किसानों की कंगाली से कांपा कारोबार, पढ़िए खबर
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लगातार दो फसलों की बर्बादी झेल चुके किसानों की कंगाली का असर कारोबार पर भी पड़ा है। खासकर इन दिनों विवाह शादियों का सीजन है। किसान परिवारों में होने वाली शादियों में खरीदारी में गिरावट दर्ज की गई है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि किसान को अपनी बेटी आधे-अधूरे अभूषणों से रुखसत करनी पड़ रही है। सराफा, कपड़ा, इलेक्ट्रानिक और वाहन बाजार इससे प्रभावित हुआ है।
कारोबारियों की मानें तो पिछले आठ महीने से मार्केट मंदी की शिकार हो रही है, जिससे राहत मिलती नजर नहीं आ रही। पीक सीजन में इन सभी चीजों की बिक्री होती है। इसमें किसानों की 40 फीसदी की हिस्सेदारी होती है। मार्केट दूरदराज के क्षेत्रों पर काफी हद तक निर्भर करती है।
दस की जगह तीन तोला सोना
सराफा बाजार एसोसिएशन के प्रधान विजय सराफ ने कहा कि किसानों की कंगाली का सराफा बाजार पर बुरा असर पड़ा है। जिस किसी ने दस तोले की बुकिंग कराई थी, वह दो से तीन तोले सोना लेकर ही जा रहा है।
इसका असर सराफा बाजार पर पड़ा है। यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी बुकिंग कैंसल हुईं, लेकिन यह जरूर है कि दूरदराज के क्षेत्रों में सराफा की बिक्री 70 फीसदी कम हो गई है।
40 फीसदी बिक्री कम हुई-
इलेक्ट्रानिक यंत्र डीलर एसोसिएशन के प्रधान दिनेश गुप्ता का कहना है कि इलेक्ट्रानिक यंत्रों की बिक्री में 40 फीसदी की कमी आई है। पिछले सीजन में जहां खरीदारी में फ्रिज, एलईडी, टीवी, वाशिंग मशीन सहित अन्य आइटमें एक साथ निकल रही थीं, वहीं इस बार एक आध आइटम ही निकल रही है।
शादियों के सीजन में किसानों की मांग में यह सब सामान होता था, लेकिन इस बार एक आधी आइटम ही मांगी जा रही है। गर्मियों में एसी, फ्रिज, कूलर आदि की मांग रहती है, जो इस बार काफी कम दिखाई दे रही है।
शादियों के खर्च में कटौती-
चैंबर आफ ट्रेडर फेडरेशन के अध्यक्ष यशपाल गुप्ता का कहना है कि किसानों की फसलें खराब होने का असर हर एक सेक्टर पर पड़ा है। किसान की कोशिश रहती है कि वह अपनी बेटी की शादी में उसे खूब गहने दे, दहेज दे और बारातियों की अच्छी खातिरदारी करे, लेकिन मौसम की मार ने किसानों के अरमानों को तहस-नहस कर दिया है।