फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Questions raised regarding the qualifications and registration of doctors in Jammu and Kashmir

जम्मू-कश्मीर: नशामुक्ति केंद्रों में ही नशे की दवाओं का खेल, पांच दिन में 38,580 गोलियों की बिक्री

Fri, 23 Oct 2026 04:16 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Fri, 23 Oct 2026 04:16 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में नशामुक्ति केंद्रों की जांच के दौरान डॉक्टरों की अनुपस्थिति, नियमों के उल्लंघन और नशे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की बिक्री में अनियमितताएं सामने आई हैं।

विज्ञापन
Questions raised regarding the qualifications and registration of doctors in Jammu and Kashmir
दवा - फोटो : आईएएनएस

विस्तार

नशे की लत से छुटकारे के लिए मरीज व स्वजन नशामुक्ति केंद्रों पर भरोसा करते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में इन्हीं केंद्रों के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। कहीं डॉक्टर की गैरमौजूदगी में दवाएं बेची जा रही हैं, तो कुछ की विशेषज्ञ योग्यता व केंद्र के पंजीकरण को लेकर गड़बड़ी मिली है। एक केंद्र में तो पांच दिन में 38,580 गोलियों की बिक्री दर्ज की गई। मेडिकल काउंसिल ने जुलाई से अब तक सात मनोचिकित्सकों की अनुमति रद्द की है और 10 से ज्यादा केंद्रों को सील किया है।

विज्ञापन
Trending Videos

चौंकाने वाला मामला कुंजवानी बाईपास के पास जम्मू साइकियाट्रिक क्लीनिक का है। यहां 22 से 26 मई के बीच ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन की 38,580 गोलियों की बिक्री दर्ज की गई। इनमें 25 मई को ही 10,120 गोलियों की बिक्री का रिकॉर्ड मिला। इसका इस्तेमाल नशे की लत के इलाज में होता है। यहां मनोचिकित्सक डॉ. खुशबू हर्ष चौहान को प्रदेश में इलाज करने की अनुमति भी रद्द कर दी गई। इस क्लिनिक में सितंबर 2025 से 2026 तक एक ही दवा आपूर्तिकर्ता से ब्यूप्रेनॉर्फिन-नालोक्सोन की करीब 25 लाख गोलियां खरीदने और बांटे जाने का रिकॉर्ड मिला। बाड़ी ब्राह्मणा में रेलवे चौक के पास डिवाइन साइकियाट्रिक ओपीडी क्लीनिक एक डॉक्टर के संचालन वाले डे-केयर क्लीनिक के रूप में पंजीकृत था। बाहर नशामुक्ति केंद्र का बोर्ड लगा था, लेकिन जरूरी अनुमति ही नहीं थी। 13 अगस्त 2025 को जांच के दौरान क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर आरिफुद्दीन अहमद नहीं मिले।

विज्ञापन
विज्ञापन

डॉक्टर अनुपस्थित, दूसरा व्यक्ति दे रहा था दवाएं
कठुआ के कालीबाड़ी स्थित एएएस न्यूरोसाइकियाट्रिक डी-एडिक्शन एंड पेन मैनेजमेंट क्लीनिक की 12 सितंबर 2023 को जांच की गई थी। उस समय क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर डॉ. सुमीत सिंह मौके पर मौजूद नहीं थे। टीम को इंदरजीत सिंह नाम का व्यक्ति नियंत्रित दवाएं देता मिला। इस मामले में 6 जुलाई 2026 डॉ. सुमीत सिंह की अनुमति रद्द कर दी गई।
विज्ञापन

वेव मॉल के केंद्र में 36 हजार गोलियों का रिकॉर्ड, डॉक्टर की योग्यता पर सवाल
जम्मू के वेव मॉल स्थित डिवाइन डी-एडिक्शन सेंटर से जुड़े मामले में डॉ. सैयद मतीन की विशेषज्ञता और दवाओं की बिक्री पर सवाल उठे। 30 जून 2025 के एक बिल में डॉ. मतीन के पंजीकरण नंबर पर ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन की 36,000 गोलियों की खरीद दर्ज थी। डॉ. सैयद मतीन ने खुद को मनोचिकित्सक बताया था और क्लीनिक का प्रभारी होने की बात कही थी। लेकिन काउंसिल के रिकॉर्ड में मनोचिकित्सा की विशेषज्ञता से जुड़ी उनकी योग्यता दर्ज नहीं थी।

चार साल में इलाज कराने वालों की संख्या आठ गुना से ज्यादा
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में केंद्र से मदद पाने वाले नशामुक्ति केंद्रों में 2021-22 में 5, 382 लोगों ने इलाज कराया। 2025-26 में यह बढ़कर 46,491 हो गई। इनमें से 9,960 लोग जम्मू जिले के थे। ये आंकड़े सरकारी केंद्रों में इलाज कराने वालों के हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed