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लंबित मांगों के समर्थन में मुख्य अभियंता कार्यालय का घेराव
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जम्मू। आल जेएंडके पीएचई आईटीटाई ट्रेंड, सीपी वर्कर एंड लैंड डोनर एसोसिएशन के आह्वान पर शुरू हुई 72 घंटे की कामछोड़ हड़ताल को शनिवार को तीसरे दिन 48 घंटे के लिए बढ़ा दिया है। वहीं, लंबित मांगें पूरी नहीं होने पर आक्रोशित कर्मचारियों ने वीसी रोड स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से मांगों की अनदेखी हो रही है। 72 घंटे बाद भी कर्मचारी हित में कोई फैसला नहीं लिया गया है। नाखुश कर्मचारियों ने मांगे हल न होने पर अब हड़ताल को बढ़ा दिया है। वहीं, जल्द उचित कदम नहीं उठाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
एसोसिएशन के पदाधिकारी दीपक गुप्ता, भानू संबयाल और सरदार देवेंद्र पाल ने कहा कि मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। मांगों को हल करने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं होता है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा।
प्रदेशभर में 22 हजार के करीब अस्थाई कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कामकाज ठप रहने के कारण पानी की आपूर्ति तीसरे दिन भी नियमित कर्मचारियों के हवाले रही। कर्मचारी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। महज 225 रुपये प्रति दिन दिहाड़ी दी जा रही है, जिससे परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है। बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। लंबित वेतनमान की अदायगी नहीं हो पाई है। न्यूनतम वेतन मांग लागू किया जाए। सैकड़ों कर्मचारी बीते 25 सालों से काम कर रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्त आयु नजदीक आ चुकी है, लेकिन दिहाड़ी नहीं बढ़ रही।
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यह हैं मांगें
- सभी अस्थायी कर्मियों को नियमित किया जाए
- न्यूनतम वेतन एक्ट लागू किया जाए
- लंबित मानदेय की अदायगी की जाए
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एसोसिएशन के पदाधिकारी दीपक गुप्ता, भानू संबयाल और सरदार देवेंद्र पाल ने कहा कि मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। मांगों को हल करने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं होता है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा।
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प्रदेशभर में 22 हजार के करीब अस्थाई कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कामकाज ठप रहने के कारण पानी की आपूर्ति तीसरे दिन भी नियमित कर्मचारियों के हवाले रही। कर्मचारी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। महज 225 रुपये प्रति दिन दिहाड़ी दी जा रही है, जिससे परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है। बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। लंबित वेतनमान की अदायगी नहीं हो पाई है। न्यूनतम वेतन मांग लागू किया जाए। सैकड़ों कर्मचारी बीते 25 सालों से काम कर रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्त आयु नजदीक आ चुकी है, लेकिन दिहाड़ी नहीं बढ़ रही।
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यह हैं मांगें
- सभी अस्थायी कर्मियों को नियमित किया जाए
- न्यूनतम वेतन एक्ट लागू किया जाए
- लंबित मानदेय की अदायगी की जाए