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जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को वापस भेजने की तैयारी

Wed, 03 Mar 2021 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 03 Mar 2021 05:42 AM IST
सार

  • गृह मंत्रालय के निर्देश पर जुटाया जा रहा ब्योरा, सभी जिलों में हो रहा सत्यापन
  • जो लोग म्यांमार नहीं जा सकेंगे उनके लिए डिटेंशन सेंटर बनाने की कवायद तेज

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Preparations to return Rohingyas living illegally in Jammu and Kashmir
Rohingya

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे करीब दस हजार रोहिंग्याओं को वापस म्यांमार भेजने की तैयारी शुरू हो गई है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर यहां रहने वाले रोहिंग्याओं का ब्योरा जुटाया जा रहा है। सभी जिलों में इनका सत्यापन हो रहा है। ऐसे सभी रोहिंग्याओं को विभिन्न स्थानों से हटाकर वापस भेजने या फिर आबादी से दूर डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा। प्रदेश में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की कवायद शुरू भी हो चुकी है।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 6523 रोहिंग्या रहते हैं। इनमें 6461 जम्मू संभाग और 62 कश्मीर में हैं। लद्दाख में भी ये अस्थायी आशियाने बनाकर रह रहे हैं। हालांकि, यह माना जा रहा है कि 13600 विदेशी नागरिक जिसमें रोहिंग्या और बांग्लादेशी शामिल हैं, यहां रहते हैं।
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जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों जम्मू, सांबा, डोडा, पुंछ व अनंतनाग में अस्थायी ठिकाने बनाकर रह रहे हैं। जम्मू जिले में ही रोहिंग्याओं ने 30 स्थानों पर ठिकाने बना रखे हैं। मार्च 2017 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इनका डाटा बेस तैयार करने को कहा था। अब नए सिरे से इन्हें चिह्नित किया जा रहा है। 
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सूत्रों ने बताया कि पहला रोहिंग्या जम्मू में वर्ष 1994 में आकर बसा था। 2008 से 2016 के बीच इनकी संख्या तेजी के साथ बढ़ी। जम्मू में रहने वाले रोहिंग्याओं को वापस भेजने के लिए समय-समय पर भाजपा, हिंदुवादी संगठनों, पैंथर्स पार्टी, चैंबर ऑफ कामर्स समेत अन्य संगठन मांग कर चुके हैं। 

अवैध दस्तावेज भी बरामद हो चुके 
जम्मू-कश्मीर में रहने वाले रोहिंग्याओं के पास स्टेट सब्जेक्ट, वोटर आईकार्ड, राशन कार्ड व आधार कार्ड भी मिल चुके हैं। कई रोहिंग्या तो बिजली बिल भी चुकाते हैं। 2017 में एक रोहिंग्या के पास से स्टेट सब्जेक्ट, आधार कार्ड मिलने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया था। इस परिवार के सात सदस्यों के नाम भी राशन कार्ड पर दर्ज थे। परिवार के एक सदस्य के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी था।

रोहिंग्याओं पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं। इनके पाकिस्तान की आईएसआई, आतंकी संगठन आईएस तथा कट्टर अलगाववादी संगठनों से गठजोड़ की भी आशंका जताई जाती रही है। 2015 में कश्मीर में मुठभेड़ में छोटा बर्मी नामक रोहिंग्या मारा गया था। मारे जा चुके आतंकी जाकिर मूसा और अलगाववादियों की ओर से भी रोहिंग्याओं के प्रति समर्थन जारी किया जा चुका है। 

सैन्य प्रतिष्ठानों के आस-पास भी बस्तियां
सैन्य प्रतिष्ठानों के आस पास के इलाकों में भी रोहिंग्याओं की बस्तियां हैं। सुंजवां में सैन्य प्रतिष्ठान से कुछ दूरी पर 48 रोहिंग्या परिवारों के 206 लोग, जबकि नगरोटा में 16 कोर मुख्यालय के  इलाके में करीब 250 रोहिंग्या रहते हैं। छन्नी हिम्मत इलाके में रोहिंग्याओं के 150 परिवारों ने अस्थायी ठिकाने बने रखे हैं। 


संसद में रोहिंग्याओं को हटाने का फैसला किया जा चुका है। सरकार सैद्धांतिक तौर पर इन्हें वापस भेजने का फैसला कर चुकी है। व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। 
- डॉ. जितेंद्र सिंह-केंद्रीय मंत्री

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