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सुरेंद्र चौधरी ने छोड़ी पीडीपी
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जम्मू। पीडीपी में उठापटक और अंतर्कलह के बीच पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। कुछ दिन पहले पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) के महासचिव और संसदीय मामलों की समिति से इस्तीफा देने वाले क्षुब्ध पार्टी के पूर्व एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने मंगलवार को नौशेरा और सुंदरबनी के जनप्रतिनिधियों के साथ पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा, पीडीपी भूमाफिया और ड्राइंग रूम राजनेताओं की पार्टी बन गई है, जो खुद ही अहम फैसले ले रहे हैं। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को आड़े हाथ लेते हुए उन पर अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के एजेंडे से भटक कर काम करने के आरोप लगाए। कहा, आज पीडीपी जम्मू-कश्मीर में अपनी पहचान को ढूंढने का काम कर रही है।
यहां पत्रकारों से रूबरू होते हुए चौधरी ने कहा कि स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में 1999 में पीडीपी को अस्तित्व में लाया गया था। जब उनका देहांत हुआ तो वह पार्टी को 28 विधायक, 14 एमएलसी और जमीनी स्तर पर मजबूत लीडरशिप देकर गए, लेकिन पार्टी के आला कमान के कमजोर नेतृत्व में पीडीपी धीरे-धीरे कमजोर होती गई। जिन लोगों ने मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ विकट परिस्थितियों में भी पीडीपी को मजबूत बनाने के लिए काम किया उन्हें आज कोई जगह नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफा देने के कई दिन बाद भी उन्हें महबूबा मुफ्ती या अन्य किसी ने फोन तक करके नहीं पूछा। पार्टी मुफ्ती मोहम्मद सईद के एजेंडे से भटक गई है।
मकबरे पर सवाल नहीं उठाना चाहिए
उन्होंने कहा कि पीडीपी सरकार के कार्यकाल में जो कुछ हुआ उसके बारे में पूछा जा सकता है, लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद के मकबरे पर सवाल नहीं उठाने चाहिएं, बल्कि उसके विस्तार को लेकर काम करना चाहिए, ताकि लोग उन्हें जान सकें। वह सांप्रदायिक नहीं थे और उन्होंने देश और जम्मू-कश्मीर की भलाई के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि आज उनके और समर्थकों के इस्तीफा देने से पीरपंजाल में नौशेरा और सुंदरबनी में पीडीपी का अस्तित्व खत्म हो गया है। वह किसी एजेंसी या सरकार के दबाव में इस्तीफा नहीं दे रहे हैं और अपने विधानसभा में जाकर लोगों की आवाज पर ही काम करेंगे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा उनके समर्थन में 108 लोगों जिनमें बीडीसी चेयरमैन, डीडीसी सदस्य, पंच, सरपंच, ब्लॉक, जोन कमेटियों आदि के सदस्यों ने इस्तीफा दिया है।
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यहां पत्रकारों से रूबरू होते हुए चौधरी ने कहा कि स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में 1999 में पीडीपी को अस्तित्व में लाया गया था। जब उनका देहांत हुआ तो वह पार्टी को 28 विधायक, 14 एमएलसी और जमीनी स्तर पर मजबूत लीडरशिप देकर गए, लेकिन पार्टी के आला कमान के कमजोर नेतृत्व में पीडीपी धीरे-धीरे कमजोर होती गई। जिन लोगों ने मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ विकट परिस्थितियों में भी पीडीपी को मजबूत बनाने के लिए काम किया उन्हें आज कोई जगह नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफा देने के कई दिन बाद भी उन्हें महबूबा मुफ्ती या अन्य किसी ने फोन तक करके नहीं पूछा। पार्टी मुफ्ती मोहम्मद सईद के एजेंडे से भटक गई है।
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मकबरे पर सवाल नहीं उठाना चाहिए
उन्होंने कहा कि पीडीपी सरकार के कार्यकाल में जो कुछ हुआ उसके बारे में पूछा जा सकता है, लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद के मकबरे पर सवाल नहीं उठाने चाहिएं, बल्कि उसके विस्तार को लेकर काम करना चाहिए, ताकि लोग उन्हें जान सकें। वह सांप्रदायिक नहीं थे और उन्होंने देश और जम्मू-कश्मीर की भलाई के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि आज उनके और समर्थकों के इस्तीफा देने से पीरपंजाल में नौशेरा और सुंदरबनी में पीडीपी का अस्तित्व खत्म हो गया है। वह किसी एजेंसी या सरकार के दबाव में इस्तीफा नहीं दे रहे हैं और अपने विधानसभा में जाकर लोगों की आवाज पर ही काम करेंगे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा उनके समर्थन में 108 लोगों जिनमें बीडीसी चेयरमैन, डीडीसी सदस्य, पंच, सरपंच, ब्लॉक, जोन कमेटियों आदि के सदस्यों ने इस्तीफा दिया है।
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