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नगर पालिका उपाध्यक्ष पर गिरी अविश्वास पत्र की गाज
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अरनिया। एक साल से अविश्वास पत्र की फिरकी में फंसी नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी को आखिरकार गुरुवार को राहत मिल गई। हालांकि इस फिरकी की गाज उपाध्यक्ष पर जरूर गिरी।
बतादें बीते वर्ष मार्च माह में नगर पालिका अरनिया के 13 में से सात पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सैनी के खिलाफ अविश्वास पत्र लाकर अध्यक्ष की कुर्सी को खतरे में डाल दिया था। हालांकि इस बीच एक-दो दफा इसे कोर्ट में दाखिल किया गया। मगर कोर्ट ने साल में मात्र एक ही बार नगर पालिका को इस लाने को कहा। इसलिए अगली सुनवाई मार्च में ही होंगी। तब तक रमेश सैनी ही अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहेंगे। पूरे मामले के अनुसार भाजपा हाई कमान कि ओर से अध्यक्ष के बजाय उपाध्यक्ष बदलने का फैसला लेते हुए वार्ड-12 के पार्षद डा. एमएल राव पर उपाध्यक्ष का पासा फेंका, जिसे राव ने स्वीकार कर लिया। जिसका खुलासा भाजपा के पूर्व विधायक अश्वनी शर्मा ने बुधवार को अरनिया में की गई प्रेसवार्ता में किया।
वहीं पूर्व विधायक ने बताया कि 2018 में हुए नगर पालिका अरनिया में चुनाव में यहां के लोगों ने भाजपा को मेंढढ दिया था, ताकि अच्छा विकास हो सके। जिसे भाजपा के सभी सात पार्षदों ने मान भी लिया और अपने हस्ताक्षर कर कोर्ट में भेज दिया। जिसे आज मंजूर कर लिया गया। वहीं अध्यक्ष रमेश सैनी का कहना है कि गुरुवार को सातों पार्षदों के हस्ताक्षर किए दस्तावेज को कोर्ट में पेश किया गया। जिसमें वार्ड सात के पार्षद को उपाध्यक्ष के पद से हटाकर वार्ड 12 के पार्षद डा. एमएल राव को बनाया गया है। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। अब उनकी शपथ का दिन जिलाधीश की ओर से निर्धारित किया जाएगा।
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बतादें कि 20 अक्तूबर 2018 में हुए नगर पालिका अरनिया के चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था, जबकि कांग्रेस को एक व पांच सीटों पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की थी। अध्यक्ष की कुर्सी को अल्पमत में लाने में सबसे बड़ा हाथ डॉक्टर एमएल राव का था। जिन्हें हाई कमान की सहमति से उपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाकर पूरे मामले को ही निपटा दिया गया।
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बतादें बीते वर्ष मार्च माह में नगर पालिका अरनिया के 13 में से सात पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सैनी के खिलाफ अविश्वास पत्र लाकर अध्यक्ष की कुर्सी को खतरे में डाल दिया था। हालांकि इस बीच एक-दो दफा इसे कोर्ट में दाखिल किया गया। मगर कोर्ट ने साल में मात्र एक ही बार नगर पालिका को इस लाने को कहा। इसलिए अगली सुनवाई मार्च में ही होंगी। तब तक रमेश सैनी ही अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहेंगे। पूरे मामले के अनुसार भाजपा हाई कमान कि ओर से अध्यक्ष के बजाय उपाध्यक्ष बदलने का फैसला लेते हुए वार्ड-12 के पार्षद डा. एमएल राव पर उपाध्यक्ष का पासा फेंका, जिसे राव ने स्वीकार कर लिया। जिसका खुलासा भाजपा के पूर्व विधायक अश्वनी शर्मा ने बुधवार को अरनिया में की गई प्रेसवार्ता में किया।
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वहीं पूर्व विधायक ने बताया कि 2018 में हुए नगर पालिका अरनिया में चुनाव में यहां के लोगों ने भाजपा को मेंढढ दिया था, ताकि अच्छा विकास हो सके। जिसे भाजपा के सभी सात पार्षदों ने मान भी लिया और अपने हस्ताक्षर कर कोर्ट में भेज दिया। जिसे आज मंजूर कर लिया गया। वहीं अध्यक्ष रमेश सैनी का कहना है कि गुरुवार को सातों पार्षदों के हस्ताक्षर किए दस्तावेज को कोर्ट में पेश किया गया। जिसमें वार्ड सात के पार्षद को उपाध्यक्ष के पद से हटाकर वार्ड 12 के पार्षद डा. एमएल राव को बनाया गया है। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। अब उनकी शपथ का दिन जिलाधीश की ओर से निर्धारित किया जाएगा।
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बतादें कि 20 अक्तूबर 2018 में हुए नगर पालिका अरनिया के चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था, जबकि कांग्रेस को एक व पांच सीटों पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की थी। अध्यक्ष की कुर्सी को अल्पमत में लाने में सबसे बड़ा हाथ डॉक्टर एमएल राव का था। जिन्हें हाई कमान की सहमति से उपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाकर पूरे मामले को ही निपटा दिया गया।