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निक्षय पोषण योजना में मरीजों को वित्तीय मदद की दरकार
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जम्मू। टीबी से जूझ रहे सैकड़ों मरीजों को निक्षय पोषण योजना में वित्तीय मदद की दरकार है। इस योजना के तहत प्रत्येक पंजीकृत (निजी व सरकारी) मरीज को प्रति माह 500 रुपये की वित्तीय मदद मुहैया करवाई जाती है। लेकिन गत मार्च से जम्मू संभाग में बड़ी संख्या में मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पाई है। इनमें कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और इसी वित्तीय मदद पर पोषण के लिए निर्भर होते हैं।
जम्मू संभाग के दस जिलों में 8500 टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों को प्रतिमाह निक्षय योजना के तहत वित्तीय मदद मुहैया करवाई जाती है। लेकिन कोविड की दूसरी लहर में सैकड़ों मरीज इससे वंचित रहे हैं। इससे खासतौर पर दूरदराज के मरीजों को राहत मिलती थी। लेकिन अब उन्हें अपनी जेब से ही राशि खर्च करनी पड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। जबकि दुनिया में वर्ष 2030 तक टीबी को खत्म करने पर काम किया जा रहा है। भारत में हर साल लाखों नए टीबी के मरीज सामने आ रहे हैं। हालांकि, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और जागरूकता के कारण टीबी मामलों में गिरावट आ रही है। वर्ष 2020 में जिला जम्मू और सांबा में संयुक्त रूप से पिछले साल की तुलना में कम मामले आए।
इस साल 5705 नए मरीज मिले
इस साल प्रदेश में 5705 नए टीबी के मामले सामने आए। चालू वित्त वर्ष में जम्मू-कश्मीर में अनुमानित 14000 संक्रमित मामलों की तलाश करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए टेस्टिंग को बढ़ाया गया है। माइक्रो बैक्टीरिया मानव को टीबी से ग्रस्त करता है। एक टीबी से पीड़ित आसपास के दस लोगों को संक्रमण दे सकता है। स्टेट ट्यूबरक्लोसिस अधिकारी डॉ. सुमन गुप्ता ने बताया कि टीबी मरीजों को निक्षय योजना के तहत वित्तीय मदद मुहैया करवाई जा रही है, लेकिन कुछ मरीजों को पीछे से राशि जारी न होने से यह वित्तीय मदद लंबित है।
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जम्मू संभाग के दस जिलों में 8500 टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों को प्रतिमाह निक्षय योजना के तहत वित्तीय मदद मुहैया करवाई जाती है। लेकिन कोविड की दूसरी लहर में सैकड़ों मरीज इससे वंचित रहे हैं। इससे खासतौर पर दूरदराज के मरीजों को राहत मिलती थी। लेकिन अब उन्हें अपनी जेब से ही राशि खर्च करनी पड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। जबकि दुनिया में वर्ष 2030 तक टीबी को खत्म करने पर काम किया जा रहा है। भारत में हर साल लाखों नए टीबी के मरीज सामने आ रहे हैं। हालांकि, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और जागरूकता के कारण टीबी मामलों में गिरावट आ रही है। वर्ष 2020 में जिला जम्मू और सांबा में संयुक्त रूप से पिछले साल की तुलना में कम मामले आए।
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इस साल 5705 नए मरीज मिले
इस साल प्रदेश में 5705 नए टीबी के मामले सामने आए। चालू वित्त वर्ष में जम्मू-कश्मीर में अनुमानित 14000 संक्रमित मामलों की तलाश करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए टेस्टिंग को बढ़ाया गया है। माइक्रो बैक्टीरिया मानव को टीबी से ग्रस्त करता है। एक टीबी से पीड़ित आसपास के दस लोगों को संक्रमण दे सकता है। स्टेट ट्यूबरक्लोसिस अधिकारी डॉ. सुमन गुप्ता ने बताया कि टीबी मरीजों को निक्षय योजना के तहत वित्तीय मदद मुहैया करवाई जा रही है, लेकिन कुछ मरीजों को पीछे से राशि जारी न होने से यह वित्तीय मदद लंबित है।
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