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कश्मीर में पावर ट्रांसमिशन क्षमता में होगी 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी, ठंड में बिजली की नहीं होगी किल्लत
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Updated Thu, 18 Oct 2018 11:45 PM IST
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Sterlite Power
- फोटो : अमर उजाला
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घाटी में सर्दियों के महीनों में बिजली की किल्लत से लोगों को राहत मिलेगी। स्टरलाइट कंपनी ने 414 किलोमीटर लंबी एनआरएसएस परियोजना को शुरू कर दिया है। स्टरलाइट पावर के सीईओ वेद मणि तिवारी ने कहा कि 414 किलोमीटर लंबी नॉर्दन रीजन स्ट्रेंग्थेनिंग स्कीम (एनआरएसएस) के शुरू होने से कश्मीर के लिए पावर ट्रांसमिशन क्षमता में 70 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी।
वेद मणि तिवारी ने बताया कि घाटी में समस्या यह है कि घाटी को उत्तरी ग्रिड से जोड़े रखने के लिए केवल एक ही पावर ट्रांसमिशन लाइन है। अब इस परियोजना के शुरू होने से आपके पास दो लाइन हो गयी हैं और इसके साथ ही 70 प्रतिशत अधिक बिजली घाटी में लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस लाइन का काम निर्धारित समय से दो महीने पहले पहले ही पूरा कर लिया गया है।
इस बार सर्दियों के मौसम के दौरान इसका लाभ उठाया जा सके। तिवारी ने कहा कि 3000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 4 अगस्त 2014 को हुई थी और इस वर्ष 8 अगस्त को इसका काम पूरा हो गया। उन्होंने बताया कि यह काफी चुनौती भरा प्रोजेक्ट था।
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तिवारी ने बताया कि ऊंचाई वाले बर्फीले और दुर्लभ पहाड़ी इलाकों की चुनौतियों से निपटने के लिए पीर पंजाल रेंज में कंपनी ने हेली क्रेंस का इस्तेमाल किया गया और ऐसा साउथ एशिया में पहली बार हुआ है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए अमरीकी कनसलटेशन कंपनी को सलाह के लिए हायर किया गया था। इस लाइन को केंद्र सरकार की एक टीम द्वारा निरीक्षण के बाद कमीशन किया गया। लाइन द्वारा 21 अगस्त को ट्रांसमिशन शुरू किया गया और 300 मेगावाट बिजली ट्रांसमिट की गयी। तिवारी ने बताया कि 441 किलोमीटर लंबी इस ट्रांसमिशन लाइन में करीब 1200 टावर लगाए गए हैं और सबसे ऊंचा टावर करीब 13000 फीट ऊंचाई पर स्थित है।
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वेद मणि तिवारी ने बताया कि घाटी में समस्या यह है कि घाटी को उत्तरी ग्रिड से जोड़े रखने के लिए केवल एक ही पावर ट्रांसमिशन लाइन है। अब इस परियोजना के शुरू होने से आपके पास दो लाइन हो गयी हैं और इसके साथ ही 70 प्रतिशत अधिक बिजली घाटी में लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस लाइन का काम निर्धारित समय से दो महीने पहले पहले ही पूरा कर लिया गया है।
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इस बार सर्दियों के मौसम के दौरान इसका लाभ उठाया जा सके। तिवारी ने कहा कि 3000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 4 अगस्त 2014 को हुई थी और इस वर्ष 8 अगस्त को इसका काम पूरा हो गया। उन्होंने बताया कि यह काफी चुनौती भरा प्रोजेक्ट था।
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तिवारी ने बताया कि ऊंचाई वाले बर्फीले और दुर्लभ पहाड़ी इलाकों की चुनौतियों से निपटने के लिए पीर पंजाल रेंज में कंपनी ने हेली क्रेंस का इस्तेमाल किया गया और ऐसा साउथ एशिया में पहली बार हुआ है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए अमरीकी कनसलटेशन कंपनी को सलाह के लिए हायर किया गया था। इस लाइन को केंद्र सरकार की एक टीम द्वारा निरीक्षण के बाद कमीशन किया गया। लाइन द्वारा 21 अगस्त को ट्रांसमिशन शुरू किया गया और 300 मेगावाट बिजली ट्रांसमिट की गयी। तिवारी ने बताया कि 441 किलोमीटर लंबी इस ट्रांसमिशन लाइन में करीब 1200 टावर लगाए गए हैं और सबसे ऊंचा टावर करीब 13000 फीट ऊंचाई पर स्थित है।
सर्दियों के महीने के दौरान इस लाइन का पैदा निरीक्षण करना
Sterlite Power
- फोटो : अमर उजाला
स्टरलाइट पावर के सीओओ संजय जोहरी ने बताया कि सर्दियों के 6 मेहीने के दौरान इस लाइन का निरिक्षण संभव नहीं। इसलिए कंपनी ने एक निजी हेलीकाप्टर कंपनी के साथ हाथ मिलाया है और हर महीने कम से कम दो बार हवाई निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में कंपनी स्नो मोबिल अपनी टेक्निकल टीम को मुहैया करवाएगी। साथ ही हिमस्खलन से बचने के लिए सर्दियों से पहले टावरों के सामने अवलांच प्रोटेक्शन भी बनाए जाएंगे।