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Jammu News: 10 अगस्त को गीदड़ ने काटा, 28 दिन इलाज, फिर भी कॉलेज छात्र को रेबीज
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी के रेबीज सेक्शन में शुक्रवार शाम को रेबीज पॉजिटिव मरीज के पहुंचने पर हड़कंप मच गया। परिजन 18 साल के बेटे को गंभीर हालत में लेकर पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। परिवार वालों के होश उड़े हैं कि बेटे को जिला अस्पताल उधमपुर में वैक्सीन और सिरम लगाने के बावजूद रेबीज कैसे हो गया है। डॉक्टर भी हैरान हैं। मरीज को देर रात तक आइसोलेट वार्ड में रखा गया था।
उधमपुर की रामनगर तहसील के गांव सुगहलाड़ निवासी सोहन सिंह ने बताया कि बेटा कॉलेज में पढ़ता है और 10 अगस्त को उसे घर से कुछ दूरी पर गीदड़ ने नाक, हाथ और टांग पर काट लिया था। उसी वक्त निजी वाहन में जिला अस्पताल उधमपुर पहुंचे और बेटे को सिरम और चार डोज वैक्सीन लगाई गई, जिसका कोर्स 7 सितंबर को पूरा हुआ। मगर अब अचानक तबीयत खराब हो गई। बेटा पानी, रोशनी, आवाज आदि से डर रहा था और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। इस कारण जिला अस्पताल उधमपुर की इमरजेंसी में पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने घर जाने का कह दिया। इसके बाद जीएमसी आ गए। यहां भी डरने के लक्षण दिख रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटे को पूरी वैक्सीन लगाई गई, फिर उसे रेबीज कैसे हुआ है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच करवाई जाए।
क्लास तीन की श्रेणी में लगती है वैक्सीन और सिरम
जीएमसी के डॉक्टरों के अनुसार मामला क्लास तीन श्रेणी का है, जिसमें सिरम (जख्म वाले स्थान पर) और वैक्सीन लगाना जरूरी होता है। पीड़ित के शरीर के विभिन्न हिस्से पर जानवर द्वारा काटने पर खून का रिसाव होता है। अगर वैक्सीन को बीच में छोड़ दिया जाए तो रेबीज होने की आशंका रहती है। एंटी रेबीज वैक्सीन शरीर के भीतर 7 से 10 दिन में एंटीबॉडीज बनाती है, जो लायसा वायरस से लड़ती है। जबकि सिरम शरीर के नर्वस सिस्टम से दिमाग तक पहुंचने वाले वायरस को रास्ते में रोक देता है और सिरम काटने वाले हिस्से पर लगाया जाता है। यह 24 से 72 घंटे के भीतर असर करना शुरू कर देता है।
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पीड़ित को आइसोलेट किया
जीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेंद्र बुतियाल के अनुसार रामनगर से रेबीज से पीड़ित पहुंचा है। उसकी रिपोर्ट व लक्षणों में रेबीज की पुष्टि हो रही है। फिलहाल आइसोलेट में रखा है। परिजन दावा कर रहे हैं कि पूरी वैक्सीन और सिरम लगाया गया है। वहीं, उधमपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बलकारी लाल चौधरी का कहना है-मामले के बारे में जानकारी नहीं है। अस्पताल की एंटी रेबीज सेक्शन में जानवरों के काटने वाले मामलों में पीड़ितों को वैक्सीन और सिरम दिया जा रहा है।
...तो कहीं चूक नहीं हुई
1. विशेषज्ञों के अनुसार सही ढंग से पीड़ित को वैक्सीन नहीं लगाने पर असर कम हो सकता है।
2. वैक्सीन को लगाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ का होना जरूरी है।
3. वैक्सीन को बीच में छोड़ने से रेबीज होने की आशंका हो सकती है।
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जम्मू। जीएमसी के रेबीज सेक्शन में शुक्रवार शाम को रेबीज पॉजिटिव मरीज के पहुंचने पर हड़कंप मच गया। परिजन 18 साल के बेटे को गंभीर हालत में लेकर पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। परिवार वालों के होश उड़े हैं कि बेटे को जिला अस्पताल उधमपुर में वैक्सीन और सिरम लगाने के बावजूद रेबीज कैसे हो गया है। डॉक्टर भी हैरान हैं। मरीज को देर रात तक आइसोलेट वार्ड में रखा गया था।
उधमपुर की रामनगर तहसील के गांव सुगहलाड़ निवासी सोहन सिंह ने बताया कि बेटा कॉलेज में पढ़ता है और 10 अगस्त को उसे घर से कुछ दूरी पर गीदड़ ने नाक, हाथ और टांग पर काट लिया था। उसी वक्त निजी वाहन में जिला अस्पताल उधमपुर पहुंचे और बेटे को सिरम और चार डोज वैक्सीन लगाई गई, जिसका कोर्स 7 सितंबर को पूरा हुआ। मगर अब अचानक तबीयत खराब हो गई। बेटा पानी, रोशनी, आवाज आदि से डर रहा था और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। इस कारण जिला अस्पताल उधमपुर की इमरजेंसी में पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने घर जाने का कह दिया। इसके बाद जीएमसी आ गए। यहां भी डरने के लक्षण दिख रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटे को पूरी वैक्सीन लगाई गई, फिर उसे रेबीज कैसे हुआ है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच करवाई जाए।
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क्लास तीन की श्रेणी में लगती है वैक्सीन और सिरम
जीएमसी के डॉक्टरों के अनुसार मामला क्लास तीन श्रेणी का है, जिसमें सिरम (जख्म वाले स्थान पर) और वैक्सीन लगाना जरूरी होता है। पीड़ित के शरीर के विभिन्न हिस्से पर जानवर द्वारा काटने पर खून का रिसाव होता है। अगर वैक्सीन को बीच में छोड़ दिया जाए तो रेबीज होने की आशंका रहती है। एंटी रेबीज वैक्सीन शरीर के भीतर 7 से 10 दिन में एंटीबॉडीज बनाती है, जो लायसा वायरस से लड़ती है। जबकि सिरम शरीर के नर्वस सिस्टम से दिमाग तक पहुंचने वाले वायरस को रास्ते में रोक देता है और सिरम काटने वाले हिस्से पर लगाया जाता है। यह 24 से 72 घंटे के भीतर असर करना शुरू कर देता है।
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पीड़ित को आइसोलेट किया
जीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेंद्र बुतियाल के अनुसार रामनगर से रेबीज से पीड़ित पहुंचा है। उसकी रिपोर्ट व लक्षणों में रेबीज की पुष्टि हो रही है। फिलहाल आइसोलेट में रखा है। परिजन दावा कर रहे हैं कि पूरी वैक्सीन और सिरम लगाया गया है। वहीं, उधमपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बलकारी लाल चौधरी का कहना है-मामले के बारे में जानकारी नहीं है। अस्पताल की एंटी रेबीज सेक्शन में जानवरों के काटने वाले मामलों में पीड़ितों को वैक्सीन और सिरम दिया जा रहा है।
...तो कहीं चूक नहीं हुई
1. विशेषज्ञों के अनुसार सही ढंग से पीड़ित को वैक्सीन नहीं लगाने पर असर कम हो सकता है।
2. वैक्सीन को लगाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ का होना जरूरी है।
3. वैक्सीन को बीच में छोड़ने से रेबीज होने की आशंका हो सकती है।