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Jammu News: हिंदी साहित्य में सामाजिक-पर्यावरण पर हुई चर्चा
स्वतंत्रता के बाद के हिंदी साहित्य में सामाजिक-पर्यावरण पर हुई चर्चा
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर की स्वतंत्रता के बाद के हिंदी साहित्य में सामाजिक-पर्यावरण पर दो दिवसीय हिंदी सम्मेलन का आगाज वीरवार को हुआ। जम्मू और कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी की ओर से इसका आयोजन किया गया है। पद्मश्री प्रो. विश्व मूर्ति शास्त्री, पद्मश्री डॉ. जितेंद्र उधमपुरी, डॉ. निर्मल विनोद और अकादमी के सचिव भारत सिंह ने सम्मेलन का शुभारंभ किया।
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इस दौरान सचिव भरत सिंह ने कहा कि कवि समाज का चेहरा होते हैं। वे अपनी कविताओं से सामाजिक ताने-बाने के आंतरिक विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। डॉ. निर्मल विनोद ने स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर के हिंदी साहित्य में सामाजिक-पर्यावरण पर अपनी बात रखी। पद्मश्री प्रो. विश्व मूर्ति शास्त्री ने कहा कि इस तरह के सम्मेलन हिंदी भाषा के प्रचार और विकास में मदद करते हैं। उन्होंने लेखकों को अपने साहित्य के माध्यम से नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. सपना देवी ने स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर के हिंदी बाल साहित्य में सामाजिक-पर्यावरण पर पेपर पढ़ा। डॉ. राजकुमार ने हिंदी लघु कथाएं पर पेपर पढ़ा। लघुकथा सत्र में कल्पना जसरोटिया, हरदीप सिंह दीप, वीना धर, सतीश कुमार शर्मा, नरेश कुमार उदास, महाराज कृष्ण संतोषी और डॉ. आदर्श प्रकाश ने अपनी कहानियां प्रस्तुत कीं। लघुकथा सत्र के बाद संगीत कार्यक्रम हुआ। इसमें विशाखा भारद्वाज, पंकज प्रधान सहित अन्य ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ब्यूरो
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