए आतंकी हमले के बाद क्षेत्र में बढ़ती आतंकी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सेना के नगरोटा स्थित 16वीं कोर का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने स्वीकार किया कि जिस इलाके में घटना हुई, वह कठिन इलाका है। उन्होंने कहा, लेकिन व्यक्ति को सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कोर के शीर्ष अधिकारियों को ड्राइंग बोर्ड पर वापस जाना चाहिए और क्षेत्र में लगातार हो रहे घटनाक्रम का विश्लेषण करना चाहिए। 2019 में बालाकोट हमले में शामिल सेना अधिकारियों में से एक लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा, इस क्षेत्र में तस्करों, ड्रग कार्टेल और सिस्टम में लोगों के बीच एक अपवित्र गठजोड़ है।
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इसकी रीढ़ तोड़ने की तत्काल आवश्यकता है। जनरल सिंह ने यह भी सलाह दी कि अब समय आ गया है कि वरिष्ठ लोग जंगल युद्ध के ड्राइंग बोर्ड और बुनियादी प्रशिक्षण पर वापस जाएं। उन्होंने कहा, हमें तकनीकी इनपुट पर अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि वे कई बार गुमराह करने वाले होते हैं।
रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (रि.) एसएस पठानिया ने जताई चिंता
आतंकी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (सेवानिवृत्त) एसएस पठानिया ने कहा, पिछले दो महीनों में यह दूसरी घटना है। यह क्षेत्र दो साल पहले तक शांतिपूर्ण था। पिछले दो वर्षों में यहां 24 सैनिक शहीद हुए हैं।
ऐसा क्यों हो रहा है? आतंकियों का हौसला इतना बढ़ क्यों गया है? उन्होंने कहा कि एलओसी प्रबंधन और खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। एलओसी सुरक्षा प्रबंधन अचूक होना चाहिए और खुफिया नेटवर्क को मजबूत किया जाना चाहिए।
आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान
सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन (सेवानिवृत्त) अनिल गौड़ ने भी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की और खुफिया नेटवर्क में पूर्ण सुधार का आह्वान किया। उन्होंने कहा, पाकिस्तान इन घटनाओं को अंजाम देकर इस क्षेत्र में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन (सेवानिवृत्त) अनिल गौड़ ने भी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की और खुफिया नेटवर्क में पूर्ण सुधार का आह्वान किया। उन्होंने कहा, पाकिस्तान इन घटनाओं को अंजाम देकर इस क्षेत्र में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है।
आतंकवाद से निपटने में कुछ खामियां हैं। यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि क्षेत्र की खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और सभी आतंकियों का खत्म किया जाए। यह बहुत सारी प्राकृतिक गुफाओं वाला एक कठिन इलाका है।