याकूब की फांसी के विरोध में घाटी में प्रदर्शन
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श्रीनगर की प्रेस इंक्लेव में शुक्रवार को हुर्रियत कांफ्रें स ने प्रदर्शन किया। उन्होंने यह प्रदर्शन मुंबई सीरियल ब्लास्ट दोषी याकूब मेमन की फांसी के विरोध में किया। इस दौरान उन्होंने यह मांग की कि जितने भी कश्मीरी कैदी कश्मीर में या फिर बाहरी राज्यों की अन्य जेलों में कैद हैं उन्हें जल्द रिहा किया जाए।
प्रदर्शन में हुर्रियत के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी भाग लिया जिनमें मुसद्दिकआदिल, शाहिद-उल-इस्लाम, जावेद अहमद मीर, इंजीनियर हिलाल अहमद वार, जीएन जकी, अब्दुल रशीद उनटू, बुरहान रब्बानी, आदि शामिल रहे।
इसके अलावा उन्होंने मकबूल भट और अफजल गुरु के पार्थिव शरीर को लौटाने की भी मांग की जिन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने के बाद वहां दफनाया गया है।
इस प्रदर्शन के दौरान उन्होंने जमकर भारत विरोधी नारेबाजी की और आजादी के हक में नारे लगाए। उनके द्वारा एक प्रदर्शन मार्च निकालने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस द्वारा उन्हें प्रेस इंक्लेव से बाहर निकलने ही नहीं दिया और उन पर बल का प्रयोग किया।
पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई नेताओं को भी हिरासत में लिया जिनमें शाहिद-उल-इस्लाम, जावेद अहमद मीर, इंजीनियर हिलाल वार के अलावा अन्य कई कार्यकर्ता शामिल थे।
आसिया अंद्राबी की अगुवाई में प्रदर्शन रैली निकाली गई
महिला अलगाववादी गुट दुख्तरान -ए-मिल्लत (डीईएम) द्वारा भी अध्यक्ष आसिया अंद्राबी की अगुवाई में श्रीनगर के पुराने शहर नौहट्टा में एक प्रदर्शन रैली निकाली गई। इस दौरान डीईएम कार्यकर्ताओं ने हाथों में जेकेएलएफ संस्थापक मकबूल भट और पार्लियामेंट हमले के दोषी अफजल गुरु के पोस्टर उठाए हुए थे।
उन्होंने याकूब मेमन की फांसी के विरोध के साथ साथ मकबूल भट और अफजल गुरु के पार्थिव शरीर लौटाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान आसिया अंद्राबी ने कहा कि हिंदुत्व राष्ट्र में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं। चाहे वे कश्मीरी हों या फिर भारत के अन्य किसी अन्य राज्य से हों।
इसके अलावा उम्मत-ए-इस्लामी के अध्यक्ष मीरवाइज यासिर की अगुवाई में भी अनंतनाग जिले में एक प्रदर्शन रैली निकाली गई। रैली जामिया मस्जिद अनंतनाग से शुरू हुई और जब वह लाल चौक की ओर बढे़ तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद वह शेर बाग इलाके की ओर बढे़ जहां रैली संपन्न हुई।
गौरतलब है कि याकूब मेमन की फांसी के विरोध में वीरवार को श्रीनगर के लोअर कोर्ट में भी कु छ वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया था।