माइन फ्री एरिया में कहां से आई बारूदी सुरंग
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राजोरी की नौशेरा तहसील के एलओसी के पास बसे गांव
डीसी ने एसडीएम और एसडीपीओ को विस्फोट के पीछे के कारणों का पता लगाने व विस्फोटक पदार्थ के बारे में जानकारी प्राप्त करने के निर्देश जारी किए हैं। दोनों अधिकारियों को एक हफ्ते के भीतर मामले की पूरी जांच कर रिपोर्ट पेश करनी है। इस संबंध में एसएसपी डा. हसीब मुगल ने बताया कि नौशेरा पुलिस अपने स्तर पर भी मामले की जांच कर रही है।
विस्फोट वाले स्थान से कुछ खास सबूत नहीं मिल पाने से विस्फोटक पदार्थ के बारे में पता लगाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। उस क्षेत्र को माइन फ्री करार दे दिया गया था, लेकिन विस्फोट के बाद दावे खोखले साबित हुए हैं।
वर्ष 1999 में बिछाई गई थी बारूदी सुरंगें
एएसपी नौशेरा के अनुसार, सेना द्वारा बारूदी सुरंगें तो बिछा दी गई थी, लेकिन सुरंगें बिछाने वाले स्थानों की सही प्रकार से निशानदेही नहीं की गई थी। यही कारण है कि वहां कई बार विस्फोट होते रहते हैं और बेकसूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोने पड़ते हैं। वहीं शनिवार की देर रात सेना ने विस्फोट वाले स्थान से दो और विस्फोटक पदार्थ बरामद किए हैं।
बताया जा रहा है कि सेना के बम निरोधक दस्ते ने उसी स्थान से तलाशी के दौरान दो और विस्फोटक पदार्थ बरामद कर जांच के लिए भेज दिए हैं। अभी तक बरामद किए गए विस्फोटक पदार्थों के बारे में कोई और जानकारी नहीं मिल पाई है। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान नौशेरा और सुंदरबनी के नियंत्रण रेखा के आस पास भारी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछाई गई थीं।
उसके बाद अब तक पिछले करीब 15 सालों में इन क्षेत्रों में विस्फोट में कई लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं और कई अन्य अपाहिज हो चुके हैं। इसके अलावा काफी पशु भी मारे जा चुके हैं।