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मंदिरों के शहर जम्मू में बढ़ा ड्रग्स माफिया का जाल
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 12 Jun 2016 12:49 PM IST
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नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी
- फोटो : Demo Pic.
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मंदिरों के शहर में ड्रग माफिया का जाल बढ़ता जा रहा है। नशीले कैप्सूल से लेकर हेरोइन जैसे ड्रग्स की चपेट में जम्मू के युवा वर्ग की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ड्रग की चपेट में आए युवा ही नए लोगों को तैयार करके अपने नशे को हासिल कर रहे हैं।
नशे का व्यापार जम्मू में लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ करवाने के अलावा हेरोइन, गांजा, चरस आदि की सप्लाई की जा रही है। यह सब कुछ बेहद संगठित तरीके से किया जा रहा है। जम्मू के युवा इन मादक पदार्थों को बाहरी राज्यों से खरीद रहे हैं। पंजाब से इस ड्रग खरीदकर जम्मू के युवा इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
रुपयों की कमी के कारण नशे के आदी को चुके युवा नए साथियों को इसमें शामिल कर रहे हैं।करोड़ों रुपये की हेराइन बरामद होने के बाद पुलिस इस मामले में गहन छानबीन कर रही है। नशीले कैप्सूल इंजेक्शन के बाद अब घातक ड्रग का प्रचलन लगातार बढ़ता जा रहा है।
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डीआईजी कठुआ जम्मू रेंज अशकूर वानी के अनुसार ड्रग के बढ़ते जाल को कम करने के लिए पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। इस मामले में पुलिस पब्लिक मीट भी की जा रही है। प्रेस क्लब व अन्य कई संस्थानों में इसका मुद्दा उठाया गया। पुलिस भी गंभीर है कि युवा इसकी चपेट में नहीं आएं।
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नशे का व्यापार जम्मू में लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ करवाने के अलावा हेरोइन, गांजा, चरस आदि की सप्लाई की जा रही है। यह सब कुछ बेहद संगठित तरीके से किया जा रहा है। जम्मू के युवा इन मादक पदार्थों को बाहरी राज्यों से खरीद रहे हैं। पंजाब से इस ड्रग खरीदकर जम्मू के युवा इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
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रुपयों की कमी के कारण नशे के आदी को चुके युवा नए साथियों को इसमें शामिल कर रहे हैं।करोड़ों रुपये की हेराइन बरामद होने के बाद पुलिस इस मामले में गहन छानबीन कर रही है। नशीले कैप्सूल इंजेक्शन के बाद अब घातक ड्रग का प्रचलन लगातार बढ़ता जा रहा है।
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डीआईजी कठुआ जम्मू रेंज अशकूर वानी के अनुसार ड्रग के बढ़ते जाल को कम करने के लिए पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। इस मामले में पुलिस पब्लिक मीट भी की जा रही है। प्रेस क्लब व अन्य कई संस्थानों में इसका मुद्दा उठाया गया। पुलिस भी गंभीर है कि युवा इसकी चपेट में नहीं आएं।
नशे के चंगुल में हाई प्रोफाइल युवतियां
ड्रग्स
- फोटो : Demo Pic.
हाईटेक युवा भी नशे के जाल में तेजी से फंस रहे हैं। वे कब, कहां और कैसे नशे में लिप्त हो जाते हैं, उन्हें भी पता नहीं चलता है। जब होश आता है तो बहुत देर हो चुकी होती है। मंदिरों के शहर में हाई प्रोफाइल युवतियां भी नशे के चंगुल में फंस रही हैं। उनके लिए भी नशे की लत से बाहर निकल पाना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है।
नशे की चपेट में आई युवतियों के लिए डी-एडिक्शन सेंटर नहीं है। पुरखू में एक सेंटर के संचालकों का कहना है कि हर वर्ष उनके पास नशे की आदी दो दर्जन के करीब हाई प्रोफाइल युवतियों को लेकर उनके अभिभावक पहुंचते हैं, लेकिन युवतियों को रखने की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें लौटा दिया जाता है।
पंद्रह लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में एक भी महिला सुधार केंद्र नहीं है। एक वर्ष पहले हेरोइन की ओवरडोज से त्रिकुटानगर मलिक मार्केट में रहने वाली एक युवती की मौत हो गई थी।
सेंटर संचालकों के मुताबिक 2010 में सर्वे किया गया था, जिसमें हाई प्रोफाइल युवक-युवतियां बड़ी तादाद में नशे की चपेट में आई हुई थी। हेरोइन और चरस का नशा सबसे ऊपर पाया गया है।
छह वर्ष में यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इन आंकड़ों को कम करने के लिए अभिभावक अपनी लाडलियों को लेकर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन बेबस होकर खाली हाथ लौट रहे हैं।
नशे की चपेट में आई युवतियों के लिए डी-एडिक्शन सेंटर नहीं है। पुरखू में एक सेंटर के संचालकों का कहना है कि हर वर्ष उनके पास नशे की आदी दो दर्जन के करीब हाई प्रोफाइल युवतियों को लेकर उनके अभिभावक पहुंचते हैं, लेकिन युवतियों को रखने की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें लौटा दिया जाता है।
पंद्रह लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में एक भी महिला सुधार केंद्र नहीं है। एक वर्ष पहले हेरोइन की ओवरडोज से त्रिकुटानगर मलिक मार्केट में रहने वाली एक युवती की मौत हो गई थी।
सेंटर संचालकों के मुताबिक 2010 में सर्वे किया गया था, जिसमें हाई प्रोफाइल युवक-युवतियां बड़ी तादाद में नशे की चपेट में आई हुई थी। हेरोइन और चरस का नशा सबसे ऊपर पाया गया है।
छह वर्ष में यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इन आंकड़ों को कम करने के लिए अभिभावक अपनी लाडलियों को लेकर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन बेबस होकर खाली हाथ लौट रहे हैं।
किशोर भी बन रहे नशे के आदी
नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी
- फोटो : Demo Pic.
मंदिरों के शहर जम्मू में अच्छे घरों के लाडलों को नशे ने जकड़ लिया है। देश का भविष्य कहे जाने वाले किशोर प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षा पा रहे हैं। लेकिन नशे की लत ने जिंदगी ही बदल दी है। नशे के लिए कुछ भी करने की प्रवृति लगातार बढ़ रही है।
पुरखू स्थित जम्मू-कश्मीर सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेस के ड्रग डिएडिक्शन सेंटर में नशे से पीछा छुड़ाने के लिए पहुंचे कई किशोरों में यह आदतें देखने को मिलीं।
केंद्र की निदेशक पल्लवी सिंह ने बताया कि केंद्र में 16 पीड़ितों को विभिन्न थेरेपी के माध्यम से इलाज दिया जा रहा है। यह इलाज तीन माह तक चलता है। जिसके बाद पीड़ित में सुधार होने पर उसे परिजनों के साथ भेज दिया जाता है। पीड़ितों की देखभाल और इलाज में सहयोग देने के लिए स्टाफ में चौदह सदस्यों की सेवाएं ली जा रही हैं।
केंद्र में 15 बेडों की केंद्र सरकार से मंजूरी मिली है। लेकिन तीन अतिरिक्त बेड लगाकर इलाज दिया जा रहा है। पीड़ितों में पांच की संख्या 22 साल से कम हैं। इसमें हेरोइन की लत से पीड़ित होकर केंद्र में तीन किशोर भी भर्ती हैं। सिंह ने बताया कि केंद्र में लगातार मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन लड़कियों के लिए कोई व्यवस्था न होने से उन्हें रखा नहीं जाता है।
पुरखू स्थित जम्मू-कश्मीर सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेस के ड्रग डिएडिक्शन सेंटर में नशे से पीछा छुड़ाने के लिए पहुंचे कई किशोरों में यह आदतें देखने को मिलीं।
केंद्र की निदेशक पल्लवी सिंह ने बताया कि केंद्र में 16 पीड़ितों को विभिन्न थेरेपी के माध्यम से इलाज दिया जा रहा है। यह इलाज तीन माह तक चलता है। जिसके बाद पीड़ित में सुधार होने पर उसे परिजनों के साथ भेज दिया जाता है। पीड़ितों की देखभाल और इलाज में सहयोग देने के लिए स्टाफ में चौदह सदस्यों की सेवाएं ली जा रही हैं।
केंद्र में 15 बेडों की केंद्र सरकार से मंजूरी मिली है। लेकिन तीन अतिरिक्त बेड लगाकर इलाज दिया जा रहा है। पीड़ितों में पांच की संख्या 22 साल से कम हैं। इसमें हेरोइन की लत से पीड़ित होकर केंद्र में तीन किशोर भी भर्ती हैं। सिंह ने बताया कि केंद्र में लगातार मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन लड़कियों के लिए कोई व्यवस्था न होने से उन्हें रखा नहीं जाता है।