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दिल्ली में बैठक और जम्मू में हुए प्रदर्शन
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जम्मू। दिल्ली में सर्वदलीय बैठक चलती रही और जम्मू में प्रदर्शनों का सिलसिला भी जारी रहा। वीरवार दिनभर शहर में घमासान मचा रहा। पाकिस्तान से बातचीत की वकालत करने पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के खिलाफ डोगरा फ्रंट शिवसेना ने प्रदर्शन किया। वहीं इकजुट जम्मू ने जम्मू की उपेक्षा का सवाल उठाते हुए नारेबाजी की। बैठक में नुमाइंदगी ना मिलने से नाराज कश्मीरी पंडितों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।
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नजरअंदाज करने से आक्रोशित हुआ कश्मीरी पंडित समुदाय
बोले-सरकार उन राजनीतिक दलों से बात कर रही, जो कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का कारण
जम्मू। दिल्ली में सर्वदलीय बैठक में कश्मीरी पंडित समुदाय को नजरअंदाज करने और कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के कारण बनने वाले राजनीतिक दलों से केंद्र सरकार द्वारा बातचीत करने पर समुदाय के लोगों ने रोष जताया। वीरवार को यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (वाईएआईकेएस) के बैनर तले समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की वास्तविक पीड़ा को राजनीतिक दल नहीं समझते। अगर ऐसा होता तो 32 साल बाद कश्मीरी पंडित विस्थापित नहीं रहते। वाईएआईकेएस के अध्यक्ष आरके भट्ट ने कहा कि कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दल कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं। कश्मीरी पंडित अपनी बात खुद रखने में सक्षम हैं और सरकार को हमें भी सर्वदलीय बैठक का हिस्सा बनाना चाहिए था। नरेंद्र मोदी सरकार भी अन्य पार्टियों की राह पर चल रही है। आज वह उन कश्मीर केंद्रित राजनीति दलों से बातचीत कर रही है जो पाकिस्तान, अलगाववाद और आतंकवाद का समर्थन करते हैं और कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का बड़ा कारण भी हैं। यह राजनीतिक दल कभी नहीं चाहते कि कश्मीरी पंडितों की घर वापसी हो। किसी भी पार्टी ने हमारा पक्ष नहीं रखा।
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महबूबा मुफ्ती को तिहाड़ जेल में बंद करने की मांग
जम्मू। सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान से बातचीत का मुद्दा उठाए जाने की वकालत से नाराज डोगरा फ्रंट शिवसेना ने महबूबा मुफ्ती के खिलाफ नारेबाजी की और महबूबा को तिहाड़ में डालने की मांग की।
फ्रंट ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने कभी देश हित में बात नहीं की। वह हमेशा से ही पाकिस्तान के समर्थन में रही हैं और उनका गुणगान किया है। वह हमेशा से पाकिस्तान की हितैषी रही हैं, जिसको किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। पीएम के साथ बैठक में उनको शामिल नहीं करना चाहिए था। फ्रंट के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को हितधारक बताया है, जिसे लेकर उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे नेताओं की कोई जगह नहीं है। इनकी जगह जेल में है। जो कोई भी पाकिस्तान के समर्थन में बात करता है, उस पर देशद्रोह का केस चलना चाहिए। इससे पहले महबूबा के पाकिस्तान से बात करने वाले बयान को लेकर बुधवार को भी फ्रंट भी प्रदर्शन कर चुकी है।
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सर्वदलीय बैठक के खिलाफ इकजुट जम्मू का प्रदर्शन
कार्यकर्ताओं ने जम्मू को अलग राज्य बनाने की उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दिल्ली में पीएम मोदी के साथ हुई जम्मू-कश्मीर के नेताओं की सर्वदलीय बैठक का इकजुट जम्मू के कार्यकर्ताओं ने जम्मू संभाग के सभी 10 जिलों में विरोध किया। प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन कर जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग उठाई। पार्टी अध्यक्ष अंकुर शर्मा ने कहा कि बैठक में जम्मू संभाग को एक बार फिर नजरअंदाज किया गया। यह डोगरों और हिंदुओं के साथ अन्याय है, जो बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील राजनीतिक मामलों से निपटने में केंद्र सरकार के नेहरू वादी दृष्टिकोण की भी आलोचना की। आरोप लगाया कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के भविष्य पर मुख्यधारा के राजनीतिक अभिनेताओं के रूप में कश्मीर के इस्लामवादियों के साथ विशेष रूप से बातचीत की। प्रदर्शन के दौरान सर्वसम्मति से जम्मू को अलग राज्य के लिए अभियान तेज करने का प्रस्ताव पारित किया गया। मौके पर महासचिव अश्विनी शर्मा, किरण कुमार, अजय सैनी, हरीश कपूर, वीर विक्रम भी शामिल थे।
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जम्मू-कश्मीर को मिले पूर्ण राज्य का दर्जा
जम्मू। रिकॉन्सिलिएशन रिटर्न एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ माइग्रेंट्स के चेयरमैन सतीश महलदार ने कहा कि दिल्ली में हो रही सर्वदलीय बैठक केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक विश्वास बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य का दर्जा खोने से प्रदेश के लोगों में शिकायत थी। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। जम्मू-कश्मीर दो शत्रु देशों पाकिस्तान और चीन से घिरा हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश आतंकवाद के कारण बुरी तरह पीड़ित है। इसलिए प्रदेश को विशेष दर्जा देना अनिवार्य हो जाता है।
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नजरअंदाज करने से आक्रोशित हुआ कश्मीरी पंडित समुदाय
बोले-सरकार उन राजनीतिक दलों से बात कर रही, जो कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का कारण
जम्मू। दिल्ली में सर्वदलीय बैठक में कश्मीरी पंडित समुदाय को नजरअंदाज करने और कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के कारण बनने वाले राजनीतिक दलों से केंद्र सरकार द्वारा बातचीत करने पर समुदाय के लोगों ने रोष जताया। वीरवार को यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (वाईएआईकेएस) के बैनर तले समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की वास्तविक पीड़ा को राजनीतिक दल नहीं समझते। अगर ऐसा होता तो 32 साल बाद कश्मीरी पंडित विस्थापित नहीं रहते। वाईएआईकेएस के अध्यक्ष आरके भट्ट ने कहा कि कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दल कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं। कश्मीरी पंडित अपनी बात खुद रखने में सक्षम हैं और सरकार को हमें भी सर्वदलीय बैठक का हिस्सा बनाना चाहिए था। नरेंद्र मोदी सरकार भी अन्य पार्टियों की राह पर चल रही है। आज वह उन कश्मीर केंद्रित राजनीति दलों से बातचीत कर रही है जो पाकिस्तान, अलगाववाद और आतंकवाद का समर्थन करते हैं और कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का बड़ा कारण भी हैं। यह राजनीतिक दल कभी नहीं चाहते कि कश्मीरी पंडितों की घर वापसी हो। किसी भी पार्टी ने हमारा पक्ष नहीं रखा।
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महबूबा मुफ्ती को तिहाड़ जेल में बंद करने की मांग
जम्मू। सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान से बातचीत का मुद्दा उठाए जाने की वकालत से नाराज डोगरा फ्रंट शिवसेना ने महबूबा मुफ्ती के खिलाफ नारेबाजी की और महबूबा को तिहाड़ में डालने की मांग की।
फ्रंट ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने कभी देश हित में बात नहीं की। वह हमेशा से ही पाकिस्तान के समर्थन में रही हैं और उनका गुणगान किया है। वह हमेशा से पाकिस्तान की हितैषी रही हैं, जिसको किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। पीएम के साथ बैठक में उनको शामिल नहीं करना चाहिए था। फ्रंट के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को हितधारक बताया है, जिसे लेकर उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे नेताओं की कोई जगह नहीं है। इनकी जगह जेल में है। जो कोई भी पाकिस्तान के समर्थन में बात करता है, उस पर देशद्रोह का केस चलना चाहिए। इससे पहले महबूबा के पाकिस्तान से बात करने वाले बयान को लेकर बुधवार को भी फ्रंट भी प्रदर्शन कर चुकी है।
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सर्वदलीय बैठक के खिलाफ इकजुट जम्मू का प्रदर्शन
कार्यकर्ताओं ने जम्मू को अलग राज्य बनाने की उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दिल्ली में पीएम मोदी के साथ हुई जम्मू-कश्मीर के नेताओं की सर्वदलीय बैठक का इकजुट जम्मू के कार्यकर्ताओं ने जम्मू संभाग के सभी 10 जिलों में विरोध किया। प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन कर जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग उठाई। पार्टी अध्यक्ष अंकुर शर्मा ने कहा कि बैठक में जम्मू संभाग को एक बार फिर नजरअंदाज किया गया। यह डोगरों और हिंदुओं के साथ अन्याय है, जो बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील राजनीतिक मामलों से निपटने में केंद्र सरकार के नेहरू वादी दृष्टिकोण की भी आलोचना की। आरोप लगाया कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के भविष्य पर मुख्यधारा के राजनीतिक अभिनेताओं के रूप में कश्मीर के इस्लामवादियों के साथ विशेष रूप से बातचीत की। प्रदर्शन के दौरान सर्वसम्मति से जम्मू को अलग राज्य के लिए अभियान तेज करने का प्रस्ताव पारित किया गया। मौके पर महासचिव अश्विनी शर्मा, किरण कुमार, अजय सैनी, हरीश कपूर, वीर विक्रम भी शामिल थे।
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जम्मू-कश्मीर को मिले पूर्ण राज्य का दर्जा
जम्मू। रिकॉन्सिलिएशन रिटर्न एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ माइग्रेंट्स के चेयरमैन सतीश महलदार ने कहा कि दिल्ली में हो रही सर्वदलीय बैठक केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक विश्वास बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य का दर्जा खोने से प्रदेश के लोगों में शिकायत थी। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। जम्मू-कश्मीर दो शत्रु देशों पाकिस्तान और चीन से घिरा हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश आतंकवाद के कारण बुरी तरह पीड़ित है। इसलिए प्रदेश को विशेष दर्जा देना अनिवार्य हो जाता है।