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बारिश न होने से शुरू नहीं हो पाई धान की रोपाई
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जम्मू। प्रदेश में बारिश न होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं। इस कारण धान की पौध लगाने के लिए काम शुरू नहीं हो पा रहा है। कुछ जगहों में कुलहों के माध्यम से खेतों में पानी पहुंचाकर पौध लगाई जा रही है।
मैदानी इलाके जम्मू, सांबा और कठुआ में बारिश का इंतजार हो रहा है। कुछ जगहों में तो कुलहों की सुविधा है मगर कुछ इलाकों में लोग बारिश पर ही आश्रित हैं। पहाड़ी इलाकों में भी हाल कुछ ऐसा ही है। कृषि विभाग के अनुसार 60 एमएम बारिश की जरूरत है। इससे खेत पानी से तर हो जाएंगे और किसान पौध लगा सकेंगे।
इससे पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी। बारिश न होने पर पांच से दस फीसदी पैदावार में गिरावट आ सकती है। इस समय ज्यादा बारिश की जरूरत है। मौजूदा समय में पांच एमएम बारिश हुई है। इस कारण खेतों में पानी नहीं रुक पाया है। सबसे ज्यादा परेशानी पहाड़ों में स्थित खेतों में आ रही है। यहां पर फसल की पैदावार बारिश पर ही निर्भर करती है। किसान भी बारिश न होने के कारण मायूस है। आगामी दिनों में बारिश हो जाती है तो धान की पौध लगाने का काम तेज हो जाएगा। मुख्य कृषि अधिकारी फारूक ने बताया कि बारिश की जरूरत है। बारिश उम्मीद से कम है। इस कारण पौध लगाने का काम रुक गया है।
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मैदानी इलाके जम्मू, सांबा और कठुआ में बारिश का इंतजार हो रहा है। कुछ जगहों में तो कुलहों की सुविधा है मगर कुछ इलाकों में लोग बारिश पर ही आश्रित हैं। पहाड़ी इलाकों में भी हाल कुछ ऐसा ही है। कृषि विभाग के अनुसार 60 एमएम बारिश की जरूरत है। इससे खेत पानी से तर हो जाएंगे और किसान पौध लगा सकेंगे।
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इससे पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी। बारिश न होने पर पांच से दस फीसदी पैदावार में गिरावट आ सकती है। इस समय ज्यादा बारिश की जरूरत है। मौजूदा समय में पांच एमएम बारिश हुई है। इस कारण खेतों में पानी नहीं रुक पाया है। सबसे ज्यादा परेशानी पहाड़ों में स्थित खेतों में आ रही है। यहां पर फसल की पैदावार बारिश पर ही निर्भर करती है। किसान भी बारिश न होने के कारण मायूस है। आगामी दिनों में बारिश हो जाती है तो धान की पौध लगाने का काम तेज हो जाएगा। मुख्य कृषि अधिकारी फारूक ने बताया कि बारिश की जरूरत है। बारिश उम्मीद से कम है। इस कारण पौध लगाने का काम रुक गया है।
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