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ढोल-नगाड़ों के साथ जम्मू से मचैल के लिए निकली मां चंडी की छड़ी यात्रा
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जम्मू। पुराने शहर में बुधवार सुबह मां चंडी की छड़ी यात्रा ढोल-नगाड़ों के साथ मचैल के लिए रवाना हुई। इस दौरान माता रानी के जयकारों के साथ जम्मू शहर भक्तिमय हो गया। मां की भेंटों पर भक्त जमकर झूमे। छड़ी यात्रा में डुग्गर कलाकारों ने लोक नृत्य की छटा बिखेरी। शहर के लिंक रोड, जैन बाजार आदि से गुजरते हुए छड़ी यात्रा मां मचैल माता के दरबार के लिए रवाना हुई, जो शाम को किश्तवाड़ पहुंची।
चंडी मां की छड़ी को एक वाहन पर सजाया गया था। मां के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और आशीर्वाद प्राप्त कर सुख-समृद्धि की कामना की। भक्तों के चेहरों पर उत्साह देखते ही बन रहा था। डोगरी वाद्य यंत्रों की धुन पर भक्तजन नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। छड़ी यात्रा के साथ बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों में मचैल के लिए निकले। इस दौरान भक्तों ने मां की अखंड ज्योति के भी दर्शन किए। सेवादारों ने बताया कि हर साल जैन समुदाय और अन्य लोगों के सहयोग से छड़ी यात्रा निकाली जा रही है। छड़ी यात्रा में कोविड प्रोटोकाल का पालन किया गया।
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किश्तवाड़ में छड़ी यात्रा का भव्य स्वागत
किश्तवाड़। जम्मू से निकली प्रसिद्ध मचैल यात्रा की पवित्र छड़ी बुधवार शाम को ऊधमपुर, बटोत, डोडा, प्रेमनगर, ठाठरी, द्राबशाल व कांदनी से होते हुए किश्तवाड़ पहुंची। इस दौरान जिला मुख्यालय माता के जयकारों से गूंज उठा। शहर से पांच किलोमीटर पहले शालीमार के पास से ही छड़ी के स्वागत के लिए भक्तों की कतारें लगी थीं। जिला मुख्यालय के पास पहुंचते ही डीसी अशोक कुमार शर्मा, एडीसी किशोरी लाल शर्मा, एएसपी राजेंद्र सिंह सहित सनातन धर्म सभा व अन्य कई धार्मिक संगठनों के सदस्यों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इस दौरान कोविड एसओपी का पूरा पालन किया गया। सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। बुधवार को छड़ी यात्रा का पहला पड़ाव किश्तवाड़ शहर से 35 किलोमीटर दूर गलहार गांव में सेवा राम के निवास पर हुआ, रात को जागरण किया गया। संवाद
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ये होंगे यात्रा के पड़ाव
गलहार में रात्रि विश्राम के बाद अगला पड़ाव अठोली पाडर में होगा। यहां पर दूसरे दिन ज्वाला माता मंदिर से होकर अगले पड़ाव के लिए गुलाबगढ़ शहर में पहुंचेगी। चौथा पड़ाव आग चिशोती गांव में होगा। पांचवें दिन माता पवित्र छड़ी मां मचैल के दरबार में पहुंचेगी। 23 अगस्त को हवन-कीर्तन किया जाएगा। 24 अगस्त को सुबह अठोली पाडर के लिए छड़ी वापस प्रस्थान करेगी और 25 को डोडा पहुंचेगी। कोरोना के चलते सिर्फ परंपरानुसार पवित्र छड़ी ही ले जाने की अनुमति मिली है। इसमें सिफ 25 लोग ही शामिल हैं। गत दो साल से कोरोना और अनुच्छेद 370 व 35ए समाप्त करने के चलते यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया था। मात्र पवित्र छड़ी ले जाने की ही अनुमति मिली थी।
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चंडी मां की छड़ी को एक वाहन पर सजाया गया था। मां के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और आशीर्वाद प्राप्त कर सुख-समृद्धि की कामना की। भक्तों के चेहरों पर उत्साह देखते ही बन रहा था। डोगरी वाद्य यंत्रों की धुन पर भक्तजन नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। छड़ी यात्रा के साथ बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों में मचैल के लिए निकले। इस दौरान भक्तों ने मां की अखंड ज्योति के भी दर्शन किए। सेवादारों ने बताया कि हर साल जैन समुदाय और अन्य लोगों के सहयोग से छड़ी यात्रा निकाली जा रही है। छड़ी यात्रा में कोविड प्रोटोकाल का पालन किया गया।
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किश्तवाड़ में छड़ी यात्रा का भव्य स्वागत
किश्तवाड़। जम्मू से निकली प्रसिद्ध मचैल यात्रा की पवित्र छड़ी बुधवार शाम को ऊधमपुर, बटोत, डोडा, प्रेमनगर, ठाठरी, द्राबशाल व कांदनी से होते हुए किश्तवाड़ पहुंची। इस दौरान जिला मुख्यालय माता के जयकारों से गूंज उठा। शहर से पांच किलोमीटर पहले शालीमार के पास से ही छड़ी के स्वागत के लिए भक्तों की कतारें लगी थीं। जिला मुख्यालय के पास पहुंचते ही डीसी अशोक कुमार शर्मा, एडीसी किशोरी लाल शर्मा, एएसपी राजेंद्र सिंह सहित सनातन धर्म सभा व अन्य कई धार्मिक संगठनों के सदस्यों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इस दौरान कोविड एसओपी का पूरा पालन किया गया। सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। बुधवार को छड़ी यात्रा का पहला पड़ाव किश्तवाड़ शहर से 35 किलोमीटर दूर गलहार गांव में सेवा राम के निवास पर हुआ, रात को जागरण किया गया। संवाद
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ये होंगे यात्रा के पड़ाव
गलहार में रात्रि विश्राम के बाद अगला पड़ाव अठोली पाडर में होगा। यहां पर दूसरे दिन ज्वाला माता मंदिर से होकर अगले पड़ाव के लिए गुलाबगढ़ शहर में पहुंचेगी। चौथा पड़ाव आग चिशोती गांव में होगा। पांचवें दिन माता पवित्र छड़ी मां मचैल के दरबार में पहुंचेगी। 23 अगस्त को हवन-कीर्तन किया जाएगा। 24 अगस्त को सुबह अठोली पाडर के लिए छड़ी वापस प्रस्थान करेगी और 25 को डोडा पहुंचेगी। कोरोना के चलते सिर्फ परंपरानुसार पवित्र छड़ी ही ले जाने की अनुमति मिली है। इसमें सिफ 25 लोग ही शामिल हैं। गत दो साल से कोरोना और अनुच्छेद 370 व 35ए समाप्त करने के चलते यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया था। मात्र पवित्र छड़ी ले जाने की ही अनुमति मिली थी।