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कोरोना का असर: दान पात्र खाली और पुजारियों की हालत खराब, ये हाल है मंदिरों के शहर का

Mon, 31 May 2021 01:43 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Mon, 31 May 2021 01:43 AM IST
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Temples are facing financial crisis for second consecutive year due to Corona infection
रघुनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला

कोरोना संक्रमण के कारण लगातार दूसरे साल भी मंदिरों को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। मंदिर बंद तो नहीं हैं, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण श्रद्धालु नहीं पहुंच रहे। इससे सन्नाटा पसरा हुआ है। साथ ही दान पात्र खाली पड़े हैं। अप्रैल और मई में हिंदू धर्म के कई बड़े पर्व होने के बावजूद मंदिरों के दानपात्र खाली पड़े हैं, जिसका असर पुजारियों और मंदिरों में काम करने वालों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। पिछले साल की तरह इस वर्ष भी मंदिरों की आय नहीं हुई है, जिससे इनकी व्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। पुजारियों के साथ प्रसाद और पूजा सामग्री बचेने वालों के सामने भी आर्थिक संकट गहरा गया है।



धार्मिक स्थल भी कोविड की मार से अछूते नहीं रहे हैं। मंदिरों में भक्तों के नहीं पहुंचने का असर मंदिर की आय पर पड़ा है। पुजारी, सफाई कर्मी सहित अन्य लोग, जिनकी आजीविका मंदिर पर निर्भर है, वे काफी प्रभावित हुए हैं। भगवान की कृपा से दो वक्त का खाना मिल रहा है, लेकिन स्थिति काफी चिंताजनक है। -दवारिका नाथ जोगी, महंत, आप शंभू मंदिर, रूपनगर जम्मू

Temples are facing financial crisis for second consecutive year due to Corona infection
बावे वाली माता मंदिर - फोटो : अमर उजाला

कोरोना महामारी में भी सरकार ने धार्मिक स्थलों को बंद नहीं किया, जिसका स्वागत करते हैं। मंदिर की आय में कमी जरूर आई है, लेकिन मां की कृपा से मंदिर कर्मचारियों का वेतन देने में सक्षम रहे हैं। मंदिर खुले रहने से कुछ लोग तो पूजा-अर्चना करने पहुंच रहे हैं, जो थोड़ी राहत की बात है। मंदिर में 30 के करीब कर्मचारी है, जिनका वेतन मंदिर में चढ़ावे पर निर्भर होता है, लेकिन मंदिर को दान नहीं मिल पा रहा तो कर्मचरियों को वेतन देना चुनौती बना है। -बिट्टा पुजारी, महंत, बावे वाली माता मंदिर


 
Temples are facing financial crisis for second consecutive year due to Corona infection
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

कोरोना की दूसरी लहर से हर वर्ग प्रभावित हुआ है, जिसमें मंदिर प्रबंधक और पुजारी भी हैं। मंदिर के रखरखाव पर काफी खर्च होता है। नियमित पूजा- अर्चना और मंदिर स्टाफ के वेतन पर प्रतिदिन हजारों रुपये खर्च होते हैं। यह सारा खर्च मंदिर को मिलने वाले दान से चल पाता था, लेकिन मंदिर में भक्त न पहुंचने से चढ़ावा नहीं चढ़ पा रहा है, तो खर्च कैसे चलेगा। कोरोना कर्फ्य के कारण शादी सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी बंद है, जिससे पुजारियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। सरकार को पंडितों को भी आर्थिक मदद देनी चाहिए। - संजय गुप्ता, प्रबंधक, सर्वशक्ति चंडी माता मंदिर, पक्का डंगा

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Temples are facing financial crisis for second consecutive year due to Corona infection
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

कोरोना कर्फ्यू के कारण धार्मिक कार्यक्रम बंद हैं। ऐसे में पंडितों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई राज्य सरकारों ने पंडितों को आर्थिक मदद दी है, ऐसे में जम्मू-कश्मीर प्रशासन को भी कोई फैसला लेना चाहिए। सांबा, उधमपुर, कठुआ सहित अन्य जिलों से पंडित जम्मू में परिवार के साथ किराये के कमरों में रह रहे हैं। कोरोना के कारण धार्मिक कार्य ठप हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। -महंत रोहित शास्त्री, प्रधान, श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट, जम्मू

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