Poonch Terror Attack: हमलावरों के पनाहगार नासिर पर पुलिस की वर्षों से नजर, फिर भी खतरनाक मंसूबों से रहे बेखबर
डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि नासिर नाम के शख्स के घर पर आतंकी दो महीने तक रहे। नासिर और उसका परिवार आतंकियों को सीमा पार से ड्रोन के जरिए आने वाले हथियार, गोला बारूद, नकदी और अन्य सामान पहुंचाते रहे।
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पुंछ में सैन्य वाहन पर हमला जम्मू-कश्मीर पुलिस की बड़ी नाकामी है। जिस शख्स ने हमले में शामिल आतंकियों को महीनों अपने घर पर पनाह दी, उस पर पुलिस की वर्षों से नजर थी। वह पुलिस की उस सूची में भी शामिल था, जो पूर्व आतंकी हैं। इसके बावजूद उक्त शख्स के घर पर आतंकियों के पनाह लेने की भनक पुलिस को नहीं लगी।
डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि नासिर नाम के शख्स के घर पर आतंकी दो महीने तक रहे। नासिर और उसका परिवार आतंकियों को सीमा पार से ड्रोन के जरिए आने वाले हथियार, गोला बारूद, नकदी और अन्य सामान पहुंचाते रहे। यह भी कहा कि नासिर एक पूर्व आतंकी है।
पुलिस की उस सूची में भी शामिल है, जिस पर पुलिस की नजर रहती है। पुलिस उससे दो से तीन बार पूछताछ भी कर चुकी है। अब सवाल यह है कि नासिर पर पुलिस की नजर थी, तो फिर दो महीने तक कैसे नासिर के घर पर आतंकियों ने पनाह ले ली।
वह दो महीनों तक सीमा पार से आने वाले ड्रोन के जरिए सामान ही पहुंचाता रहा। इसकी कोई जानकारी नहीं मिली।
खुफिया तंत्र की भी चूक
बता दें कि राजोरी-पुंछ जैसे इलाकों में कई खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं। इनमें सैन्य एजेंसी, राॅ, आईबी, सीआईडी, सीआई आदि शामिल हैं। बावजूद इसके किसी को पता नहीं चला कि एक पूर्व आतंकी के घर पर आतंकी महीनों से पनाह लिए हुए हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते हैं। आतंकी अपनी साजिश में कामयाब भी हो गए।
ढांगरी के बाद भी इतनी लापरवाही
बता दें कि तीन महीने पहले राजोरी के ढांगरी में हिंदुओं का नरसंहार हुआ। इसके बाद तमाम सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां डेरा डालकर राजोरी-पुंछ में बैठ गईं। अभी तक नरसंहार में शामिल आतंकियों का पता नहीं चला, जबकि आतंकियों ने फिर से वैसा ही हमला कर दिया। एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद पुंछ हमला खुफिया तंत्र की भी बड़ी नाकामी है।