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एक साल में जेकेआरटीसी का 12 करोड़ राजस्व घटा
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जम्मू। कोरोना ने ट्रांसपोर्ट क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (जेकेआरटीसी) भी इससे अछूता नहीं है। जेेकेआरटीसी के राजस्व में एक वर्ष में 12 करोड़ रुपये की कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में जेकेआरटीसी ने कुल 87 करोड़ का राजस्व जुटाया था। जबकि 2020-21 में 75.3 करोड़ का राजस्व ही मिल पाया।
एक वर्ष में राजस्व में 12 करोड़ की कमी का एक सबसे बड़ा कारण अंतरराज्यीय बस सेवा का डेढ़ वर्ष से अधिक समय से बंद होना भी है। मार्च 2020 से अंतरराज्यीय बस सेवा बंद है, जो आरटीसी के राजस्व का बड़ा हिस्सा है। कोविड के कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर काफी प्रभावित हुआ है। जेकेआरटीसी के सिटी और अंतर जिला रूट्स पर भी बसों के परिचालन में कमी है। सार्वजनिक परिवहन शुरू होने के बाद भी आरटीसी के बसें यात्रियों की कमी का हवाला देते हुए कम चलाई जा रही हैं। जेकेआरटीसी पिछले कुछ वर्षों से लगातार घाटे में चल रही है। इस कारण कर्मचारियों को वेतन भी समय पर नहीं मिल रहा है।
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सरकारी बसों में सुविधाओं की कमी
जेेकेआरटीसी प्रदेश में सबसे बड़ी सार्वजनिक वाहन प्रणाली है, लेकिन सुविधाएं देने में काफी पीछे है। आरटीसी के पास ई-टिकट की सुविधा नहीं है। बसों में न किराया सूची होती है, न ही रूट चार्ट। कटड़ा को छोड़ दें तो अन्य जिले के लिए आरटीसी की बसों में यात्रियों की संख्या काफी कम होती है, इसका सबसे बड़ा कारण असुविधाओं का बोलबाला होना है।
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एक वर्ष में राजस्व में 12 करोड़ की कमी का एक सबसे बड़ा कारण अंतरराज्यीय बस सेवा का डेढ़ वर्ष से अधिक समय से बंद होना भी है। मार्च 2020 से अंतरराज्यीय बस सेवा बंद है, जो आरटीसी के राजस्व का बड़ा हिस्सा है। कोविड के कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर काफी प्रभावित हुआ है। जेकेआरटीसी के सिटी और अंतर जिला रूट्स पर भी बसों के परिचालन में कमी है। सार्वजनिक परिवहन शुरू होने के बाद भी आरटीसी के बसें यात्रियों की कमी का हवाला देते हुए कम चलाई जा रही हैं। जेकेआरटीसी पिछले कुछ वर्षों से लगातार घाटे में चल रही है। इस कारण कर्मचारियों को वेतन भी समय पर नहीं मिल रहा है।
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सरकारी बसों में सुविधाओं की कमी
जेेकेआरटीसी प्रदेश में सबसे बड़ी सार्वजनिक वाहन प्रणाली है, लेकिन सुविधाएं देने में काफी पीछे है। आरटीसी के पास ई-टिकट की सुविधा नहीं है। बसों में न किराया सूची होती है, न ही रूट चार्ट। कटड़ा को छोड़ दें तो अन्य जिले के लिए आरटीसी की बसों में यात्रियों की संख्या काफी कम होती है, इसका सबसे बड़ा कारण असुविधाओं का बोलबाला होना है।
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